अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में दो दिनों की लगातार गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए अमेरिकी डॉलर ने स्विस फ्रैंक के मुकाबले नए सिरे से बढ़त दर्ज की है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोमवार को यह करेंसी पेअर 0.8310 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इस जोड़ी को सबसे बड़ा सहारा स्विस फ्रैंक पर बने शॉर्ट पोजिशंस के भारी दबाव से मिला है। वित्तीय बाजारों में यह धारणा लगातार मजबूत हो रही है कि दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त बनाए रख सकते हैं, जबकि स्विट्जरलैंड का केंद्रीय बैंक इसके विपरीत काफी नरम रुख अपनाए हुए है।
केंद्रीय बैंकों की नीतियों में अंतर और दरों का गणित
स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) ने अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दरों को शून्य प्रतिशत पर स्थिर बनाए रखा है। यह फैसला दुनिया के अन्य बड़े केंद्रीय बैंकों की आक्रामक नीतियों से बिल्कुल अलग दिशा दिखाता है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व को लेकर बाजार में उम्मीदें काफी सतर्क बनी हुई हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मौजूदा महीने में कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट्स की दर वृद्धि की संभावना घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले सप्ताह 24.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। हालांकि, फेडरल रिजर्व की दिसंबर में होने वाली बैठक को लेकर बाजार प्रतिभागी 84.1 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं कि उस समय ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाएगी। अमेरिकी उपभोक्ताओं के नरम पड़ते सेंटिमेंट और फेडरल रिजर्व के सतर्क अनुमानों ने डॉलर की तेज छलांग पर कुछ हद तक अंकुश जरूर लगाया है, लेकिन स्विस फ्रैंक की सुस्ती ने इस जोड़ी को ऊपर बनाए रखा है।
मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितता
व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक मोर्चे पर अनिश्चितता का एक बड़ा कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भी है। रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक और घातक हमले के बाद सऊदी अरब और यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियान में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। ऊर्जा बाजारों में पैदा हुई इस नई चिंता के चलते ट्रेडर्स काफी सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे वैश्विक निवेश धारणा प्रभावित हो रही है।
तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर
दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो यह करेंसी पेअर 0.8310 के स्तर पर कारोबार करते हुए तेजी के रुख को बनाए हुए है। स्पॉट कीमतें अल्पकालिक और मध्यम अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) के ऊपर टिकी हुई हैं। 9-दिवसीय ईएमए वर्तमान में बाजार मूल्य के ठीक नीचे बना हुआ है, जबकि 50-दिवसीय ईएमए इससे काफी नीचे स्थित है। यह संरचना किसी भी संभावित गिरावट के दौरान कीमतों को सहारा देने के लिए मांग का एक मजबूत दायरा तैयार करती है।
मोमेंटम इंडिकेटर के तौर पर 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) लगभग 60 के स्तर पर मौजूद है। यह संकेत देता है कि बाजार में तेजी का सकारात्मक रुझान बना हुआ है और अभी ओवरबॉट जैसी स्थिति नहीं है। जब तक कीमतें अपने नजदीकी ईएमए सपोर्ट के ऊपर बनी रहती हैं, तब तक ऊपर की ओर बढ़त जारी रहने की गुंजाइश दिखती है। गिरावट की स्थिति में शुरुआती सपोर्ट 9-दिवसीय ईएमए के करीब 0.8307 पर स्थित है, जबकि गहरा सुधार आने पर 50-दिवसीय ईएमए लगभग 0.8196 पर अहम रक्षात्मक स्तर साबित हो सकता है। मौजूदा डेटा सेट में पास में कोई तकनीकी रेजिस्टेंस नहीं दिखने से ईएमए के ऊपर टिके रहने तक तेजी का रुख बना हुआ है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस समय इसका भाव 0.8305 पर देखा गया है, जो 0.8314 के पिछले बंद स्तर से 0.11 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 0.7629 से 0.8382 के बीच रहा है और ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिन के औसत के 1.00 गुना के बराबर है। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला एटीआर(14) 0.01 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। तकनीकी विश्लेषण में पिवट पॉइंट 0.8299 पर स्थित है, जिसमें रेजिस्टेंस R1 0.8315 और R2 0.8326 पर तथा सपोर्ट S1 0.8289 और S2 0.8272 पर मौजूद हैं। इसके अलावा 20-डे सपोर्ट लगभग 0.8167 और रेजिस्टेंस 0.8382 के करीब है। मूविंग एवरेजेस में ईएमए20 0.8269, ईएमए50 0.8191 और ईएमए200 0.8031 पर हैं, जबकि एसएमए50 0.8162 और एसएमए200 0.7969 पर हैं। ईएमए50 का ईएमए200 से ऊपर होना लंबी अवधि के अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस को दर्शाता है। बोलिंगर बैंड (20,2) 0.8172 से 0.8380 (मध्य 0.8276) के दायरे में है और भाव इसके अंदर है। एडीएक्स(14) 28 पर ट्रेंडिंग स्थिति और स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 57 व सिग्नल लाइन 65 पर है। एमएसीडी 0.00 बनाम सिग्नल 0.01 पर मंदड़िया रुख दिखा रहा है।
