वेल्स फार्गो के आरोन रेकर्स ने इसी महीने एनवीडिया (NVDA) के शेयर प्राइस टारगेट को 375 डॉलर से घटाकर 315 डॉलर कर दिया है। हालांकि, रेकर्स ने अभी भी अपने 'बाय' सिग्नल को बरकरार रखा है, क्योंकि उनका मानना है कि वर्तमान स्तर से अभी भी 63 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी की संभावना मौजूद है। 'बाय' रेटिंग बने रहने के बावजूद, टारगेट प्राइस में की गई यह कटौती भविष्य के जोखिमों की चेतावनी का संकेत हो सकती है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
वेल्स फार्गो ने एनवीडिया के शेयर टारगेट में क्यों की कमी?
वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बाजार के रुख में एनवीडिया (NVDA) सबसे आगे है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस एसेट ने लगातार नई ऊंचाइयों को छुआ है और कंपनी का मार्केट कैप दुनिया के अधिकांश देशों की GDP से भी अधिक हो चुका है। एनवीडिया (NVDA) की यह जबरदस्त तेजी पूरी तरह से उनके AI कंप्यूटिंग GPU यानी ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट चिप्स की अत्यधिक मांग के कारण है।
बाजार का मौजूदा ट्रेंड साफ है कि AI ही मुख्य प्रेरक शक्ति बना हुआ है। मुनाफा काफी ज्यादा है और माइक्रोन जैसी कंपनियां, जो AI मेमोरी चिप सप्लाई चेन की एक प्रमुख खिलाड़ी हैं, रिकॉर्ड आंकड़े पेश कर रही हैं और उनकी सप्लाई साल 2027 तक पूरी तरह बुक है। वास्तव में, AI के इस उछाल ने दुनिया भर में चिप की कमी पैदा कर दी है। बाजार पर 'एनवीडिया टैक्स' का असर इतना गहरा है कि अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। एप्पल और सोनी समेत अन्य कंपनियों ने भी अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने की घोषणा की है।
हालांकि, AI शेयरों में इस अचानक आई तेजी ने निवेशकों और यहां तक कि केंद्रीय बैंकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। चीन के शीर्ष हेज फंड्स ने भी डर जताया है कि AI का बुलबुला जल्द ही फूटने वाला है। वीलस्प्रिंग एसेट के संस्थापक यांग डोंग के अनुसार, 'गिरावट का बिंदु ज्यादा दूर नहीं हो सकता है।'
लोकप्रिय ट्रेडर और साल 2008 के हाउसिंग संकट की भविष्यवाणी करने वाले माइकल बरी ने भी कहा है कि हम इस समय एक AI बुलबुले के दौर में हैं। उन्होंने एनवीडिया और पैलेंटिर पर अपनी मंदी वाली स्थिति (बेयरिश पोजीशन) का खुलासा किया है। उनका तर्क है कि AI कंपनियों के बीच होने वाला सर्कुलर फंडिंग का खेल 'एक फ्लाईव्हील नहीं, बल्कि धोखाधड़ी की तस्वीर है।' एआई परिदृश्य को लेकर मौजूद ये संदेह और बुलबुले की संभावना ही वे कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से वेल्स फार्गो ने एनवीडिया (NVDA) के लिए अपना शेयर प्राइस टारगेट कम किया है।













