कगिसो रबाडा के नाम दर्ज हुआ अनचाहा रिकॉर्ड, टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने वाले अफ्रीकी बल्लेबाज बनेअगले 218 दिनों तक वृषभ, मकर और तुला समेत तीन राशियों पर रहेगी शनि की विशेष कृपा, मिलेगी सफलताबेयरडायनामिक एमएमएक्स 330 प्रो रिव्यू (2026): गेमर्स के लिए ओपन-बैक वायर्ड हेडफोन्स की पूरी परखलाइव: आंध्र प्रदेश के तट से टकरा रहा चक्रवात अर्णब, कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारीमंत्रालय की हरी झंडी के बाद सेंसर बोर्ड की स्क्रीनिंग का इंतजार कर रही सलमान खान की मातृभूमिउत्तर कोरिया को पाले में करने की होड़ में चीन और रूस, ट्रंप की बढ़ सकती हैं मुश्किलेंबैंक ऑफ अमेरिका की चेतावनी, एआई एजेंट को न दें अपने बैंकिंग पासवर्डलालजी पांडेय से अंजान बनने तक का सफर, जिन्होंने अमिताभ बच्चन को दिए थे 1500 से ज्यादा सुपरहिट गानेवृश्चिक राशिफल 28 अक्टूबर: संवाद में व्यंग्य से बचें और साझे काम में जिम्मेदारियां स्पष्ट रखेंसिंह राशिफल 28 अक्टूबर: उच्च के गुरु और अष्टम शनि के बीच खर्च पर नियंत्रण और काम में स्पष्टता रखें
रिजर्व बैंक से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत, वैश्विक बाजारों में डॉलर की नरमी से सोना और क्रिप्टो उछलेबाज़ार
2 अक्तू॰ 2026, 8:02 pm (26 दिन पहले)· 3

रिजर्व बैंक से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत, वैश्विक बाजारों में डॉलर की नरमी से सोना और क्रिप्टो उछले

एमयूएफजी ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा आगे चलकर ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई है, जबकि अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट के बीच सोना और क्रिप्टोकरेंसी में बढ़त दर्ज की गई।

भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल प्रमुख नीतिगत दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन आने वाले महीनों में सख्त मौद्रिक रुख का संकेत दिया जा सकता है। एमयूएफजी का आधिकारिक अनुमान है कि रिजर्व बैंक अभी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। इसके साथ ही यह भी रेखांकित किया गया है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर से दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू कर सकता है, जिससे आने वाले समय में नीतिगत दरों का ऊपर जाना तय माना जा रहा है। संस्था का आकलन है कि रिजर्व बैंक अपने मौजूदा न्यूट्रल रुख को बदलते हुए सख्त नीतिगत दिशा यानी टाइटनिंग बायस का स्पष्ट संकेत दे सकता है।

विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की चाल और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति

वैश्विक मुद्रा बाजार में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर अपने 17 महीने के उच्च स्तर से पीछे हटता नजर आया। बेहद महत्वपूर्ण अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट जारी होने से पहले व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के कारण डॉलर में यह सुस्ती देखी गई। इस गिरावट के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने वापसी की और एयूडी/यूएसडी सुधरकर 0.6950 की ओर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और महंगाई के बढ़ते जोखिमों के मद्देनजर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की नई उम्मीदों से भी समर्थन मिला है।

ये भी पढ़ें

दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा को नई दिशा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। टोक्यो सीपीआई के अनुमान से अधिक गर्म रहने और डॉलर में चौतरफा कमजोरी के चलते यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के करीब बना रहा और यह अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर से फिसल गया। करेंसी ट्रेडर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को देखते हुए अपनी रणनीतियों को नए सिरे से संतुलित कर रहे हैं।

यूरो में तेज गिरावट और कमोडिटी बाजार में सोने की चमक

यूरोपीय मुद्रा के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। ईयूआर/यूएसडी फिसलकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक गिर गई थी और अब भी जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। यूरो में आई इस भारी कमजोरी के पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और यूरोप के ऊर्जा कीमतों में संभावित उछाल को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारक रही हैं।

कमोडिटी बाजार की बात करें तो सप्ताह के अंतिम सत्र में सोने में अच्छी तेजी दर्ज की गई। पीली धातु प्रमुख 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आंकड़े को पार करने में सफल रही। निवेशकों द्वारा नवीनतम एनएफपी आंकड़ों के मूल्यांकन के बीच डॉलर इंडेक्स में गिरावट आने से सोने की कीमतों को मजबूती मिली है।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुधार और व्यापक मैक्रो संकेतक

डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में शुक्रवार को व्यापक रिकवरी देखने को मिली। इस उछाल का नेतृत्व बिटकॉइन ने किया, जो 86,000 डॉलर के पार निकल गया। इसी तरह इथेरियम ने भी अपने मजबूत रुख की पुष्टि करते हुए 2,700 डॉलर का स्तर हासिल कर लिया, हालांकि 2,800 डॉलर का स्तर फिलहाल इसकी तात्कालिक बढ़त पर दबाव बनाए हुए है। इसके अलावा रिपल 1.54 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में आगामी दिनों में ऊर्जा संकट और तेजी से बढ़ती बॉन्ड यील्ड मुख्य प्रेरक की भूमिका में बनी रहेंगी। अक्टूबर महीने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं में कमी आने के बाद अब बाजार भागीदारों की निगाहें फेडरल रिजर्व की बैठकों के मिनट्स पर टिकी हैं। इसके अलावा आने वाले सत्रों में आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और अमेरिकी ट्रेजरी की नीलामियों पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी। अन्य वैश्विक संकेतकों में कनाडाई रोजगार के आंकड़े, जापानी वेतन दरें और ईसीबी के नीतिगत मिनट्स भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

सवाल-जवाब

एमयूएफजी ने भारतीय रिजर्व बैंक की दरों को लेकर क्या अनुमान लगाया है?
एमयूएफजी के अनुसार फिलहाल रिजर्व बैंक दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन दिसंबर से ब्याज दरें बढ़ाने का चक्र शुरू होने की संभावना है।
क्या रिजर्व बैंक अपना मौद्रिक रुख बदलने जा रहा है?
विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक अपने न्यूट्रल रुख को हटाकर सख्त नीतिगत दिशा यानी टाइटनिंग बायस अपना सकता है।
डॉलर में कमजोरी का सोने की कीमत पर क्या असर पड़ा?
डॉलर में गिरावट के चलते सोना बढ़त हासिल करते हुए 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को पार कर गया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में प्रमुख टोकन किस स्तर पर पहुंचे?
बिटकॉइन सुधरकर 86,000 डॉलर के पार निकल गया, जबकि इथेरियम 2,700 डॉलर के ऊपर और रिपल 1.54 डॉलर के आसपास रहा।
यूरो में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
यूरो गिरकर मई 2025 के निचले स्तर 1.1312 पर पहुंचा, जिसका कारण डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट की चिंताएं हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp