यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था ने जुलाई महीने में उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए मजबूत आर्थिक सुधार का संकेत दिया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में जुलाई के दौरान मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा जून में दर्ज की गई 0.3 प्रतिशत की वृद्धि के बाद सामने आया है और इससे यह स्पष्ट होता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां लगातार रफ्तार पकड़ रही हैं।
बाजार के अनुमान ध्वस्त और उत्पादन क्षेत्र में मजबूत उछाल
अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों ने जुलाई महीने के लिए ब्रिटेन की जीडीपी में 0.0 प्रतिशत की वृद्धि यानी पूरी तरह से स्थिरता का अनुमान जताया था। हालांकि, वास्तविक आंकड़े इन उम्मीदों से कहीं अधिक बेहतर रहे। जीडीपी आंकड़ों के अलावा देश के औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों से भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। जुलाई महीने में औद्योगिक उत्पादन में मासिक आधार पर 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि विनिर्माण उत्पादन में इसी अवधि के दौरान 0.9 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि ब्रिटेन का औद्योगिक क्षेत्र उच्च ब्याज दरों के दबाव के बावजूद मजबूत स्थिति में बना हुआ है।
विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड को मिला समर्थन
उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों की घोषणा के तुरंत बाद विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड की मांग बढ़ गई। आंकड़ों के सार्वजनिक होते ही मुद्रा बाजार में पाउंड स्टर्लिंग को खरीदारों का अच्छा समर्थन मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई और यह 1.3515 के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन की आर्थिक मजबूती विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है, जिससे पाउंड को मजबूती मिल रही है।
दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा स्टर्लिंग का वैश्विक ढांचा
ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा मानी जाती है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से चला आ रहा है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक मुद्रा बाजार में इसका चौथा सबसे बड़ा स्थान है। वर्ष 2022 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के विदेशी मुद्रा कारोबार में स्टर्लिंग की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है, जिसका औसतन दैनिक कारोबार 630 अरब डॉलर का होता है। बाजार में पाउंड के प्रमुख ट्रेडिंग जोड़ों में जीबीपी/यूएसडी शामिल है, जिसे ट्रेडर्स 'केबल' के नाम से भी जानते हैं और यह कुल विदेशी मुद्रा बाजार के 11 प्रतिशत हिस्से को संभालता है। इसके अलावा जीबीपी/जेपीवाई यानी 'ड्रैगन' की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत और यूरो/जीबीपी की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत है। पाउंड स्टर्लिंग के जारी करने और इसके नियमन का जिम्मा सेंट्रल बैंक यानी बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और मुद्रा का मूल्य
ब्रिटिश पाउंड के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के फैसलों का मुख्य लक्ष्य देश में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2 प्रतिशत के आसपास सीमित रखने की कोशिश की जाती है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से ब्याज दरों में संशोधन के उपकरण का इस्तेमाल करता है। जब ब्रिटेन में महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। इससे आम लोगों और व्यावसायिक संस्थानों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग नियंत्रित होती है। ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को यूनाइटेड किंगडम में अपनी पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जो पाउंड के लिए सकारात्मक साबित होता है। दूसरी ओर, जब मुद्रास्फीति बहुत कम हो जाती है, तो यह आर्थिक सुस्ती का संकेत होता है। ऐसे समय में बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि कर्ज सस्ता हो और व्यापारिक गतिविधियां तेज हों।
आर्थिक संकेतकों और व्यापार संतुलन का असर
जीडीपी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों के साथ-साथ रोजगार के आंकड़े ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की वास्तविक सेहत को दर्शाते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था पाउंड स्टर्लिंग को सीधे तौर पर समर्थन देती है क्योंकि यह विदेशी निवेश को आकर्षित करती है और बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरें ऊंची रखने की गुंजाइश देती है। वहीं दूसरी ओर, यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं तो पाउंड के मूल्य में गिरावट की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा, व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस भी पाउंड के लिए एक अहम संकेतक है। यह आयात और निर्यात के बीच के अंतर को मापता है। यदि कोई देश ऐसी वस्तुओं का निर्यात करता है जिनकी वैश्विक बाजार में बहुत मांग है, तो इससे उस देश की मुद्रा की मांग में भारी बढ़ोतरी होती है। इसलिए एक सकारात्मक व्यापार संतुलन पाउंड को मजबूत करता है, जबकि नकारात्मक संतुलन इसे कमजोर करता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार का माहौल और अन्य प्रमुख जोड़ें
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भी हलचल देखने को मिली। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का जोड़ा यानी एयूडी/यूएसडी 0.7100 के मध्य स्तर के पास स्थिर बना रहा। इससे पहले अमेरिका के अगस्त पीपीआई आंकड़ों के जारी होने के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को बल मिला था, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ था और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर की गिरावट आई थी। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी सख्त रुख की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गिरावट को थामने का काम किया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन का जोड़ा यानी यूएसडी/जेपीवाई 154.00 के स्तर के पास नीचे की ओर कारोबार करता नजर आया। जापान के गर्म पीपीआई आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना बढ़ा दी, जिससे येन को समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति आंकड़ों के इंतजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण यह गिरावट सीमित रही।



















