वैश्विक बाजार में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव गहराता जा रहा है, क्योंकि अमेरिका ईरान के खिलाफ बेहद कड़े प्रतिबंध लागू करने की तैयारी में जुटा है। इन नए कदमों का असर खाड़ी देशों से होने वाले कच्चे तेल के निर्यात पर सीधा पड़ सकता है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले हफ्ते कीमतों में आई जोरदार तेजी के बाद मुनाफावसूली का दौर चला, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल फिसलकर लगभग 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
कड़े प्रतिबंधों और ईरान की चेतावनी से बढ़ी चिंता
डॅंस्क रिसर्च टीम के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा ईरान और उसके व्यापारिक साझेदारों को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंधों की घोषणा की जा रही है। इस सिलसिले में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। बेसेंट ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि ये इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध होंगे। इसे एक अभूतपूर्व आर्थिक अलगाव अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसका मकसद ईरान और उसके साझीदारों को कड़े नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करना है। अमेरिकी प्रशासन के इन उपायों को आर्थिक डी-डे करार दिया जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो फारस की खाड़ी से तेल की एक भी बूंद बाहर नहीं जाएगी।
वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
मौजूदा समय में इक्विटी और कमोडिटी बाजारों की दिशा तय करने वाले चार प्रमुख तत्व सक्रिय हैं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तेल का संकट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बुनियादी ढांचे के विस्तार की स्थिरता, डॉलर के कमजोर होने का नया डर, और सबसे अहम रूप से बेहद मजबूत मैक्रो आंकड़े शामिल हैं। हालांकि पिछले कुछ हफ्तों में सीधे सैन्य हमलों में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सार्थक वार्ताओं के अभाव के कारण निकट भविष्य में किसी भी समझौते की उम्मीदें बेहद कम नजर आ रही हैं।
विदेशी मुद्रा और सर्राफा बाजार पर असर
सोमवार को नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में जीबीपी/यूएसडी जोड़ी 1.3650 के आसपास नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रही है। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर ने एक बार फिर मजबूती हासिल कर ली है, जिससे जोखिम के प्रति संवेदनशील ब्रिटिश पाउंड पिछड़ गया है। इसी तरह, यूरोपीय सत्र के दौरान सोमवार को EUR/USD जोड़ी 1.1700 के स्तर से नीचे रक्षात्मक रुख अपनाए हुए है। अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक प्लान के चलते पिछले हफ्ते बिकवाली का सामना करने के बाद डॉलर में आ रही सुस्त रिकवरी ने इस करेंसी जोड़े को दबाव में डाल दिया है।
उधर, यूरोपीय सत्र में सोना करीब 4,650 डॉलर के स्तर पर बना हुआ है, जो पिछले तीन महीनों में इसके सबसे ऊंचे स्तर के करीब है। अमेरिकी ट्रेजरी की बायबैक योजना के बाद डॉलर में लगातार बनी कमजोरी और अमेरिका-कनाडा के बीच उभरे नए व्यापारिक तनावों का फायदा इस कीमती धातु को मिल रहा है। हालांकि, व्यापारी वर्ग ईरान प्रतिबंधों से जुड़े तमाम विवरणों का इंतजार कर रहा है ताकि बाजार को अगली बड़ी दिशा मिल सके।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा बायबैक कदम
अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा वित्तीय कदम उठाया है। बुधवार को जारी घोषणा के मुताबिक, विभाग ने 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय क्षेत्रों में तरलता समर्थन बायबैक संचालन के आकार को कम से कम दोगुना करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी हो गई है और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन तमाम भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के बीच वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव का दौर बने रहने की पूरी संभावना है।



















