अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में हफ्ते की शुरुआत सुस्त रफ्तार के साथ देखने को मिली है, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में कोई खास हलचल दर्ज नहीं की गई। विदेशी मुद्रा बाजार में यह जोड़ी 158.36 के करीब सपाट स्तर पर टिकी रही। पिछले करीब दो हफ्तों से यह विनिमय दर 156.38 से 158.51 के एक बेहद संकरे दायरे में बंधी हुई है। निवेशक इस समय अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के नए आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि माना जा रहा है कि सितंबर महीने में खुदरा मुद्रास्फीति में तेज वृद्धि देखी जा सकती है। यदि महंगाई दर में यह उछाल सच साबित होता है, तो इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त रखने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
बैंक ऑफ जापान की दरों पर विश्लेषकों की राय
टोक्यो के नीतिगत मोर्चे पर नजर डालें तो बाजार के जानकार बैंक ऑफ जापान द्वारा लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना को खारिज कर रहे हैं। राबोबैंक के रणनीतिकारों का आकलन है कि जापानी केंद्रीय बैंक अब एक महत्वपूर्ण बदलाव के पड़ाव पर पहुंच चुका है। विश्लेषकों के अनुसार, बैंक अब आक्रामक सख्ती के बजाय मूल्य दबावों को लक्ष्य के अनुरूप स्थिर रखने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। संस्था से जुड़े जानकारों ने रेखांकित किया कि जापानी नीति निर्माता लगातार दरें बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे येन की तेजी पर एक स्वाभाविक ब्रेक लगा हुआ है।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और ताजा भाव
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो यह विनिमय दर 158.37 के आसपास बनी हुई है। मौजूदा भाव 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी 157.66 से ऊपर बना हुआ है, जिससे अल्पकालिक तेजी का ढांचा अब भी सुरक्षित दिखता है। तकनीकी संकेतक 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 56.28 पर दर्ज किया गया है, जो खरीदारों के हल्के नियंत्रण का संकेत देता है, हालांकि यह स्तर अभी जरूरत से ज्यादा खरीदारी वाले क्षेत्र में नहीं पहुंचा है। नीचे की ओर 157.66 का स्तर प्राथमिक समर्थन के रूप में काम कर रहा है, जिसके नीचे दैनिक समाप्ति मिलने पर गिरावट बढ़ सकती है। इसके विपरीत, ऊपर की तरफ 24 सितंबर को छुआ गया 159.04 का उच्चतम स्तर सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है।
ताजा कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, यह मुद्रा जोड़ी 158.45 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 158.06 के मुकाबले 0.24 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 151.51 से 163.98 के बीच रहा है। दैनिक तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 57 और एमएसीडी 0.22 पर दर्ज है, जबकि 20-दिवसीय ईएमए 157.63, 50-दिवसीय ईएमए 158.02 और 200-दिवसीय ईएमए 157.76 पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय स्तर से ऊपर होने के कारण यह जोड़ी दीर्घकालिक तेजी के रुख में बनी हुई है। तकनीकी पिवट स्तर 158.33 पर है, जिसके लिए पहला प्रतिरोध 158.59 और दूसरा 158.74 पर आंका गया है, जबकि समर्थन स्तर 158.18 और 157.92 पर मौजूद हैं।
मुद्रास्फीति, केंद्रीय बैंक और सोने का समीकरण
मुद्रास्फीति दरअसल उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिनिधि टोकरी की कीमतों में होने वाली औसत बढ़ोतरी को मापती है। मुख्य मुद्रास्फीति को आमतौर पर मासिक और वार्षिक बदलाव के प्रतिशत के रूप में देखा जाता है। इसके विपरीत, कोर मुद्रास्फीति में खाद्य पदार्थों और ईंधनों के अस्थिर दामों को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि ये मौसमी और भू-राजनीतिक कारणों से तेजी से बदलते हैं। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से इसी कोर आंकड़े पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उनका लक्ष्य इसे लगभग 2 प्रतिशत के प्रबंधनीय स्तर पर बनाए रखना होता है। जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2 प्रतिशत से ऊपर निकलने लगता है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करते हैं। अधिक ब्याज दरें वैश्विक पूंजी को आकर्षित करती हैं, जिससे संबंधित देश की मुद्रा को मजबूती मिलती है, जबकि इसके विपरीत स्थिति में मुद्रा कमजोर होती है।
पहले निवेशक उच्च महंगाई के दौर में मूल्य संचयन के लिए सोने की ओर रुख करते थे। हालांकि अत्यधिक उथल-पुथल के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन सामान्य दिनों में यह संबंध बदल जाता है। ऊंची महंगाई को थामने के लिए जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो ब्याज देने वाली संपत्तियों या बैंक जमाओं की तुलना में गैर-ब्याज वाली धातु यानी सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, कम मुद्रास्फीति के कारण दरों में कटौती की संभावना बनती है, जिससे सोना निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बन जाता है।
ग्लोबल फॉरेक्स, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल का रुख
वैश्विक मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी सोमवार को नुकसान की भरपाई करने के बावजूद छुट्टियों के पतले कारोबार के बीच 0.7000 के नीचे बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बहु-वर्षीय उच्चतम स्तरों से गिरावट के बावजूद डॉलर ने वापसी की कोशिश की, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में दरें बढ़ाने की घटती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सीमित रखा। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की अटकलों के बीच तेजी थम गई है, हालांकि जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण सीमित तरलता के बीच भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं डॉलर की गिरावट को थामे हुए हैं।
कमोडिटी बाजार में सोने में बिकवाली देखने को मिली और यह यूरोपीय सत्र में 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गया, जिससे इसका दो दिन का बढ़त का सिलसिला टूट गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख ने डॉलर को सहारा दिया और पीली धातु की तेजी पर लगाम लगाई। वहीं रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक ईंधन की कमी दूर होने और मुद्रास्फीति के जोखिम कम होने की उम्मीद बंधी है।
क्रिप्टो बाजार और भारतीय रुपये की स्थिति
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में कार्डानो ने पिछले हफ्ते की 2.85 प्रतिशत की गिरावट के बाद सोमवार को अपने प्रमुख समर्थन स्तर से ऊपर वापसी की। डेरिवेटिव बाजार के बेहतर संकेतों और मजबूत तकनीकी संरचना ने इस सुधार को गति दी है। कॉइनग्लास के आंकड़ों के अनुसार, कार्डानो का लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात सुधरकर 1.01 पर पहुंच गया, जो सकारात्मक दायरे में प्रवेश का संकेत देता है।
घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सोमवार को मजबूत शुरुआत के बाद 95.80 के करीब अपनी रिकवरी बनाए रखने में कामयाब रहा। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए नए कदमों से घरेलू मुद्रा को राहत मिली है और डॉलर-रुपया जोड़ी पर दबाव बना रहा।





