स्विस फ्रैंक का स्वरूप, इतिहास और यूरो से जुड़ाव
स्विस फ्रैंक स्विट्जरलैंड की आधिकारिक मुद्रा है और यह दुनिया की शीर्ष दस सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में शामिल है। इसका कारोबारी वॉल्यूम स्विट्जरलैंड की समूची अर्थव्यवस्था के आकार से भी कहीं अधिक रहता है। फ्रैंक की कीमत व्यापक बाजार धारणा, देश की आर्थिक सेहत और स्विस नेशनल बैंक के कदमों से तय होती है। 2011 से 2015 के बीच स्विस फ्रैंक को यूरो के साथ एक निश्चित पेग में बांधा गया था। जब 2015 में इस पेग को अचानक हटाया गया, तो स्विस फ्रैंक की कीमत में 20 प्रतिशत से अधिक की भारी उछाल आई और वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई। भले ही वह व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है, लेकिन स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था पड़ोसी यूरोज़ोन पर बहुत अधिक निर्भर है। कुछ आर्थिक मॉडल्स के अनुसार यूरो और स्विस फ्रैंक के बीच 90 प्रतिशत से अधिक, यानी लगभग पूर्ण सह-संबंध देखा जाता है।
पारंपरिक रूप से स्विस फ्रैंक को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, जिसे वित्तीय तनाव के समय निवेशक भारी मात्रा में खरीदते हैं। स्विट्जरलैंड की स्थिर अर्थव्यवस्था, मजबूत निर्यात क्षेत्र, विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और वैश्विक संघर्षों में लंबे समय से चली आ रही तटस्थता की नीति इसे जोखिम से बचने वाले निवेशकों की पहली पसंद बनाती है। वैश्विक उथल-पुथल के समय फ्रैंक अन्य जोखिम भरी मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो जाता है।
मौद्रिक नीति की कार्यप्रणाली और मैक्रोइकोनॉमिक प्रभाव
स्विस नेशनल बैंक अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में कम बैठकें करता है। इसकी मौद्रिक नीति बैठकें साल में चार बार, यानी प्रत्येक तिमाही में केवल एक बार आयोजित होती हैं। बैंक का प्राथमिक लक्ष्य वार्षिक मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत से नीचे बनाए रखना होता है। जब महंगाई इस लक्ष्य से ऊपर निकलती है या भविष्य में इसके बढ़ने का अनुमान होता है, तो बैंक दरों में बढ़ोतरी करता है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर फ्रैंक के लिए सकारात्मक होती हैं क्योंकि वे बेहतर यील्ड देती हैं, जिससे विदेशी पूंजी आकर्षित होती है। इसके विपरीत, कम ब्याज दरें मुद्रा को कमजोर करती हैं।
स्विट्जरलैंड से जारी होने वाले आर्थिक आंकड़े भी सीधे तौर पर फ्रैंक की दिशा तय करते हैं। देश की अर्थव्यवस्था आम तौर पर काफी स्थिर रहती है, लेकिन आर्थिक विकास दर, मुद्रास्फीति, चालू खाता घाटा या बैंक के मुद्रा भंडार में कोई भी अप्रत्याशित बदलाव मुद्रा में उतार-चढ़ाव ला सकता है। मजबूत विकास, कम बेरोजगारी और बेहतर कारोबारी विश्वास फ्रैंक को सहारा देते हैं, जबकि मंदी के संकेत इसे कमजोर करते हैं। एक छोटी और खुली अर्थव्यवस्था होने के कारण यूरोपीय संघ इसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और राजनीतिक सहयोगी है, इसलिए यूरोज़ोन की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता स्विस फ्रैंक के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी रहती है।
वैश्विक बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की चाल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी अन्य परिसंपत्तियों पर हलचल देखने को मिली है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) ने सोमवार को मंदी के मामूली अंतर को पाटने की कोशिश की, लेकिन छुट्टी के कारण कम लिक्विडिटी के बीच यह एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर से नीचे ही बना रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से आई नरमी के बीच डॉलर संभलने की कोशिश कर रहा है, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में दर बढ़ोतरी की घटती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बनाए रखा है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के ऊपर सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। ट्रेडर्स इस बात को लेकर सतर्क हैं कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं। हालांकि, जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण सीमित लिक्विडिटी के बीच डॉलर के नुकसान पर भी रोक लगी रही। कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतें अपने दो महीने के निचले स्तर 4,067 डॉलर से उबरने के प्रयास में 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकने की कोशिश कर रही हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में, कार्डानो (ADA) पिछले सप्ताह के 2.85 प्रतिशत के सुधार के बाद सोमवार को अपने प्रमुख सपोर्ट क्षेत्र के ऊपर लौट आया है। डेरिवेटिव्स बाजार में सुधरती स्थिति इसे सहारा दे रही है और कॉइनग्लास का लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात 1.01 पर पहुंचकर सकारात्मक क्षेत्र में आ गया है। वहीं भारतीय मुद्रा बाजार में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए नए कदमों से भारतीय रुपये को बड़ी राहत मिली है। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया बढ़त के साथ खुला और USD/INR जोड़ी 1 प्रतिशत गिरकर 95.80 के करीब आ गई।





















