भारतीय मुद्रा बाज़ार में हालिया हलचल के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94.50 के आसपास स्थिर बना हुआ है। बीते कारोबारी सत्र में USD/INR जोड़ी में गिरावट के साथ शुरुआत देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण विदेशी मुद्रा का भारी आगमन था। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक के विशेष उपायों से मिले इस समर्थन की रफ्तार आने वाले दिनों में धीमी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ताज़ा बाज़ार डेटा के अनुसार USD/INR का भाव 94.47 के आसपास देखा गया है, जो पिछले बंद स्तर 94.49 से मामूली 0.01 प्रतिशत नीचे है।
विदेशी पूंजी प्रवाह और भारतीय रिज़र्व बैंक की रणनीति
हालिया आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि केंद्रीय बैंक के विशेष कदमों की मदद से कुल 136.4 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हासिल हुआ था। इस विशाल राशि में से लगभग 127.2 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान एफसीएनआर (बी) यानी फॉरेन करंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक जमा के जरिए आया। इस विशेष जमा खिड़की के 31 अगस्त को बंद होने के साथ ही निकट अवधि में मिलने वाली डॉलर की आपूर्ति में कमी आने की उम्मीद है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक अब मुद्रा बाज़ार में दोनों तरफ संतुलन बनाने की रणनीति अपना सकता है। रुपये की मजबूती के दौर में केंद्रीय बैंक बिना किसी रोक-टोक के तेजी देने के बजाय डॉलर की खरीदारी कर सकता है या अपने फॉरवर्ड एक्सपोज़र को कम करने का प्रयास कर सकता है। इससे बाज़ार में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
USD/INR का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर
तकनीकी चार्ट पर USD/INR में दैनिक आधार पर मंदी का रुझान बना हुआ है, लेकिन रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI गिरकर 41 के स्तर पर आ गया है, जो ओवरसोल्ड स्थितियों का संकेत देता है। इसके चलते गिरावट की गति में नरमी आने से इनकार नहीं किया जा सकता। बाज़ार का MACD इंडिकेटर शुन्य से नीचे -0.22 पर है जो सिग्नल लाइन -0.14 के मुकाबले मंदी दर्शा रहा है।
प्रमुख मूविंग एवरेज की बात करें तो 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA20 95.19 पर, EMA50 95.32 पर और EMA200 93.12 पर स्थित है। 50 दिवसीय मूविंग एवरेज के 200 दिवसीय मूविंग एवरेज से ऊपर रहने के कारण दीर्घकालिक रुझान अब भी तेजी की तरफ बना हुआ है। दैनिक आधार पर 0.67 का ATR वोलाटिलिटी बफर दिखाता है।
व्यापारियों के लिए तकनीकी सहायता स्तर 94.30 और जून के निचले स्तर 94.15 पर मौजूद हैं, जबकि दैनिक पिवट बिंदु 94.47 के पास तात्कालिक सहायता S1 94.43 और S2 94.38 पर बनी हुई है। वहीं प्रतिरोध स्तरों में 95.10 (जून के निचले स्तर से जुलाई के उच्च स्तर का 61.8% फिबोनाची रीट्रेसमेंट), 95.87 और 96.74 (76.4% फिबोनाची स्तर) पर पहला और दूसरा रेजिस्टेंस R1 94.52 व R2 94.57 देखा जा रहा है।
वैश्विक मुद्रा बाज़ारों का हाल और जापानी येन में उछाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाज़ार में अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी देखा गया है। एशियाई सत्र के दौरान USD/JPY की जोड़ी अगस्त महीने के निचले स्तर का परीक्षण करती दिखी। बैंक ऑफ़ जापान द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों और बाज़ार में केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप की अटकलों के कारण जापानी येन 160.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आने के बाद अचानक तेज़ी से मजबूत हुआ।
दूसरी ओर, AUD/USD की जोड़ी 0.7200 के स्तर से ऊपर टिकी हुई है, जो मई के मध्य के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के कड़े रुख और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई गिरावट ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की है। सभी बाज़ार प्रतिभागी अब अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल यानी NFP डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं जो फेडरल रिज़र्व की भविष्य की नीतिगत दिशा तय करेगा।
सोने में गिरावट और डीज़ल क्रैक स्प्रेड का नया रिकॉर्ड
कमोडिटी बाज़ार में सोने की कीमतों में शुक्रवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को सोना लगभग 2 प्रतिशत उछलकर 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया था, लेकिन अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों में उम्मीद से बेहतर बढ़त के बाद यह तेजी हवा हो गई।
वहीं ऊर्जा बाज़ार में डीज़ल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीज़ल फ्यूचर्स का WTI क्रूड पर प्रीमियम यानी डीज़ल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और इंट्राडे कारोबार के दौरान 102.00 डॉलर प्रति बैरल का नया रिकॉर्ड स्तर छू गया, जो ईंधन बाज़ार में आपूर्ति की तंग स्थिति को बयां करता है।


















