अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। सऊदी अरब के प्रमुख बुनियादी ढांचे पर हूती हमलों में आई हालिया तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर से ऊपर टिका हुआ है। हालांकि शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान कीमतों में कुछ नरमी दर्ज की गई और भाव फिसलकर 104 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए, लेकिन मध्य पूर्व से आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं लगातार बाजार पर हावी बनी हुई हैं। रियाद के मुख्य हवाई अड्डे पर बार-बार हो रहे हमलों से अमेरिका के सीधे तौर पर इसमें शामिल होने और फारस की खाड़ी से ऊर्जा प्रवाह में नए व्यवधान पैदा होने की चिंताएं गहरा गई हैं।
कच्चे तेल में घट-बढ़ और आपूर्ति से जुड़े जोखिम
बीते कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन यानी शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 0.4 प्रतिशत बढ़कर 104.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई थीं। पूरे सप्ताह के आधार पर इसमें कुल 2.4 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई थी। सप्ताहांत के दौरान सऊदी अरब पर हूती हमलों में आई अचानक तेजी ने सोमवार सुबह एशियाई बाजारों के रुख को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। रियाद के मुख्य हवाई अड्डे को निशाना बनाकर एक ही सप्ताह में यह चौथा हमला किया गया, जिसने पूरे इलाके में सैन्य तनाव को अचानक बढ़ा दिया है।
सोमवार सुबह एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड ने शुरुआती बढ़त गंवा दी और इसमें 1.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे भाव फिसलकर 104 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चले गए। इस मामूली गिरावट के बावजूद कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से ऊपर मजबूती से बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में लगातार बना आपूर्ति जोखिम तेल की कीमतों को नीचे नहीं गिरने दे रहा है। दूसरी ओर, कुछ बाजार प्रतिभागियों का यह भी सोचना है कि रूस-यूक्रेन ऊर्जा युद्धविराम समझौते से वैश्विक ईंधन संकट कम हो सकता है, जिससे लंबी अवधि में मुद्रास्फीति का दबाव कुछ हद तक घटेगा।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख करेंसियों का रुख
वैश्विक ऊर्जा संकट और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी कई अहम जोड़ियों में हलचल देखी गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) ने सोमवार को शुरुआती कारोबारी अंतर को पाटने की कोशिश की, लेकिन छुट्टियों के कारण कम नकदी के चलते यह 0.7000 के स्तर से नीचे ही बना रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कई वर्षों के उच्च स्तर से आई नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने उबरने का प्रयास किया, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रही। इसके अतिरिक्त, नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की कम होती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बनाए रखा।
वहीं दूसरी तरफ, डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी 158.00 के स्तर से ऊपर सीमित दायरे में कारोबार करती रही। बाजार में इस बात की अटकलें तेज हैं कि जापानी मुद्रा को सहारा देने के लिए वहां के नीति-निर्माता जल्द हस्तक्षेप कर सकते हैं। हालांकि नरम अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने डॉलर की तेजी पर लगाम लगाई, लेकिन जापान और अमेरिका में छुट्टियों की वजह से कम नकदी के माहौल में सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले डॉलर को भू-राजनीतिक चिंताओं से कुछ सहारा भी मिला।
भारतीय रुपये की रिकवरी और सोने की चाल
घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जोरदार बढ़त के साथ खुला और 95.80 के करीब अपनी शुरुआती तेजी को बरकरार रखने में सफल रहा। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अमेरिकी डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए नए कदमों ने रुपये पर बने दबाव को कम किया है, जिससे भारतीय मुद्रा को खासी राहत मिली है। केंद्रीय बैंक के इन उपायों से डॉलर की आक्रामक खरीदारी पर रोक लगी है, जिससे रुपये में स्थिरता लौटती दिखी।
कीमती धातुओं की बात करें तो सोने में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली। सोमवार को एक सप्ताह के उच्च स्तर को छूने के बाद यूरोपीय कारोबारी सत्र में सोना फिसलकर 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया, जिससे इसकी लगातार दो दिनों की तेजी थम गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख ने डॉलर की गिरावट को थामा, जिसके परिणामस्वरूप गैर-ब्याज वाली इस धातु की बढ़त पर ब्रेक लगा। तेल की कीमतों में आई नरमी और युद्धविराम की उम्मीदों ने भी सोने में बिकवाली को हवा दी।
क्रिप्टो बाजार में कार्डानो की तकनीकी वापसी
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में कार्डानो (ADA) ने पिछले सप्ताह दर्ज की गई 2.85 प्रतिशत की गिरावट के बाद वापसी की और सोमवार को अपने महत्वपूर्ण समर्थन स्तर के ऊपर दोबारा कारोबार शुरू किया। डेरिवेटिव्स बाजार में बेहतर होती स्थिति और तकनीकी संकेतों ने एडीए की रिकवरी को मजबूत आधार दिया है। वायदा बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि कार्डानो के ट्रेडर्स का भरोसा लौट रहा है। कॉइनग्लास का कार्डानो के लिए लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात सोमवार को सुधरकर 1.01 पर पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी के सौदे फिर से बढ़ रहे हैं।



















