फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के बीच 0.7115 पर फिसलासिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामकारोबारी सत्र के आगाज में सुस्त दिखे सूचकांक, 23,200 के ऊपर संभला निफ्टी तो सेंसेक्स में नरमीराजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजों पर केसी वेणुगोपाल ने की समीक्षा, आगामी पंचायत चुनाव की रणनीति पर मंथनउत्तराखंड में नीट यूजी काउंसलिंग पर बड़ा एक्शन, आरक्षित कोटे के 778 मेडिकल दाखिलों की जांच शुरून्यूयॉर्क में वैश्विक तनाव पर बोले एस. जयशंकर, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में तुरंत बदलाव जरूरीकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगदलाल स्ट्रीट पर शुक्रवार को लौटी रौनक, रियल्टी और मिडकैप की अगुवाई में सेंसेक्स और निफ्टी मजबूतपालक और बथुआ से कहीं अधिक पौष्टिक है मोरिंगा, सुबह के नाश्ते में बनाएं ये कुरकुरे पराठेअमेरिकी डॉलर के सामने कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसला, व्यापार तनाव से बढ़ा दबाव
चुनिंदा व्यावसायिक यूपीआई लेन-देन पर 15 अक्टूबर 2026 से लगेगा एमडीआर, आम उपभोक्ताओं के लिए सेवाएं रहेंगी पूरी तरह निःशुल्कबाज़ार
22 सित॰ 2026, 8:21 am (24 मिनट पहले)· 0

चुनिंदा व्यावसायिक यूपीआई लेन-देन पर 15 अक्टूबर 2026 से लगेगा एमडीआर, आम उपभोक्ताओं के लिए सेवाएं रहेंगी पूरी तरह निःशुल्क

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यावसायिक यूपीआई लेन-देन पर नया एमडीआर ढांचा प्रभावी होगा, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाया गया है। आगामी 15 अक्टूबर 2026 से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई पर एक संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचा प्रभावी होने जा रहा है। वित्त मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया मंच X पर साझा किए गए आधिकारिक विवरण के मुताबिक, यह शुल्क ढांचा केवल 2,000 रुपये से अधिक राशि वाले चुनिंदा व्यावसायिक लेन-देन पर लागू होगा। आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि व्यक्तिगत स्तर पर किए जाने वाले सभी यूपीआई भुगतान पूर्ववत बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे।

किन दस प्रमुख श्रेणियों में लागू होगा नया एमडीआर शुल्क

प्रस्तावित नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक मूल्य वाले विशिष्ट व्यावसायिक और क्षेत्रीय भुगतानों को इस दायरे में सम्मिलित किया गया है। इन दस श्रेणियों में निम्नलिखित लेन-देन शामिल हैं

ये भी पढ़ें
  • 2,000 रुपये से अधिक के सामान्य मर्चेंट यानी खुदरा दुकानदार भुगतान
  • 2,000 रुपये से अधिक राशि के रेलवे टिकट भुगतान
  • 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के टेलीकॉम और मोबाइल रिचार्ज लेन-देन
  • 2,000 रुपये से अधिक के बीमा यानी इंश्योरेंस प्रीमियम भुगतान
  • 2,000 रुपये से अधिक के पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन से जुड़े लेन-देन
  • 2,000 रुपये से अधिक राशि के कृषि इनपुट यानी बीज और खाद की खरीद के भुगतान
  • म्यूचुअल फंड में निवेश हेतु किए जाने वाले भुगतान
  • प्रतिभूतियों और सिक्योरिटीज से संबंधित लेन-देन
  • स्टॉकब्रोकर को किए जाने वाले लेन-देन
  • शेयर बाजार से संबद्ध अधिकृत डीलरों के भुगतान

विभिन्न क्षेत्रों के लिए तय शुल्क दरें और अधिकतम सीमा

कारोबार की प्रकृति और लाभ के अंतर को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशिष्ट दरें निर्धारित की हैं। सामान्य मर्चेंट लेन-देन में यदि भुगतान राशि 2,000 रुपये से अधिक है, तो 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर देय होगा। बड़े लेन-देन को अत्यधिक लागत से सुरक्षित रखने के लिए 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम चार्ज 300 रुपये तक सीमित रखा गया है।

कम मार्जिन वाले अनिवार्य जनोपयोगी क्षेत्रों जैसे रेलवे टिकट, ईंधन, बीमा प्रीमियम और टेलीकॉम सेवाओं के लिए प्रतिशत के स्थान पर केवल 5 रुपये का एकमुश्त फ्लैट शुल्क तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, पूंजी बाजार, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े लेन-देन के लिए 0.02 प्रतिशत की मामूली दर निर्धारित की गई है, जिसमें अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये रखी गई है।

छोटे कारोबारियों को दी गई पूर्ण छूट

देश भर के छोटे व्यापारियों और स्वरोजगारियों के हितों की रक्षा करते हुए नए नियमों में उन्हें स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। पी2पीएम श्रेणी के तहत आने वाले ऐसे छोटे दुकानदार, जिनकी क्यूआर कोड के माध्यम से होने वाली कुल मासिक बिक्री 1 लाख रुपये तक है, उनसे किसी भी लेन-देन पर कोई एमडीआर शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस प्रावधान से स्थानीय किराना और छोटे वेंडरों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

उपभोक्ताओं की जेब पर प्रभाव और कड़े नियामक दिशा-निर्देश

मंत्रालय ने साफ तौर पर निर्देशित किया है कि एमडीआर का समस्त वित्तीय दायित्व केवल मर्चेंट और कारोबारी तंत्र पर ही रहेगा। किसी भी परिस्थिति में बैंक अथवा भुगतान ऐप जैसे गूगल पे और फोनपे ग्राहकों से कोई अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपा हुआ शुल्क वसूल नहीं कर सकते। इसके साथ ही कारोबारियों को यह शुल्क ग्राहकों के बिल में जोड़ने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। व्यक्तिगत स्तर पर किए जाने वाले पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेन-देन और 2,000 रुपये तक के सभी मर्चेंट भुगतान पर शून्य प्रतिशत एमडीआर जारी रहेगा, जिससे देश के कुल मर्चेंट भुगतानों का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा इस नए नियम के प्रभाव से पूरी तरह अप्रभावित रहेगा।

सवाल-जवाब

क्या नए नियमों के बाद आम लोगों के लिए यूपीआई से भुगतान करने पर शुल्क लगेगा?
नहीं, आम ग्राहकों के लिए सभी यूपीआई भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे और किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
यह नया एमडीआर नियम किस तारीख से प्रभावी होगा?
यह नया फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
किन लेन-देन पर यह एमडीआर शुल्क लागू किया गया है?
यह केवल 2,000 रुपये से अधिक मूल्य वाले चुनिंदा व्यावसायिक भुगतानों और 10 विशिष्ट श्रेणियों पर लागू होगा।
क्या छोटे दुकानदारों को भी यह शुल्क देना होगा?
नहीं, जिन छोटे व्यापारियों की क्यूआर कोड से मासिक आय 1 लाख रुपये तक है, उन्हें इससे पूरी तरह छूट दी गई है।
सामान्य मर्चेंट लेन-देन पर कितनी दर और अधिकतम सीमा तय की गई है?
2,000 रुपये से अधिक के सामान्य मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
रेलवे, ईंधन और बीमा जैसे जरूरी क्षेत्रों में क्या दर लागू होगी?
इन आवश्यक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रतिशत के बजाय 5 रुपये का एकमुश्त फ्लैट शुल्क लगेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp