अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतों में शुक्रवार को भारी मुनाफावसूली देखने को मिली। 21 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद कारोबारियों द्वारा सौदे भुनाने से कच्चे तेल की कीमतें करीब 4 प्रतिशत टूटकर $96.50 से $99.69 प्रति बैरल के दायरे में आ गईं। इंट्राडे कारोबार में आई इस गिरावट के बावजूद WTI क्रूड लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त दर्ज करने की ओर अग्रसर है। मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे कमोडिटी बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम का असर बना हुआ है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधाएं और ओमान में कूटनीतिक हलचल
मध्य पूर्व के संघर्ष क्षेत्र से गुजरने वाले सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहाजरानी के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को इस संकरे समुद्री रास्ते से केवल 7 जहाजों ने पारगमन किया, जबकि बुधवार को यह संख्या 11 थी। यह आंकड़ा हाल के 10 दिनों के औसत 15 जहाजों के पारगमन से काफी कम है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर गहराते दबाव को दर्शाता है।
इसी बीच, कूटनीतिक स्तर पर स्थिति को संभालने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। ओमान में ईरान और खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों के बीच एक अहम बैठक की तैयारियां की जा रही हैं। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए एक अस्थायी व्यवस्था तैयार करना है। इस वार्ता की खबरों से बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका थोड़ी कम हुई है, जिससे तेजी के बाद निवेशकों को मुनाफावसूली करने का मौका मिला।
WTI क्रूड का तकनीकी विश्लेषण: सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
दैनिक मूल्य चार्ट पर WTI क्रूड अभी भी एक मजबूत तेजी के रुख को बनाए हुए है। तेल की कीमतें 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से काफी ऊपर कारोबार कर रही हैं। ये तीनों मूविंग एवरेज नीचे की ओर एक मजबूत आधार का निर्माण कर रहे हैं, जो बाजार में दीर्घकालिक तेजी के रुझान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। वर्तमान में 50-दिवसीय SMA $82 से $83.22 के आसपास है, जबकि 100-दिवसीय SMA $85 पर और 200-दिवसीय SMA $78 से $79.58 के स्तर पर बना हुआ है।
तकनीकी संकेतकों में खरीदारी का रुझान बरकरार है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) ओवरबॉट क्षेत्र से थोड़ा नीचे आकर 66 से 71 के स्तर के करीब स्थिर हुआ है, जो दिखाता है कि खरीदारी की गति बनी हुई है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) धनात्मक बना हुआ है और इसका सिग्नल लाइन से ऊपर होना तेजी का संकेत देता है। इसके अलावा, एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) लगभग 25 से 26 पर बना हुआ है, जो बाजार में एक मध्यम-मजबूत ट्रेंड की उपस्थिति को दिखाता है।
ऊपरी स्तरों पर, WTI क्रूड के लिए पहला मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस $100.00 प्रति बैरल का स्तर है। इसके बाद $105.00 का स्तर एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। यदि कीमतें इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट देती हैं, तो मार्च में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के दौरान कायम हुए $113.28 के उच्च स्तर तक जाने का रास्ता साफ हो सकता है। दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में तेल को $90.00 से $92.00 के क्षेत्र में तत्काल सपोर्ट प्राप्त है। इसके नीचे $85 पर स्थित 100-दिवसीय SMA, $82 पर 50-दिवसीय SMA और $78 पर 200-दिवसीय SMA महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन का काम करेंगे।
WTI क्रूड क्या है और वैश्विक बाजार में इसका महत्व क्यों है?
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाने वाला एक विशिष्ट प्रकार का कच्चा तेल है। यह वैश्विक तेल बाजार के तीन प्रमुख बेंचमार्क में से एक है, जिसमें ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड अन्य दो शामिल हैं। WTI को इसकी कम विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण के कारण 'लाइट' और कम सल्फर सामग्री के कारण 'स्वीट' कहा जाता है। कम सल्फर और हल्के घनत्व के कारण इसे रिफाइन करके पेट्रोल और डीजल जैसे उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन में बदलना बेहद आसान और किफायती होता है।
WTI क्रूड का निष्कर्षण मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है। इसका वितरण और मूल्य निर्धारण ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है। कुशिंग को दुनिया का 'पाइपलाइन चौराहा' माना जाता है, क्योंकि यहाँ देश भर की प्रमुख पाइपलाइनें और भंडारण टर्मिनल आपस में जुड़ते हैं। वैश्विक मीडिया और वित्तीय बाजारों में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दरों को दर्शाने के लिए WTI की कीमतों को व्यापक रूप से उद्धृत किया जाता है।
कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
किसी भी वित्तीय परिसंपत्ति की तरह, WTI क्रूड की कीमतें मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर सीधे तौर पर ऊर्जा की मांग को प्रभावित करती है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो औद्योगिक गतिविधियों और परिवहन में तेजी आने से तेल की खपत बढ़ती है, जिससे दरें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत, आर्थिक मंदी या सुस्ती मांग को घटा देती है।
आपूर्ति पक्ष पर, राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, और प्रमुख उत्पादक देशों पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंध सीधे बाधा डालते हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर का क्रूड की कीमतों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। चुकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग और कीमतें दोनों बढ़ती हैं।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट: API और EIA आंकड़ों का गणित
तेल बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को समझने के लिए अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (API) और ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। ये रिपोर्ट अमेरिका में कच्चे तेल के वाणिज्यिक स्टॉक में हुए बदलावों को दर्शाती हैं। यदि इन्वेंट्री आंकड़ों में गिरावट आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है और कीमतों को समर्थन देता है। इसके विपरीत, स्टॉक में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति को दर्शाती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
API अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी EIA अगले दिन बुधवार को अपनी आधिकारिक रिपोर्ट पेश करती है। इन दोनों रिपोर्टों के परिणाम 75 प्रतिशत मामलों में एक-दूसरे के 1 प्रतिशत के दायरे में होते हैं। हालांकि, सरकारी एजेंसी द्वारा जारी किए जाने के कारण वित्तीय बाजारों में EIA के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक माना जाता है।
ओपेक और ओपेक प्लस का उत्पादन कोटा पर नियंत्रण
ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो हर साल दो बार बैठक करके सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक बाजार में आपूर्ति को सीमित करने के लिए उत्पादन कटौती का फैसला करता है, तो अंतरराष्ट्रीय दरों में तेजी आती है। इसके विपरीत, उत्पादन बढ़ाने के फैसले से कीमतें नीचे गिरती हैं।
ओपेक प्लस इस समूह का एक विस्तारित रूप है, जिसमें रूस सहित 10 गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश शामिल हैं। ओपेक प्लस का गठन वैश्विक तेल आपूर्ति पर अधिक प्रभाव स्थापित करने और बाजार को संतुलित करने के लिए किया गया है। यह समूह सामूहिक रूप से दुनिया के विशाल क्रूड उत्पादन को नियंत्रित करता है और इसकी नीतियां अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की दिशा निर्धारित करती हैं।



















