भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत सतर्क और सुस्त रहने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विदेशी बाजार से मिलने वाले संकेत बहुत मजबूत नहीं हैं। सुबह 7:36 बजे गिफ्ट निफ्टी करीब 8 अंक की मामूली गिरावट दर्ज करते हुए 24,532 के स्तर के पास कारोबार कर रहा था। घरेलू निवेशक आज वैश्विक मोर्चे पर जारी घटनाक्रमों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जिनमें अमेरिकी बाजारों की कल की चाल, कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल, एशियाई बाजारों के मिले-जुले संकेत और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं।
अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट, टेक्नोलॉजी शेयरों ने दी राहत
सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। डाउ जोन्स में 0.34 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.32 फीसदी नीचे आकर बंद हुआ। वहीं टेक शेयरों में हलचल के बीच नैस्डैक सूचकांक में 0.60 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, कारोबार के दौरान टेक्नोलॉजी सेक्टर की कुछ कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखी गई, जिससे निचले स्तरों पर बाजार को थोड़ा सहारा मिला और बड़ी गिरावट थम गई।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से लागत बढ़ने की चिंता
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी का रुख देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड लगभग 0.75 फीसदी की बढ़त के साथ 89.58 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। इसके साथ ही अमेरिकी कच्चा तेल यानी WTI क्रूड करीब 0.87 फीसदी चढ़कर 83.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। भारत जैसे बड़े तेल आयात करने वाले देश के लिए कच्चे तेल का महंगा होना चिंता का विषय माना जाता है, क्योंकि इससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ती है और महंगाई का दबाव गहरा सकता है।
एशियाई बाजारों में देखा गया मिला-जुला रुख
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजारों में आज सुबह एक समान रुझान देखने को नहीं मिला, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 3 फीसदी की जोरदार तेजी के साथ कारोबार कर रहा था। वहीं जापान का निक्कई इंडेक्स 0.15 फीसदी की हल्की बढ़त में रहा और ताइवान के बाजार में करीब 0.70 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इसके विपरीत, हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स लगभग 1.10 फीसदी की गिरावट के साथ दबाव में दिखा। एशियाई बाजारों का यह विभाजित रुख भारतीय निवेशकों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दे रहा है।
मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक सुरक्षा जोखिम
वैश्विक वित्तीय बाजारों पर मध्य पूर्व में गहराते तनाव का साया भी बना हुआ है। बाजार के जानकार ईरान और ओमान के बीच होने वाली कूटनीतिक बातचीत पर नजर रखे हुए हैं। इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ हार्मुज और गोल्फ ऑफ ओमान जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों की खबरों ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। रेड सी में एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले और रूस की दो तेल रिफाइनरियों पर हमलों की खबरों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
अमेरिका के CPI आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के फैसले पर निगाहें
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों की नजरें आज जारी होने वाले अमेरिका के जुलाई महीने के CPI यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों पर टिकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार महंगाई दरों में 0.1 फीसदी की मामूली बढ़त हो सकती है। अगर आंकड़े अनुमान से कम रहते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी किए जाने की गुंजाइश कम हो जाएगी। इसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर, सोने के भाव और दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ेगा। कुल मिलाकर, आज भारतीय बाजार की चाल गिफ्ट निफ्टी, क्रूड ऑयल, एशियाई संकेतों और अमेरिकी महंगाई आंकड़ों के मिले-जुले असर से तय होगी।



















