सितंबर महीने की शुरुआत भारतीय रुपये के लिए काफी राहत भरी रही, जब यह तकनीकी रूप से 100-दिन के मूविंग एवरेज के महत्वपूर्ण स्तर 95.15 से नीचे फिसल गया। जुलाई 2025 के बाद यह पहला मौका है जब रुपये ने इस स्तर को नीचे की ओर पार किया है। हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस शुरुआती मजबूती के बावजूद भारतीय मुद्रा के सामने ढांचागत चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप ने भले ही currency को तात्कालिक सहारा दिया हो, लेकिन वैश्विक बाजार की विपरीत परिस्थितियां आगे की राह को कठिन बना रही हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था को जीडीपी आंकड़ों से मिला संबल
रुपये के सामने खड़ी बाहरी चुनौतियों के बीच घरेलू आर्थिक आंकड़े काफी मजबूत नजर आ रहे हैं। दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7.8% सालाना रही, जो बाजार के अनुमानों से बेहतर है। इस प्रदर्शन से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक झटकों और अनिश्चितताओं को बेहतर तरीके से सहन किया है। इसके बावजूद सोसायटी जेनेरल के विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों का सख्त रुख और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये के दीर्घकालिक सुधार में बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख मुद्राओं की हलचल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) की जोड़ी में लगातार गिरावट जारी रही और यह फिसलकर 1.3470 के स्तर पर आ गई, जो पिछले चार हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। ब्रिटिश पाउंड पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर पड़ा है। इसके विपरीत, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) ने दिन के दूसरे हिस्से में रिकवरी की और 1.1600 के स्तर की ओर बढ़त बनाई। डॉलर में आई कमजोरी का एक बड़ा कारण जापानी येन को समर्थन देने के लिए बाजार में हुआ संभावित हस्तक्षेप माना जा रहा है। इसके अलावा, अगस्त महीने में अमेरिका के प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे डॉलर की बढ़त पर लगाम लगी।
कच्चे तेल और डीजल स्प्रेड में रिकॉर्ड तेजी
जिंस बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार तीसरे दिन चढ़कर बंद हुईं। पिछले छह कारोबारी सत्रों में यह पांचवां मौका था जब क्रूड में मजबूती दर्ज की गई। एशियाई कारोबारी घंटों में डब्लूटीआई क्रूड ऑइल (WTI) की कीमतें 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। तेल बाजार में स्थिरता का अहसास भले ही दिख रहा हो, लेकिन डीजल की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्लूटीआई के बीच का अंतर, पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह प्रीमियम रिकॉर्ड $102.00 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया।
सोने में उछाल और क्रिप्टो बाजार पर दबाव
जापानी येन में आई अचानक मजबूती के कारण अमेरिकी डॉलर पर चौतरफा बिकवाली का दबाव बना, जिसका सीधा फायदा सोने को मिला। गोल्ड (XAU/USD) ने बुधवार को जोरदार वापसी करते हुए अपने शुरुआती सभी नुकसान की भरपाई कर ली। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे वहां नरमी देखने को मिली। बिटकॉइन (BTC) $77,000 के अपने अल्पकालिक सपोर्ट स्तर के पास कंसोलिडेट होता दिखा। इथेरियम (ETH) में भी गिरावट जारी रही और यह $2,400 के स्तर के पास आ गया, जबकि रिपल (XRP) में भी नीचे का रुझान बना रहा।



















