कच्चा तेल एक बार फिर जोरदार तरीके से लौट आया है, और डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि यह उछाल कई महीनों में बाजार की सबसे तेज बढ़तों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बिगड़ता तनाव है, जहां लगातार हो रहे अमेरिकी हमलों ने कारोबारियों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं और ऊर्जा की कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल दिया है। ब्रेंट कच्चे तेल ने अभी अप्रैल के बाद की अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी दर्ज की है, और यह रफ्तार इस हफ्ते की शुरुआत तक बनी रही।
बीते हफ्ते ब्रेंट कच्चा तेल +15.91% चढ़ा, जिसमें अकेले शुक्रवार को +4.59% की छलांग शामिल रही, और यह $88.10 प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह अप्रैल के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त थी। खरीदारी यहीं नहीं रुकी। इस हफ्ते की शुरुआत में ब्रेंट +2.45% और चढ़कर $90.26 प्रति बैरल पर पहुंच गया, और यह तेजी ईरान के खिलाफ अमेरिका के लगातार नौवीं रात के हमलों के बाद आई।
तनाव तेल की कीमतों को क्यों हिला रहा है
असली चिंता आपूर्ति की है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हमलों का सिलसिला थमने का कोई नाम नहीं ले रहा, इसलिए कारोबारी दुनिया के एक अस्थिर हिस्से से ऊर्जा की सप्लाई को लेकर घबराए हुए हैं। यही घबराहट सीधे तौर पर कच्चे तेल के दाम में उछाल के रूप में सामने आ रही है। जब किसी बड़े तेल उत्पादक इलाके में टकराव बढ़ता है, तो बाजार सप्लाई में रुकावट का जोखिम पहले से ही कीमतों में जोड़ने लगता है।
महंगाई का डर फिर लौटा
यह सिर्फ तेल की कहानी नहीं है। इसी दौरान यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतें भी लगातार चढ़ी हैं, और इस जोड़ ने एक ज्यादा जिद्दी महंगाई के झटके का डर फिर से जगा दिया है। बीते हफ्ते सबसे नजदीकी महीने का गैस वायदा +19.95% उछला, जिसमें शुक्रवार को +5.79% की बढ़त रही, और यह €58.01 प्रति MWh तक पहुंच गया, जो मार्च के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। महंगे तेल और गैस का मतलब है कारखानों, परिवहन और बिजली की बढ़ती लागत, जो अंत में आम खर्च तक पहुंचती है।
शेयर और बॉन्ड बाजार का हाल
तनाव बढ़ने के बावजूद अमेरिकी शेयर वायदा अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा। एसएंडपी 500 के अनुबंध +0.15% ऊपर थे और नैस्डैक वायदा +0.47% चढ़ा। लेकिन बॉन्ड बाजार की कहानी अलग रही। सरकारी बॉन्ड वायदा कमजोर पड़ा, जो इस बात का साफ संकेत है कि निवेशक अब ज्यादा मजबूत महंगाई और शायद लंबे समय तक सख्त ब्याज दरों की तैयारी कर रहे हैं।
बड़ा सवाल: महंगा तेल कब चुभने लगेगा
डॉयचे बैंक के रणनीतिकार एक बड़ा सवाल भी उठा रहे हैं। उनका ध्यान इस बात पर है कि ऊंचे तेल के दाम आखिर किस बिंदु पर पूरे बाजार को नीचे खींचने लगते हैं। इसी विषय पर 14 जुलाई को उनका एक थीमैटिक रिसर्च और 15 जुलाई को कमोडिटी आउटलुक सामने आया, जिनमें इसी 'दर्द की सीमा' की पड़ताल की गई है, यानी वह स्तर जहां से महंगा तेल एक बड़ी बिकवाली की वजह बन सकता है।
अभी कच्चा तेल कहां खड़ा है
ताज़ा बाजार आंकड़ों के मुताबिक कच्चा तेल फिलहाल करीब $82.36 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव $82.49 से मामूली -0.16% नीचे है। बीते एक साल में इसका दायरा $54.98 से $119.48 तक रहा है। इसका RSI 58 पर है, यानी रुझान थोड़ा तेजी की ओर झुका है पर अभी ओवरबॉट नहीं। कुल मिलाकर, जब तक अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ठंडा नहीं पड़ता, तेल और गैस की चाल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनी रहेगी।



















