अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली बढ़त दर्ज की और यह 1.1208 के स्तर के आसपास पहुंच गया। दोनों देशों के बीच बुनियादी ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने के लिए हुए समझौते की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना, जिससे साझा यूरोपीय मुद्रा को कुछ समय के लिए राहत मिली है। हालांकि, यूरो क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में बढ़ती वित्तीय चिंताओं और बजट घाटे के दबाव के कारण यूरो पर व्यापक रूप से नकारात्मक असर बना रहने की आशंका बनी हुई है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर की शुरुआत नए कारोबारी सप्ताह में काफी सतर्क रुख के साथ हुई है। बाजार भागीदार बुधवार को जारी होने वाले अमेरिका के सितंबर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा के मूल्य को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) सोमवार सुबह 102.20 के आसपास सीमित दायरे में सुस्त कारोबार करता देखा गया।
अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
अमेरिका से आने वाले ताजा मुद्रास्फीति आंकड़ों का अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की भावी मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के फैसलों पर बहुत गहरा असर पड़ने की संभावना है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की सितंबर नीति बैठक के मिनट्स, जो पिछले सप्ताह जारी किए गए थे, स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता मुद्रास्फीति के 2% के तय लक्ष्य से काफी ऊपर बने रहने को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।
फेडरल रिजर्व के पास मूल्य स्थिरता बनाए रखने और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करने का दोहरा अधिदेश है। इस व्यवस्था के अनुसार वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2% के आसपास रहनी चाहिए, लेकिन वैश्विक महामारी के बाद से यह लक्ष्य केंद्रीय बैंक के लिए सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ है। आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं और व्यापारिक अड़चनों के कारण मूल्य दबाव लगातार बढ़े हैं, जिससे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक कई दशकों के उच्च स्तरों पर टिका रहा। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए फेडरल रिजर्व पहले ही कई सख्त उपाय कर चुका है और आने वाले समय में भी आक्रामक नीतिगत रुख बनाए रखने के संकेत दे रहा है।
EUR/USD तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर
हालिया तेज गिरावट के बाद EUR/USD जोड़ी पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। दैनिक चार्ट पर 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 27 के स्तर पर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि बाजार अत्यधिक बिकवाली यानी ओवरसोल्ड क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार 14-अवधि का RSI 23 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली की पुष्टि करता है। हालांकि तकनीकी गति काफी खिंची हुई है, लेकिन जब तक कीमतें दैनिक एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के नीचे टिकी रहती हैं, तब तक विक्रेताओं का दबदबा बना रहेगा।
उछाल की स्थिति में पहली तकनीकी बाधा 20-दिवसीय EMA के पास 1.1330 के स्तर पर मौजूद है। गिरावट के मौजूदा दबाव को कम करने और किसी भी स्थायी सुधारात्मक बढ़त का संकेत देने के लिए इस अवरोध के ऊपर दैनिक कैंडल का बंद होना बेहद आवश्यक होगा। वहीं दूसरी तरफ, यदि यह जोड़ी अपने एक वर्ष के निचले स्तर 1.1161 को बचाने में असमर्थ रहती है, तो नीचे की ओर बिकवाली का एक नया दौर शुरू हो सकता है। लाइव तकनीकी संकेतकों में 20-दिवसीय EMA 1.13, 50-दिवसीय EMA 1.14 और 200-दिवसीय EMA 1.16 पर स्थित हैं, जो दैनिक बोलिंजर बैंड्स (1.11 से 1.16) के दायरे के भीतर दीर्घावधि गिरावट के रुख को दर्शाते हैं।
एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों का रुख
वैश्विक मुद्रा बाजारों में सोमवार को केवल यूरो ही नहीं, बल्कि कई अन्य संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिली। एशियाई सत्र में छुट्टियों के कारण कम नकदी के बीच AUD/USD जोड़ी ने शुरुआती मामूली मंदी के अंतर को भर दिया, लेकिन यह 0.7000 के स्तर से नीचे ही बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई वर्षों के उच्च स्तर से पीछे हटने के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने पलटने का प्रयास किया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तेजी सीमित रही। इसके अतिरिक्त नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दर में संभावित वृद्धि की घटती संभावनाओं ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को दबाकर रखा।
USD/JPY जोड़ी ने नए सप्ताह में भी अपने सीमित दायरे के कारोबार को जारी रखा और 158.00 के स्तर से ऊपर बनी रही। जापानी येन को सहारा देने के लिए सरकारी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप की अटकलों के बीच जापानी मुद्रा के खरीदार सतर्क बने हुए हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी ने डॉलर खरीदारों को रक्षात्मक मुद्रा में रखा, हालांकि जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार में कम लिक्विडिटी के बीच भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने सेफ-हेवन अमेरिकी डॉलर की गिरावट को थामने में मदद की।
सोना, क्रिप्टोकरेंसी और भारतीय रुपया में उठापटक
कमोडिटी और उभरते बाजारों में भी नए सप्ताह की शुरुआत हलचल भरी रही। सोना अपने दो महीने के निचले स्तर 4,067 डॉलर से शुरू हुई रिकवरी को सोमवार को आगे बढ़ाते हुए 4,200 डॉलर के स्तर से ऊपर टिके रहने का प्रयास कर रहा है। 18 महीने के उच्च स्तर से अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट के थमने के बीच सोने की कीमतों में स्थिरता की तलाश जारी है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो (ADA) पिछले सप्ताह के 2.85% के सुधार के बाद सोमवार को अपने महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र से ऊपर वापस आ गया। डेरिवेटिव बाजार में बेहतर होती स्थिति और सकारात्मक तकनीकी परिदृश्य से इसकी रिकवरी को बल मिल रहा है। कॉइनग्लास का लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात सोमवार को 1.01 दर्ज किया गया, जो सकारात्मक दायरे में लौट आया है और ट्रेडर्स के बेहतर होते रुख को दर्शाता है।
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रुपया (INR) सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले खासी मजबूती के साथ खुला। डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उठाए गए नए कदमों से भारतीय मुद्रा को बड़ी राहत मिली, जिसके चलते USD/INR जोड़ी 1% गिरकर 95.80 के स्तर के पास आ गई।






















