मैक्सिको के केंद्रीय बैंक ने अपनी मुख्य ब्याज दर को 6.50% पर जस का तस रखने का फैसला किया है, जो बाजार के अनुमानों से पूरी तरह मेल खाता था और सर्वसम्मति से लिया गया। इसके बावजूद नीति निर्माताओं ने साफ संकेत दिया कि महंगाई से जुड़े जोखिम अब भी ऊपर की तरफ झुके हुए हैं।
फैसले में क्या तय हुआ
बैंक्सिको के नाम से मशहूर मैक्सिको के केंद्रीय बैंक ने अपनी मुख्य संदर्भ दर को 6.50% पर छेड़े बिना रखा। यह फैसला सभी सदस्यों की सहमति से हुआ और इसमें कोई मतभेद नहीं रहा। दर भले ही न बदली हो, लेकिन बैंक ने यह नहीं माना कि महंगाई का दबाव खत्म हो गया है, बल्कि उसका कहना है कि कीमतों के बढ़ने का जोखिम अब भी ज्यादा है।
बैंक्सिको का काम और महंगाई का लक्ष्य
देश के केंद्रीय बैंक के तौर पर बैंक्सिको की जिम्मेदारी मैक्सिकन पेसो (MXN) की कीमत को बनाए रखना और मौद्रिक नीति तय करना है। इसका सबसे बड़ा मकसद महंगाई को कम और स्थिर रखना है। बैंक 3% की दर को अपना लक्ष्य मानता है, जो 2% से 4% के सहनशील दायरे का बीच का बिंदु है। यानी कोशिश यही रहती है कि महंगाई इसी लक्ष्य के आसपास टिकी रहे।
ब्याज दर की भूमिका
मौद्रिक नीति को दिशा देने का बैंक्सिको का सबसे बड़ा हथियार ब्याज दर तय करना है। जब महंगाई लक्ष्य से ऊपर जाती है, तो बैंक दरें बढ़ाकर उसे काबू में करने की कोशिश करता है। इससे घर खर्च चलाने वालों और कारोबारियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है और अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर मैक्सिकन पेसो (MXN) के लिए फायदेमंद होती हैं, क्योंकि इनसे रिटर्न बढ़ता है और देश निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन जाता है। इसके उलट, कम ब्याज दरें पेसो को कमजोर करती हैं। यहां सबसे अहम बात यह है कि डॉलर के मुकाबले ब्याज दरों का फर्क, यानी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तुलना में बैंक्सिको दरें कैसे तय करता है, पेसो की चाल को काफी हद तक तय करता है।
फेड का इतना असर क्यों
बैंक्सिको साल में आठ बार बैठक करता है और इसकी मौद्रिक नीति पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों का गहरा असर रहता है। यही वजह है कि बैंक की नीति तय करने वाली समिति आमतौर पर फेड की बैठक के एक हफ्ते बाद जुटती है। ऐसा करके बैंक्सिको फेड के कदमों पर प्रतिक्रिया देता है और कई बार उनसे पहले ही कदम भी उठा लेता है। मिसाल के तौर पर, कोविड-19 महामारी के बाद, फेड के दरें बढ़ाने से पहले ही बैंक्सिको ने यह कदम उठा लिया था, ताकि पेसो की बड़ी गिरावट की आशंका को घटाया जा सके और देश को अस्थिर कर सकने वाले पूंजी के बाहर जाने को रोका जा सके।













