अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर के बीच का संतुलन एक बार फिर से डगमगाता हुआ नजर आ रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और यूरो क्षेत्र के व्यापार संतुलन में आई गिरावट ने यूरो की स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। वित्तीय संस्थान स्कॉटियाबैंक के रणनीतिकार शॉन ओसबोर्न और एरिक थियोरेट के विश्लेषण के अनुसार, EUR/USD की विनिमय दर 1.15 के ऊपरी दायरे में आ चुकी है। भले ही बॉन्ड यील्ड स्प्रेड यूरो को तकनीकी रूप से सहारा दे रहे हों, लेकिन बाजार का समग्र नजरिया मंदी की तरफ झुक गया है। यह स्थिति यूरो को अपने निष्पक्ष मूल्य अनुमान 1.1619 से नीचे की ओर धकेल रही है।
सेंटीमेंट में बदलाव और तकनीकी संकेतकों का विश्लेषण
अगस्त के मध्य से उत्तरार्द्ध तक यूरो में कुछ हद तक मजबूती का दौर देखा गया था, लेकिन हाल के दिनों में यह तेजी पूरी तरह से थम गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक हफ्ते के दौरान यूरो को लेकर बाजार का सेंटीमेंट काफी हद तक निराशाजनक हो गया है। यील्ड स्प्रेड से मिलने वाली तेजी इस नकारात्मक धारणा के सामने कम पड़ रही है। स्पॉट मार्केट में EUR/USD की चाल बैंक के 1.1619 के संकीर्ण निष्पक्ष मूल्य अनुमान से नीचे बनी हुई है, जिससे निवेशकों की नजरें अब निचले सपोर्ट स्तरों पर टिक गई हैं।
तकनीकी संकेतकों की बात करें तो अल्पकालिक दृष्टिकोण तटस्थ से मंदी की ओर जाता दिख रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI वर्तमान में 50 के न्यूट्रल आंकड़े के बेहद करीब बना हुआ है, लेकिन इसने हाल ही में मंदी के क्षेत्र में हल्की सी जगह बनाई है। मुद्रा जोड़ी का 1.1580 के स्तर से नीचे जाना यह स्पष्ट करता है कि अब 1.1520 का स्तर निकटतम महत्वपूर्ण सपोर्ट प्रदान करेगा। यदि यह गिरावट आगे भी जारी रहती है, तो 1.1499 पर स्थित 50-दिवसीय मूविंग एवरेज (50 day MA) यूरो को अगला मुख्य सहारा दे सकता है। दूसरी तरफ, यदि यूरो में सुधार होता है, तो 1.1600 से 1.1620 के बीच का दायरा मजबूत प्रतिरोध के रूप में काम करेगा। 2025 के मध्य से लेकर अब तक की मध्यम अवधि की सीमा काफी हद तक स्थिर रही है और 1.16 के मध्य में एक व्यापक जमावड़ा देखा गया है।
ऊर्जा बाजार और डीजल में रिकॉर्ड तेजी का प्रभाव
यूरो पर दबाव बढ़ने का एक प्रमुख कारण ऊर्जा बाजार में आई तेजी है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI कच्चे तेल की कीमतें लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ कारोबार कर रही हैं। पिछले छह दिनों में से पांच दिनों में क्रूड ऑयल में तेजी दर्ज की गई है, जिससे यह 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल में आई इस तेजी का सीधा असर यूरो क्षेत्र के व्यापार की शर्तों (terms of trade) पर पड़ रहा है, क्योंकि यूरोप अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
इसके अलावा, डीजल बाजार भी अभूतपूर्व हलचल से गुजर रहा है। हालांकि समग्र कच्चा तेल बाजार अपेक्षाकृत स्थिर नजर आ सकता है, लेकिन अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI के बीच का अंतर यानी अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार $100 प्रति बैरल के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान यह क्रैक स्प्रेड $102.00 प्रति बैरल से अधिक के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि रिफाइनिंग लागत और ऊर्जा बाजार की आपूर्ति में भारी खिंचाव बना हुआ है।
ग्लोबल करेंसी मार्केट और अमेरिकी डॉलर की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में केवल यूरो ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) भी दबाव में देखा गया है। अमेरिकी डॉलर में आई जोरदार वापसी और निरंतर बनी हुई भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण पाउंड लगातार कई दिनों की गिरावट के बाद 1.3470 के स्तर के पास पहुंच गया है, जो चार सप्ताह का निचला स्तर है। हालांकि, अमेरिकी सत्र के उत्तरार्द्ध में स्थिति थोड़ी बदलती हुई नजर आई, जब जापानी येन (JPY) में अचानक आई मजबूती ने डॉलर की बढ़त पर लगाम लगाई।
जापानी येन को समर्थन देने के लिए मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की संभावना जताई गई, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर में व्यापक बिकवाली का रुख देखा गया। इस बिकवाली का फायदा उठाते हुए EUR/USD ने बुधवार के दूसरे कारोबारी सत्र में वापसी की और 1.1600 के स्तर की ओर रुख किया। उसी दौरान अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़ों ने दर्शाया कि अगस्त महीने में निजी क्षेत्र के रोजगार में उम्मीद से कम बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे डॉलर इंडेक्स पर अतिरिक्त दबाव बना।
सोने में उछाल और क्रिप्टो बाजार की सुस्ती
विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन की अचानक आई तेजी का सीधा असर कीमती धातुओं पर भी देखने को मिला। सोने (XAU/USD) ने बुधवार को जोरदार वापसी करते हुए अपनी शुरुआती सभी हानियों की भरपाई कर ली। अमेरिकी डॉलर पर बने बिकवाली के दबाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का रुख किया, जिससे इसकी कीमतों में एक तेज उछाल देखने को मिला।
दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सतर्कता का माहौल देखने को मिल रहा है। निवेशक जोखिम भरे संपत्तियों से पीछे हट रहे हैं, जिसके कारण क्रिप्टो बाजार में व्यापक गिरावट आई है। बिटकॉइन (BTC) अपने अल्पकालिक सपोर्ट स्तर $77,000 के करीब समेकित हो रहा है, जबकि एथेरियम (ETH) में भी दबाव बना हुआ है और यह $2,400 के स्तर की तरफ फिसल रहा है। वहीं रिपल में भी सुस्ती का रुख बना हुआ है और इसकी कीमतें नीचे की ओर कारोबार कर रही हैं।



















