बीजिंग में भारत और चीन के रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई एक अहम बैठक के दौरान साफ तौर पर कहा कि दोनों देश एक-الأخر के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं। इस उच्च स्तरीय मुलाकात ने यह संकेत दे दिए हैं कि पिछले कई वर्षों से सीमा पर चले आ रहे तनाव को पीछे छोड़कर दोनों एशियाई महाशक्तियां आपसी सहयोग की एक नई राह पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हो रही हैं।
बीजिंग में हुई 25वीं विशेष प्रतिनिधियों की बैठक
यह ऐतिहासिक घटनाक्रम 25 अगस्त 2026 को चीन की राजधानी बीजिंग में सामने आया, जहां भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं दौर की बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय पक्ष से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने संभाली, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी ने किया। वर्ष 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के कूटनीतिक और सामरिक संबंधों में काफी कड़वाहट आ गई थी, लेकिन बीजिंग की इस ताजा बातचीत ने द्विपक्षीय वार्ताओं के रास्ते में जमी बर्फ को काफी हद तक पिघला दिया है।
सहयोग और दोस्ती का नया दौर
अजीत डोभाल और वांग यी के बीच हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के हाव-भाव और बातचीत के लहजे से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों देश अब कड़वी यादों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखना चाहते हैं। इस बैठक में दोनों पक्षों की ओर से यह सहमति बनती नजर आ रही है कि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। कूटनीतिक हलकों में इस मुलाकात को आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह सामान्य करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।






















