यूरोपीय अर्थव्यवस्था को लेकर वित्तीय विशेषज्ञों की ओर से ताजा आकलन सामने आया है, जिसके तहत यूरोज़ोन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी मुख्य मुद्रास्फीति तय मानकों से ऊपर बनी रहने की संभावना जताई गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई के मोर्चे पर मामूली राहत मिल सकती है, लेकिन इसके बावजूद साल 2026 और 2027 के शुरुआती दौर तक यह निर्धारित सीमा से ऊपर ही बनी रहेगी।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर अनुमान और आंकड़े
विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार जून माह में जारी किए गए आंकड़ों के मुकाबले बुनियादी मुद्रास्फीति के रुझान लगभग वैसे ही बने हुए हैं। इसे ध्यान में रखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि कोर महंगाई का यह चक्र साल 2028 के आखिर तक 2 फीसदी के स्तर से ऊपर ही बना रह सकता है। इस स्थिति को देखते हुए यह तर्क भी दिया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक यानी ईसीबी को ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी करने की जरूरत पड़ सकती है।
विदेशी मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव
दूसरी ओर वैश्विक मुद्रा बाजारों में शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान जापानी येन में मजबूती देखने को मिली, क्योंकि जापानी केंद्रीय बैंक की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें फिर से मजबूत हुई हैं। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर अमेरिकी बॉंड यील्ड में नरमी के चलते पिछले दिनों हुए भारी नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहा है। उधर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी 0.7200 के स्तर से ऊपर मजबूती के साथ टिके हुए है, जबकि बाजार के निवेशक अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल यानी एनएफपी रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के अगले रुख का अंदाजा लगाया जा सके।
सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
बहुमूल्य धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में शुक्रवार को अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दो दिनों से जारी सुधार का सिलसिला थम गया। इससे पहले गुरुवार को सोने की कीमत में करीब 2 फीसदी का उछाल आया था और यह短暂 रूप से 4,500 डॉलर के आंकड़े को पार कर गया था, लेकिन अमेरिकी रोजगार के मजबूत आंकड़ों के सामने आने के बाद इस बढ़त का एक बड़ा हिस्सा धुल गया।
ईंधन बाजारों में डीजल का रुख
दूसरी तरफ वैश्विक ऊर्जा और ईंधन बाजारों का परिदृश्य कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है। हालांकि कच्चे तेल का बाजार कुछ शांत नजर आ सकता है, लेकिन डीजल के दाम एक अलग ही संकेत दे रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई के बीच का प्रीमियम, हाल ही में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया और यह बढ़कर 102.00 डॉलर के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।



















