सोने के बाजार में एक बार फिर से जोरदार हलचल देखने को मिल रही है। ट्रेडर्स लगातार सोने में अपनी होल्डिंग्स बढ़ा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी, फेडरल रिजर्व की साख को लेकर उठ रहे सवाल और अमेरिकी राजकोषीय स्थिति को लेकर निवेशकों की चिंताएं हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन तमाम आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों के चलते सोने की चमक लगातार बढ़ती जा रही है और निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में इस बहुमूल्य धातु का रुख कर रहे हैं।
राजकोषीय चिंताएं और डॉलर का कमजोर होना
अमेरिका की राजकोषीय स्थिति को लेकर बाजार में आशंकाएं एक बार फिर गहरा गई हैं। इन चिंताओं ने डॉलर डिबेसमैन के उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जिससे बुलियन मार्केट को जबरदस्त ऊर्जा मिल रही है। हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि मौजूदा समय में पांच हजार तीन सौ पचास डॉलर प्रति औंस के टारगेट की बात करना अभी थोड़ा जल्दबाजी होगी। इसके बावजूद, सोने के प्रति निवेशकों का आकर्षण लगातार मजबूत बना हुआ है और बाजार में खरीदारी का रुख साफ तौर पर देखा जा सकता है।
यूरोपीय सत्र में सोने का प्रदर्शन
सोमवार को यूरोपीय सत्र के दौरान सोना अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब, यानी लगभग चार हजार छह सौ पचास डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। इस कीमती धातु को लगातार कमजोर हो रहे अमेरिकी डॉलर से बड़ा समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी के बायबैक प्लान और अमेरिका तथा कनाडा के बीच पैदा हुए नए व्यापारिक तनावों ने भी सोने की कीमतों को ऊपर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। बाजार के प्रतिभागी अब ईरान पर संभावित आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़ी तमाम बारीकियों के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें आगे की दिशा तय करने के लिए नया संकेत मिल सके।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा कदम और बॉन्ड बायबैक
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी ट्रेजरी के हालिया फैसले पर भी निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है। ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को दोपहर बारह बजकर बत्तीस मिनट पर विभाग ने यह घोषणा की कि वह दस साल से बीस साल और बीस साल से तीस साल के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशंस के आकार को कम से कम दोगुना करने जा रहा है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा दो अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम चार अरब डॉलर कर दी गई है। यह व्यवस्था नौ सितंबर से प्रभावी होकर चार नवंबर तक चलेगी। इस कदम ने बॉन्ड मार्केट और करेंसी मार्केट दोनों में हलचल पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों पर पड़ रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य मुद्राओं का हाल
सोमवार को सप्ताह की शुरुआत में विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राएं भी दबाव का सामना कर रही हैं। GBP/USD की जोड़ी नए सप्ताह के पहले दिन लगभग एक दशमलव तीन छह सौ के मध्य स्तरों पर नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार कर रही थी। अमेरिकी डॉलर ने अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल कर ली है, जिसकी वजह ईरान पर संभावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर फैली अनिश्चितता है। इस स्थिति ने जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर रहने वाले ब्रिटिश पाउंड को पीछे धकेल दिया है। इसी तरह, EUR/USD की जोड़ी भी सोमवार के यूरोपीय कारोबार के दौरान एक दशमलव सात सौ के नीचे रक्षात्मक रुख के साथ ट्रेड करती नजर आई। अमेरिकी ट्रेजरी के पिछले सप्ताह के बॉन्ड बायबैक प्लान के बाद डॉलर में आई मामूली रिकवरी से इस जोड़ी को संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि ईरान पर प्रतिबंधों के विवरण का इंतजार बाजार को बेचैन किए हुए है।



















