असम सरकार ने राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी उपज का सही मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार ने हर साल 10 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसल के लिए एक भरोसेमंद बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ देना है।
पहले 100 दिनों में दो लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान की खरीद
सरकार की इस नई योजना के शुरुआती परिणाम भी सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जानकारी दी कि सरकार ने अपने कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों के भीतर ही सीधे किसानों से दो लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद कर ली है। इसे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह शुरुआती सफलता बड़े सालाना लक्ष्य को हासिल करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
खुले बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा
धान की इस सीधी खरीद प्रक्रिया से किसानों को खुले बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। पारंपरिक रूप से किसानों को अक्सर फसल कटाई के तुरंत बाद कम कीमतों पर अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सरकारी खरीद तंत्र के विस्तार से किसानों को बिचौलियों से राहत मिलेगी और उनकी मेहनत का पूरा फल एक तयशुदा और आकर्षक न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में मिलेगा।
राज्यभर में खरीद तंत्र का विस्तार
सरकार की योजना इस खरीद तंत्र को असम के कोने-कोने तक फैलाने की है, ताकि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले अधिक से अधिक अन्नदाता इस सरकारी व्यवस्था का सीधा लाभ उठा सकें। प्रशासन का पूरा जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि हर पात्र किसान तक सुलभ बाजार पहुंचे। इस बारे में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इस बात पर जोर दिया कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।
कृषि अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती
यह 10 लाख मीट्रिक टन का सालाना लक्ष्य आने वाले समय में असम में सरकारी स्तर पर होने वाली धान खरीद के दायरे को कई गुना बढ़ा देगा। इससे न केवल किसानों के लिए मूल्य सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि राज्य के कृषि क्षेत्र में स्थिरता भी आएगी। यह पूरी पहल किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए तैयार की गई व्यापक रणनीति का एक अहम हिस्सा है।



















