कीमती धातुओं के बाजार में बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिल रहा है, जहां चांदी (XAG/USD) के भाव में एक बड़ा तकनीकी ब्रेकडाउन दर्ज किया गया। अमेरिका के उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े उम्मीद से अधिक गर्म रहने, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल आने और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से चांदी की कीमतों में हालिया कारोबारी सत्रों के दौरान $3.60 से अधिक की तेज गिरावट आई। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, चांदी का भाव 5.57% की दैनिक गिरावट के साथ $64.16 के आसपास कारोबार कर रहा है। इस दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम इसके 20-दिवसीय औसत से लगभग 14 गुना अधिक दर्ज किया गया। चार्ट पर बने हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न के टूटने के बाद अब बाजार के तकनीकी विश्लेषक $60.00 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
तकनीकी विश्लेषण: हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न का ब्रेकडाउन और प्रमुख सपोर्ट स्तर
तकनीकी नजरिये से देखें तो चांदी के चार्ट पर बना हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न का टूटना एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि इस स्तर के नीचे इंट्राडे ट्रेडिंग में भाव फिसले हैं, लेकिन पैटर्न के मंदी के संकेतों की पुष्टि के लिए दैनिक क्लोजिंग का इस नेकलाइन के नीचे होना आवश्यक माना जा रहा है। यदि बिकवाली का यह दबाव बना रहता है और क्लोजिंग निचले स्तरों पर मिलती है, तो अगला प्राथमिक सपोर्ट $60.00 का मनोवैज्ञानिक स्तर होगा। $60.00 के नीचे फिसलन होने पर हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न का अनुमानित लक्ष्य $55.00 का स्तर बनता दिख रहा है।
लाइव तकनीकी संकेतक भी मंदी के इस रुख को दर्शा रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) फिलहाल 47 के स्तर पर है, जो तटस्थ से कमजोर होते मोमेंटम का संकेत देता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) में बियरिश क्रॉसओवर देखा गया है, जहां मुख्य लाइन 0.78 पर है जो सिग्नल लाइन 1.17 से नीचे है और हिस्टोग्राम -0.39 पर बना हुआ है। इसके अलावा, मूविंग एवरेज लंबी अवधि में मंदी का रुझान दिखा रहे हैं, जहां 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज ($65.07) 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज ($66.04) से नीचे आकर डेथ क्रॉस की स्थिति बना रहा है। चांदी की कीमतें वर्तमान में बोलिंगर बैंड्स ($63.19 से $69.99) के निचले दायरे के करीब हैं, जिसमें लाइव सपोर्ट $62.61 (S1) और दूसरा सपोर्ट $61.06 (S2) पर है।
दूसरी तरफ, यदि कीमतों में सुधार की कोई कोशिश होती है, तो ऊपरी स्तरों पर कड़ा प्रतिरोध देखने को मिलेगा। पहला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस $67.15 (R1) से $70.00 के दायरे में है। यदि खरीदारी का रुझान मजबूत होता है तो कीमतें 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) $72.14 से $73.00 तक जा सकती हैं, जिसके पार जाने पर ही खरीदार $75.00 के स्तर को दोबारा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। ट्रेडर्स फिलहाल $65.60 के पिवट पॉइंट पर नजर रखे हुए हैं ताकि अल्पकालिक स्थिरता का आकलन किया जा सके।
मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव: अमेरिकी PPI आंकड़े और ब्याज दरों का रुझान
कमोडिटी बाजार में आई इस हालिया गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़े हैं। अमेरिका में उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा बढ़कर आए हैं, जिससे यह संकेत मिला है कि कारखानों के स्तर पर महंगाई अभी भी ऊंची बनी हुई है। इस आंकड़े के आते ही बॉन्ड बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल तेज हो गई और यह आशंका बढ़ गई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रख सकता है या अपनी सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकता है।
बिना ब्याज या यील्ड वाली संपत्ति होने के कारण, चांदी पर ब्याज दरों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ता है। जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए गैर-ब्याज वाली धातुओं को अपने पास रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे पूंजी यील्ड देने वाले साधनों की ओर जाने लगती है। इसके साथ ही, डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती ने भी चांदी पर दबाव बनाया है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का सौदा अमेरिकी डॉलर (XAG/USD) में होता है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए यह धातु महंगी हो जाती है, जिससे मांग में कमी आती है।
मुद्रा बाजार और अन्य धातुओं का हाल
चांदी में आई यह गिरावट अकेले नहीं हुई है, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार और सोने की कीमतों पर भी इसका असर पड़ा है। सोने की कीमतों में भी उथल-पुथल देखने को मिली और यह फिसलकर $4,350 प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में आ गया। अमेरिकी डॉलर में आए उछाल और बॉन्ड यील्ड में बढ़त के कारण सोने पर भी दबाव देखा गया, जबकि निवेशक आगे आने वाले अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) पर बिकवाली का नया दबाव देखा गया और यह गिरकर 0.7150 के निचले स्तरों के पास आ गया, जहां इसे फिलहाल थोड़ा समर्थन मिला है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट का सीधा संबंध अमेरिकी डॉलर में आई तेजी से है। दूसरी ओर, जापानी येन में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही और USD/JPY 153.50 के ऊपर स्थिर रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं से येन को सहारा मिल रहा है, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने की अटकलों ने डॉलर को भी निचला सहारा प्रदान किया है।
चांदी की मूलभूत मांग: औद्योगिक उपयोग, सुरक्षित निवेश और गोल्ड-सिल्वर रेशियो
चांदी के बाजार का सही विश्लेषण करने के लिए इसके दोहरे चरित्र को समझना जरूरी है। चांदी न केवल सोने की तरह एक सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) और महंगाई से बचाव का जरिया है, बल्कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चा माल भी है। सभी धातुओं में सबसे अधिक बिजली चालकता (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) होने के कारण यह तांबे और सोने से भी आगे है। यही वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र में चांदी की भारी मांग रहती है।
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में औद्योगिक गतिविधियों की चाल चांदी के दीर्घकालिक भाव तय करती है। अमेरिका और चीन जैसे बड़े औद्योगिक देशों में विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में चांदी का व्यापक इस्तेमाल होता है। वहीं, भारत में आभूषणों, कलाकृतियों और भौतिक चांदी की उपभोक्ता मांग वैश्विक कीमतों को मजबूत आधार प्रदान करती है।
इसके अलावा, निवेशक सोने और चांदी के मूल्य अनुपात (Gold/Silver ratio) पर भी लगातार नजर रखते हैं। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। जब यह अनुपात बहुत ऊंचा हो जाता है, तो निवेशक इसे संकेत मानते हैं कि सोने की तुलना में चांदी का मूल्यांकन कम (अंडरवैल्यूड) है, जबकि अनुपात नीचा होने पर चांदी के महंगा होने का अनुमान लगाया जाता है। ऐतिहासिक रूप से चांदी सोने के रुझान का ही अनुसरण करती है, लेकिन अपनी औद्योगिक मांग और बाजार के छोटे आकार के कारण इसमें उतार-चढ़ाव सोने से अधिक देखने को मिलता है।


















