भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार के दौरान अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। मजबूत शुरुआत के बाद हेवीवेट शेयरों में लौटी भारी बिकवाली ने पिछले कारोबारी सत्र की तेजी पर पानी फेर दिया। बीएसई सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 900 अंकों से अधिक का गोता लगाकर नीचे चला गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 महत्वपूर्ण 22,400 के स्तर से नीचे फिसल गया। इस अचानक आए दबाव ने दलाल स्ट्रीट पर जारी सुधार की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है।
दिन के शुरुआती स्तरों से जोरदार फिसलन
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की थी। पिछले सत्र में देखने को मिले सुधार के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि बाजार अपनी बढ़त बरकरार रखेगा। हालांकि, पहले घंटे के बाद खरीदारी की रफ्तार फीकी पड़ गई और प्रमुख दिग्गजों में मुनाफावसूली हावी हो गई। सुबह करीब 11:35 बजे बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 72,472.33 की तुलना में 493.97 अंक यानी लगभग 0.68 प्रतिशत टूटकर 71,978.36 पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स 72,771.32 पर खुला था और दिन के दौरान 72,884.25 के उच्चतम स्तर को छूने के बाद 71,898.17 के निचले स्तर तक गिर गया था। इस तरह सेंसेक्स ने अपने ऊपरी स्तर से 900 अंक से ज्यादा गंवा दिए।
दूसरी ओर, निफ्टी 50 में भी ऐसा ही रुख रहा। सुबह करीब 11:40 बजे निफ्टी 141.85 अंक यानी करीब 0.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,378.60 के स्तर पर आ गया था, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 22,520.45 था। निफ्टी की शुरुआत 22,593.20 पर हुई थी और यह 22,651.10 के उच्च स्तर तक गया, लेकिन बिकवाली के झटके से यह 22,370.65 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। इन दोनों प्रमुख सूचकांकों के अहम स्तरों से नीचे फिसलने से ट्रेडर्स में घबराहट बढ़ गई।
भारत वीआईएक्स में 7 प्रतिशत से अधिक का उछाल
बाजार में अस्थिरता और घबराहट को मापने वाला प्रमुख सूचकांक भारत वीआईएक्स 7 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 15 के स्तर के पार पहुंच गया। अस्थिरता सूचकांक में आई यह तेज तेजी साफ संकेत देती है कि प्रतिभागी आने वाले सत्रों में शेयरों में बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। हालांकि वीआईएक्स बाजार की अगली दिशा तय नहीं करता, लेकिन इसमें अचानक उछाल यह बताता है कि कारोबारी जोखिम उठाने से बच रहे हैं और अपनी मौजूदा पोजीशन को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली का दबाव
बाजार में आई इस ताजा कमजोरी की मुख्य वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से जारी आक्रामक बिकवाली है। बाजार विश्लेषकों द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर महीने के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में ही एफआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार से 45,125 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। यह निकासी कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह पूरे सितंबर महीने में हुई 45,536 करोड़ रुपये की कुल विदेशी बिकवाली के लगभग बराबर पहुंच चुकी है।
लगातार हो रही विदेशी पूंजी की निकासी फ्रंटलाइन और लार्ज-कैप शेयरों पर भारी दबाव बना रही है। घरेलू संस्थागत निवेशक और खुदरा खरीदार गिरावट के समय खरीदारी का सहारा दे रहे हैं, लेकिन लगातार जारी भारी विदेशी बिकवाली की भरपाई करने के लिए केवल घरेलू प्रवाह पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहा है। यदि विदेशी निवेशक इसी रफ्तार से पूंजी निकालते रहे, तो सूचकांकों के लिए किसी भी सुधार को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक कारक
शेयर बाजार के मूल्यांकन पर दबाव डालने वाला दूसरा बड़ा कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही वृद्धि है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो इक्विटी की तुलना में फिक्स्ड इनकम और बॉन्ड अधिक आकर्षक लगने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाने लगते हैं। अनिश्चित ब्याज दर परिदृश्य, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और आगामी कंपनियों के नतीजों को देखते हुए निवेशक अधिक सतर्क हो रहे हैं।
अमेरिका और भारत दोनों में बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रहने पर इक्विटी निवेशक नई पूंजी लगाने से पहले कंपनियों की बैलेंस शीट की मजबूती, स्पष्ट आय वृद्धि और बेहतर नकदी प्रवाह की तलाश करने लगे हैं। कमजोर बुनियादी ढांचे वाली कंपनियों के शेयरों में इससे ज्यादा तेज गिरावट दर्ज की जा रही है।
बाजार रणनीतिकारों का दृष्टिकोण
वर्तमान बाजार स्थिति पर अपनी राय देते हुए जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा, "बाजार ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां बाहरी प्रतिकूल परिस्थितियां घरेलू अनुकूल कारकों पर हावी हैं।"
उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका की ऊंची बॉन्ड यील्ड निकट भविष्य में बाजार को प्रभावित करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि अल्पावधि में एफआईआई की बिकवाली जारी रह सकती है और घरेलू निवेशक इसे संभालने का प्रयास करेंगे। उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति सुधरती है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो बाजार मौजूदा स्तरों से मजबूत रिकवरी दिखा सकता है।



















