अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं के कारोबार में शुक्रवार को शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान पीली धातु के रुख में तेज सुधार दर्ज किया गया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों की लगातार बिकवाली के बाद हाजिर सोना उबरकर 4,345 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया। ऊर्जा बाजार में आई हालिया मंदी और अमेरिकी मुद्रा के हल्के नरम पड़ने से निवेशकों का भरोसा इस पारंपरिक सुरक्षित निवेश पर फिर से लौटा है। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त बनाए रखने के ताजा संकेतों ने तेजी पर कुछ सीमाएं भी लगा रखी हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई की चिंताएं घटीं
ऊर्जा बाजार में जारी मंदी इस समय कीमती धातुओं के लिए मददगार साबित हो रही है। कच्चे तेल के भाव लगातार दूसरे दिन फिसलते हुए एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गए हैं। इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में आपूर्ति से जुड़े व्यवधानों के कम होने की उम्मीद है। सऊदी अरब एक प्रमुख पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल के प्रवाह को आंशिक रूप से बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। जब ऊर्जा लागत कम होती है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में थोक महंगाई का दबाव हल्का पड़ता है, जिससे वित्तीय बाजारों को थोड़ी राहत मिलती है।
बाजार की नजर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर होने वाली आगामी कूटनीतिक वार्ताओं पर भी टिकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले मंगलवार को खाड़ी देशों के नेताओं के साथ ईरान युद्ध से जुड़े अगले कदमों पर चर्चा करने वाले हैं। इस भू-राजनीतिक संवाद की संभावनाओं के बीच निवेशकों की महंगाई संबंधी चिंताएं काफी हद तक शांत हुई हैं। हाई रिज फ्यूचर्स के मेटल ट्रेडिंग डायरेक्टर डेविड मेगर का कहना है कि ऊर्जा कीमतों में भारी गिरावट ने सोने के बाजार से वह दबाव हटा दिया है जो महंगाई के चलते बना हुआ था।
फेडरल रिजर्व का ब्याज दर फैसला और भविष्य की दर वृद्धियां
बुधवार को अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी फेड फंड्स टारगेट रेंज को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत कर दिया। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था। नीति निर्धारकों ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य तक समय पर वापस लाने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने आने वाले महीनों में और अधिक दर वृद्धियों की संभावना भी जताई है।
सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, डेरिवेटिव्स व्यापारी अब अक्टूबर में होने वाली अगली मौद्रिक बैठक में दरों में एक और बढ़ोतरी की 53.1 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। सिर्फ एक दिन पहले तक यह अनुमान करीब 44 प्रतिशत के आसपास था। इस बीच ओसीबीसी के रणनीतिकारों ने रेखांकित किया है कि बॉन्ड प्रतिफल में तेजी और मजबूत डॉलर ने सोने की धारणा पर अस्थायी दबाव डाला था। अमेरिकी 2-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल 4.75 प्रतिशत के करीब पहुंच गया था जबकि 10-वर्षीय प्रतिफल 5 प्रतिशत के आसपास लौट आया था। विश्लेषकों का मानना है कि दर वृद्धि का कड़ा रास्ता बाजार पहले ही भुना चुका है, ऐसे में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में नरमी आने पर प्रतिफल और डॉलर नीचे गिर सकते हैं, जिससे मध्यम अवधि में सोने को ठोस आधार मिल सकता है।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर एक्सएयू/यूएसडी में निकट अवधि का रुख सकारात्मक बना हुआ है। हाजिर भाव अपने 100-दिवसीय मूविंग एवरेज और निचले बॉलिंजर बैंड से काफी ऊपर टिका है, जो इस बात का प्रमाण है कि खरीदार दीर्घकालिक तेजी के रुझान का पूरी मजबूती से बचाव कर रहे हैं। हालांकि, बॉलिंजर का मध्य बैंड ऊपर की तरफ तात्कालिक अवरोध खड़ा किए हुए है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 48.58 पर स्थिर है, जो किसी एकतरफा तेज गति के बजाय बाजार के सीमित दायरे में समेकन का संकेत दे रहा है।
वर्तमान में लाइव बाजार में सोने का भाव 4,425 डॉलर पर है, जो पिछले बंद स्तर 4,400 डॉलर से 0.57 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दिखाता है। ऊपरी स्तरों पर पहला बड़ा अवरोध बॉलिंजर सिंपल मूविंग एवरेज के केंद्र में 4,435 डॉलर के पास बना हुआ है। इसके बाद तेजी जारी रहने पर ऊपरी बॉलिंजर बैंड 4,678 डॉलर के पास चुनौती पेश कर सकता है। नीचे की ओर, पहला हल्का समर्थन 100-दिवसीय मूविंग एवरेज के पास 4,325 डॉलर पर है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो निचला बॉलिंजर बैंड 4,190 डॉलर के निकट मांग क्षेत्र का काम करेगा, जिसका मौजूदा तेजी की संरचना को बचाए रखने के लिए टिके रहना अनिवार्य है। 14-दिवसीय आरएसआई इस समय 50 के न्यूट्रल स्तर पर है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 108.68 डॉलर के दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। तात्कालिक धुरी बिंदु 4,412 डॉलर पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध 4,452 डॉलर और दूसरा 4,480 डॉलर पर मौजूद है, वहीं समर्थन 4,385 डॉलर और 4,345 डॉलर के स्तरों पर देखा जा रहा है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और जापानी येन पर बैंक ऑफ जापान का असर
विदेशी मुद्रा बाजारों में भी डॉलर की नरमी का सीधा असर दूसरी मुद्राओं पर देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (एयूडी/यूएसडी) लगातार तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए वॉल स्ट्रीट समाप्ति के बाद 0.7100 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के पार निकल गया। डॉलर में आई कमजोरी ने इस जोड़ी को आगे बढ़ने का सहारा दिया, जबकि कारोबारी फेड के सख्त संदेश का विश्लेषण करने में जुटे रहे।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (यूएसडी/जेपीवाई) 156.00 के दायरे में नुकसान के साथ कारोबार कर रहा है। यह जोड़ी 156.50 के स्तर के पास लड़खड़ाने के बाद अपनी तीन दिन की बढ़त गंवा चुकी है। बाजार का पूरा ध्यान शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक पर लगा हुआ है, जहां निवेशक 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि की पूरी उम्मीद लगाए बैठे हैं। जापान की दशकों पुरानी बेहद सस्ती ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित किया था, जिससे येन वैश्विक फंडिंग का सबसे सस्ता जरिया बना रहा। लेकिन अब बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक कसावट की ओर बढ़ने से वैश्विक पूंजी प्रवाह का यह समीकरण नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
सुरक्षित निवेश और केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी केंद्रीय भूमिका निभाई है। आभूषणों के उपयोग के अलावा आधुनिक वित्तीय तंत्र में इसे सबसे भरोसेमंद सुरक्षित परिसंपत्ति माना जाता है, जो अशांत दौर में पूंजी की रक्षा करती है। यह मुद्रा अवमूल्यन और बेकाबू मुद्रास्फीति के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करता है क्योंकि इसका अस्तित्व किसी सरकार या निजी संस्था की साख पर निर्भर नहीं होता।
दुनिया के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की साख बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए वे भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। विशाल स्वर्ण भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता और ऋण शोधन क्षमता का पैमाना माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी कुल कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से किसी भी वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीद थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते हुए देशों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में लगातार तेजी से इजाफा कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों के साथ सोने का विपरीत संबंध रहता है, जिसके चलते जब भी डॉलर गिरता है, पीली धातु में स्वतः उछाल देखने को मिलता है।



















