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कच्चे तेल में उछाल के बाद नरमी, ट्रंप के बयान और चीनी निर्यात से ब्रेंट 102 डॉलर पर फिसलाबाज़ार
9 अक्तू॰ 2026, 1:53 pm (2 घंटे पहले)· 0

कच्चे तेल में उछाल के बाद नरमी, ट्रंप के बयान और चीनी निर्यात से ब्रेंट 102 डॉलर पर फिसला

ईरान पर हमले को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के बयान और चीन से ईंधन निर्यात दोबारा शुरू होने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के शिखर से नीचे आ गया है।

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तकनीकी विश्लेषण9 अक्टूबर 2026

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

CL का RSI 47 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जोरदार तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड एक समय 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करते हुए लगभग एक महीने के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई। दिन के कारोबार में तेल की कीमतें 106 डॉलर तक छूने के बाद फिसलकर 102 से 103 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गईं। बाजार में यह ठहराव मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव में आई तात्कालिक कमी और आपूर्ति से जुड़े नए घटनाक्रमों के बाद देखने को मिला है।

भू-राजनीतिक बयानबाजी और आपूर्ति से जुड़ी राहत

कच्चे तेल में आई हालिया गिरावट की सबसे प्रमुख वजह अमेरिका की ओर से आया राजनीतिक रुख रहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इस बयान के सामने आते ही तेल बाजार में आपूर्ति बाधित होने की जो तात्कालिक आशंकाएं बनी हुई थीं, वे काफी हद तक शांत हो गईं। इसके साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आईं कि चीन अक्टूबर महीने में परिष्कृत ईंधन का निर्यात फिर से शुरू करने जा रहा है। चीनी निर्यात दोबारा शुरू होने की संभावना ने ईंधन बाजार पर बने दबाव को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई, जिससे ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर के करीब आ गया।

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होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और तूफान की चिंताएं

कीमतों में हालिया गिरावट से ठीक पहले बाजार में अभूतपूर्व उछाल देखा गया था। कच्चे तेल में शुरुआती उछाल की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट थी। पिछले हफ्ते तेल टैंकरों पर रिकॉर्ड संख्या में हुए हमलों के बाद इस प्रमुख समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार पर सीधा असर पड़ा था। इसके अलावा, अमेरिकी खाड़ी तट पर हरीकेन इसाइआस के करीब पहुंचने से तेल उत्पादन में संभावित रुकावट को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। इन दोनों घटनाओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर डर पैदा कर दिया था, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड अचानक 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था।

मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं की स्थिति

कच्चे तेल के साथ-साथ अन्य वित्तीय बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर अपने 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बना हुआ है। इसका असर विभिन्न मुद्रा युग्मों पर साफ नजर आ रहा है। एशियाई कारोबार में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) अपने साप्ताहिक निचले स्तर से संभलते हुए 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश करता दिखा, जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी आक्रामक नीतिगत उम्मीदों का भी समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, जापान में घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज होने से जापानी येन पर दबाव बना और USD/JPY 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा। कीमती धातुओं की बात करें तो सोना शुक्रवार को मजबूती के साथ 4,200 डॉलर के स्तर को दोबारा छूता नजर आया और अपने दो महीने के निचले स्तर से उबरने में सफल रहा, हालांकि इसका दैनिक आरएसआई अभी भी मंदी के संकेत दे रहा है।

कच्चे तेल का तकनीकी ढांचा और ताजा आंकड़े

अगर कमोडिटी वायदा बाजार के ताजा सत्र की बात करें, तो क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (CL=F) का भाव 90.43 डॉलर पर देखा गया, जो पिछले बंद स्तर 91.49 डॉलर के मुकाबले 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.09 गुना दर्ज हुआ। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 47 पर है। एमएसीडी -0.39 पर है, जो सिग्नल लाइन 0.43 और हिस्टोग्राम -0.82 के साथ कमजोरी दिखा रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 91.89 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 90.14 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 81.20 डॉलर पर है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 89.17 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 83.22 डॉलर पर बना हुआ है। इसमें गोल्डन क्रॉस बना हुआ है जो लंबी अवधि के अपट्रेंड को दर्शाता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 84.20 डॉलर से 104.49 डॉलर के दायरे में हैं और कीमत इसके बीच में है। एडीएक्स 18 पर कमजोर ट्रेंड का संकेत दे रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 34 और सिग्नल लाइन 25 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 4.19 डॉलर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। महत्वपूर्ण स्तरों में धुरी बिंदु (पिवट) 90.68 डॉलर, पहला प्रतिरोध (R1) 91.16 डॉलर, दूसरा प्रतिरोध (R2) 91.90 डॉलर, जबकि पहला समर्थन (S1) 89.94 डॉलर और दूसरा समर्थन (S2) 89.46 डॉलर पर स्थित है। 20 दिनों का आधार समर्थन 86.86 डॉलर और प्रतिरोध 106.75 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

सवाल-जवाब

ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105 डॉलर से नीचे क्यों आ गईं?
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला न करने का बयान देने और चीन द्वारा अक्टूबर में परिष्कृत ईंधन निर्यात शुरू करने की खबरों के बाद कीमतें घटकर 102-103 डॉलर पर आ गईं।
कच्चे तेल में शुरुआती उछाल की मुख्य वजह क्या थी?
होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर रिकॉर्ड हमलों के कारण जहाजों की आवाजाही ठप होना और अमेरिकी तट पर हरीकेन इसाइआस का खतरा इसका मुख्य कारण था।
चीन के किस कदम से ईंधन बाजार को राहत मिली?
चीन द्वारा अक्टूबर महीने में परिष्कृत ईंधन का निर्यात दोबारा शुरू करने की खबरों ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति की चिंता कम की।
सोने और मुद्रा बाजार में शुक्रवार को क्या रुझान देखा गया?
सोना सुधरकर 4,200 डॉलर पर पहुंचा, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 की ओर बढ़ा और कमजोर घरेलू खर्च के कारण येन के मुकाबले डॉलर 158.00 के करीब बना रहा।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·46 मिनट पहले

चलो गनीमत है कि तेल के दाम थोड़े नीचे आए, वरना हर चीज़ पर महंगाई की मार पड़नी तय थी। ट्रंप के एक बयान से बाजार में थोड़ी राहत तो मिली है।

Michael Anderson@michael-anderson·1 घंटे पहले

ट्रंप का चुनाव से पहले ईरान पर हमले से इनकार करना और चीन से ईंधन की आपूर्ति शुरू होना गनीमत रहा, वरना बाजार में हाहाकार मच जाता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

माइकल, सही कहा आपने। अगर वो बयान वक्त पर न आता तो तेल के दाम आसमान छू लेते और आम आदमी की जेब पर भारी मार पड़ती।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

ट्रंप के बयान ने फिलहाल के लिए बाजार की बड़ी टेंशन कम कर दी है, वरना कच्चे तेल के दाम जिस तरह भाग रहे थे, जेब पर भारी पड़ना तय था। साथ ही चीन का ईंधन बाजार में वापस लौटना भी राहत की बात है।

Rohan Gupta@rohan-gupta·1 घंटे पहले

रवि जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब पिछली बार कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, तब मैंने अपनी इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग स्टेशन पर लंबी लाइन देखी थी।

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