वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक बार फिर भारी अनिश्चितता का माहौल बन गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष और जहाजरानी के प्रमुख समुद्री मार्गों पर मंडराते खतरों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मामूली गिरावट के बावजूद तेल की कीमतें बहु-सप्ताह के उच्च स्तर के करीब बनी हुई हैं। फारस की खाड़ी में तनाव और आपूर्ति मार्गों में रुकावट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव साफ देखा जा सकता है।
लाल सागर में बढ़ा सैन्य संकट और सऊदी अरब के वैकल्पिक मार्ग
फारस की खाड़ी में जारी संघर्ष का असर अब लाल सागर के आसपास के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी दिखने लगा है। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जीज़ान और यानबु स्थित तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए हैं। इन हमलों के जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में हूती सैन्य ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की है। यह सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब से जुड़े तेल टैंकरों पर हुए हमलों और सऊदी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने की धमकियों के बाद सामने आई है।
सऊदी अरब रणनीतिक रूप से अपने तेल निर्यात के लिए लाल सागर के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करता आ रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित रुकावटों से बचना और निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना है। हालांकि, अगर लाल सागर वाले इन वैकल्पिक मार्गों पर लंबे समय तक कोई बाधा आती है, तो इससे कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भारी दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका ने भी आपूर्ति श्रृंखला की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों का रुख और रिफाइंड उत्पादों की किल्लत
तेल बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3.9 प्रतिशत गिरकर 96.78 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। इस एक दिवसीय गिरावट के बावजूद, पूरे कारोबारी सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड में 9.9 प्रतिशत की बड़ी बढ़त दर्ज की गई। यह लगातार चौथा हफ्ता था जब कच्चे तेल की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर तेजी देखी गई।
कॉमर्ज़बैंक के विश्लेषक चार्ली ले के अनुसार, केवल कच्चे तेल की आपूर्ति ही नहीं बल्कि रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर भी असर पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल और अन्य रिफाइंड उत्पादों के वैश्विक स्टॉक में भारी गिरावट आई है। इन्वेंट्री घटने के कारण बाजार में पहली बार रिफाइंड उत्पादों की किल्लत जैसी स्थिति बनती दिख रही है, जो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों को और बढ़ा सकती है।
वैश्विक फॉरेक्स बाजार पर डॉलर की कमजोरी का असर
मध्य पूर्व के तनाव के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। डॉलर में आई इस नरमी का फायदा अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को मिला है
- जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD): ब्रिटिश पाउंड ने पिछले हफ्ते के तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए एशियाई कारोबारी सत्र में शानदार बढ़त दर्ज की और 1.3300 के मध्य स्तर को पार कर लिया।
- ईयूआर/यूएसडी (EUR/USD): यूरो ने भी सप्ताह की शुरुआत बढ़त के साथ की और एशियाई सत्र के दौरान 1.1400 का स्तर पार कर लिया। अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने से जारी संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से यूरो को सहारा मिला है।
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD): चालू वर्ष की पहली छमाही में चार साल के उच्चतम स्तर को छूने के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बड़ी गिरावट देखी गई थी। मध्य पूर्व में जारी दुश्मनी के कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के परिदृश्य पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।
सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
अनिश्चितता के इस माहौल में सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी हलचल देखी जा रही है। सोमवार को सोने की कीमत 4,100 डॉलर प्रति औंस के करीब बनी रही। हालांकि, निवेशकों की निगाहें इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले पर टिकी हुई हैं, जिसके कारण बाजार में सतर्कता का माहौल है।
दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में नरमी का रुख जारी है। कार्डानो (ADA) सोमवार को गिरकर 0.165 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। डेरिवेटिव्स बाजार के कमजोर संकेतकों और सुस्त रफ्तार के कारण कार्डानो में निकट भविष्य में गिरावट का जोखिम बना हुआ है।



















