फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक शुरू होने से ठीक पहले वैश्विक मुद्रा बाजार में महत्वपूर्ण हलचल देखी जा रही है। सप्ताह की शुरुआत में दर्ज की गई गिरावट से तेजी से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर एक बार फिर अपने साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। बाजार में निवेशकों को आशंका है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख बरकरार रख सकता है। इस संभावित सख्त रुख के कारण निवेशकों का ध्यान फिर से अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित हुआ है, जिससे प्रमुख विदेशी मुद्राओं, कीमती धातुओं और डिजिटल परिसंपत्तियों पर बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है।
फेडरल रिजर्व का संभावित सख्त रुख और ट्रेजरी प्रतिफल
केंद्रीय बैंकों के फैसलों से पहले वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल है। इस सप्ताह केवल अमेरिकी फेडरल रिजर्व ही नहीं, बल्कि बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नीतियां भी आने वाली हैं। मध्य पूर्व में सैन्य तनाव में आई थोड़ी कमी ने ऊर्जा कीमतों और ब्याज दर बढ़ोतरी की व्यापक उम्मीदों को फिलहाल कुछ हद तक थामने में मदद की है। इसके बावजूद, अमेरिकी बांड बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। 2 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पिछले सप्ताह के उच्चतम स्तर से लगभग 7 बेसिस पॉइंट नीचे आई है। हालांकि, व्यापारी इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक से नीतिगत रुख अधिक सख्त आ सकता है, जो निकट अवधि में डॉलर को लगातार मजबूती दे रहा है।
यूरो और ब्रिटिश पाउंड में गिरावट और दबाव
डॉलर की मजबूत मांग के कारण यूरोप की प्रमुख मुद्राओं में गिरावट दर्ज की जा रही है। मंगलवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD जोड़ी 1.3300 के स्तर के आसपास रक्षात्मक रुख बनाए हुए है। दो दिवसीय फेड नीति बैठक के नतीजों से पहले व्यापारी बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे ब्रिटिश पाउंड में कोई मजबूत सुधार नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर, EUR/USD जोड़ी भी अपने एक महीने के निचले स्तर के पास समेकित हो रही है और यूरोपीय सुबह में 1.1300 के मध्य स्तर के आसपास कारोबार कर रही है। यूरो पर अमेरिकी डॉलर की निरंतर मांग का सीधा असर पड़ रहा है और जब तक फेड की बैठक का स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आता, तब तक इसमें तेजी की संभावना सीमित नजर आ रही है।
सोने की चमक पड़ी फीकी, 4,050 डॉलर के नीचे आया भाव
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर भी डॉलर की मजबूती का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एशियाई सत्र से ही सोने की कीमतों में गिरावट का रुझान देखा गया और मंगलवार को यह 0.85 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ 4,050 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गया। इससे पिछले कारोबारी दिन सोना 4,100 डॉलर का स्तर पार करने में विफल रहा था। विश्लेषकों का मानना है कि 4,100 डॉलर से ऊपर टिकने में असमर्थता यह दर्शाती है कि सोने के लिए निकट भविष्य में गिरावट का रास्ता ही सबसे आसान बना हुआ है, विशेषकर तब जब डॉलर को मजबूत समर्थन मिल रहा हो।
क्रिप्टो बाजार पर बिकवाली का हावी होना: रिपल और स्टेलर में गिरावट
डॉलर की मजबूती और जोखिम लेने की घटती क्षमता का असर क्रिप्टो संपत्ति बाजार पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पिछले सत्र में 4 प्रतिशत से अधिक टूटने के बाद रिपल (XRP) मंगलवार को भी दबाव में रहा। वहीं स्टेलर (XLM) भी पिछले सत्र में 5 प्रतिशत से ज्यादा फिसलने के बाद बिकवाली के दायरे में बना हुआ है। डेरिवेटिव डेटा और कमजोर होते मोमेंटम संकेतक दर्शाते हैं कि बिकवाल पूरी तरह नियंत्रण में हैं। इससे दोनों ऑल्टकॉइन्स के लिए आगे भी और गिरावट का जोखिम बना हुआ है, क्योंकि वायदा और डेरिवेटिव बाजार में मंदी का रुख हावी है।



















