दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था इस समय दो अलग-अलग मोर्चों पर दबाव झेल रही है। एक तरफ उसके सेमीकंडक्टर शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली है, तो दूसरी तरफ ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि उपभोक्ता महंगाई धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रही है। बीएनवाई की एक रिपोर्ट में चिप शेयरों में हुई इस भारी बिकवाली के पैमाने को रेखांकित किया गया है, वहीं ओईसीडी के 2026 आर्थिक सर्वेक्षण में आगाह किया गया है कि सेमीकंडक्टर निर्यात पर देश की निर्भरता उसे वैश्विक तकनीकी चक्र के उतार-चढ़ाव के आगे कहीं ज्यादा कमजोर बना रही है।
चिप शेयरों में एशियाभर में गिरावट
सेमीकंडक्टर शेयरों में हुई तेज बिकवाली का असर सिर्फ दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने जापान और ताइवान के बाजारों को भी चपेट में लिया। निवेशक इस सवाल से जूझते दिखे कि AI से जुड़े पूंजीगत खर्च का जो बड़ा पैमाना बना हुआ है, क्या वह हाल की तेजी को आगे भी जायज ठहरा पाएगा। इसी दौरान चीन के तकनीकी सूचकांकों में भी तीखी गिरावट दर्ज की गई। यानी पूरे क्षेत्र में तकनीकी शेयरों को लेकर एक जैसी बेचैनी दिखी, जहां कमाई की उम्मीदों और असल खर्च के बीच का फासला निवेशकों को खटकने लगा।
ओईसीडी की चेतावनी: एक ही क्षेत्र पर निर्भरता का खतरा
यह बिकवाली ऐसे समय पर आई जब ओईसीडी ने चेताया कि सेमीकंडक्टर निर्यात पर दक्षिण कोरिया की बढ़ती निर्भरता अर्थव्यवस्था को वैश्विक तकनीकी चक्र के झटकों के प्रति और अधिक उजागर कर रही है। इससे एक ही क्षेत्र पर टिके रहने के जोखिम, यानी कंसंट्रेशन रिस्क, को लेकर चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
ओईसीडी के 2026 इकोनॉमिक सर्वे ऑफ कोरिया में साफ कहा गया है कि सेमीकंडक्टर निर्यात भले ही विकास का एक अहम इंजन हो, लेकिन उस पर भारी निर्भरता देश को बाहरी झटकों, उत्पादन में उतार-चढ़ाव और कर राजस्व में उठापटक के आगे कमजोर बना रही है। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि 2026 की शुरुआत में निर्यात और निवेश की रफ्तार बढ़ी, जिसे AI बूम का सहारा मिला, लेकिन यही निर्भरता रणनीतिक कमजोरियां भी पैदा कर रही है।
ओईसीडी ने सरकार को क्या सलाह दी
रिपोर्ट में सरकार से आग्रह किया गया कि वह नजदीकी समय में घरेलू मांग को सहारा देने के लिए राजकोषीय नीति का इस्तेमाल करे, जबकि मध्यम अवधि में खर्च पर लगाम कसकर राजकोषीय सेहत को बनाए रखे। यह सलाह इसलिए भी अहम है क्योंकि बुजुर्ग होती आबादी से जुड़ा खर्च तेजी से बढ़ रहा है और उसका दबाव लगातार भारी होता जा रहा है।
इसके साथ ही ओईसीडी ने एक मजबूत राजकोषीय ढांचा बनाने, पेंशन की पात्रता उम्र को आगे खिसकाने, श्रम बाजार में सुधार और व्यापक कर सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। कर सुधार के मामले में खासतौर पर संपत्ति कराधान में बदलाव की बात कही गई।
जून में महंगाई ने पकड़ी हल्की रफ्तार
दूसरी तरफ, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की तस्वीर बताती है कि कीमतों में हल्की मजबूती आ रही है। जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मासिक आधार पर 0.1% और सालाना आधार पर 3.2% बढ़ा, जो मई के 0.5% मासिक और 3.1% सालाना के मुकाबले सालाना स्तर पर तेज रहा। खाने-पीने और ऊर्जा को छोड़कर मापा जाने वाला कोर सूचकांक मासिक आधार पर स्थिर रहा और सालाना आधार पर 2.5% ऊपर रहा, जो पिछले महीने के बराबर ही है।
कीमतों में बढ़त की अगुवाई फर्निशिंग, घरेलू उपकरण और नियमित रखरखाव ने की, जो मासिक आधार पर 1.2% चढ़े। इसके बाद खाद्य और गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ 0.4%, अल्कोहल वाले पेय और तंबाकू 0.3% तथा स्वास्थ्य से जुड़ी चीजें 0.2% महंगी हुईं।
अब नजर किस पर टिकी है
कुल मिलाकर तस्वीर मिली-जुली है। कोर महंगाई स्थिर बनी हुई है और अलग-अलग क्षेत्रों में कीमतों की चाल एक जैसी नहीं है, जिससे ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर ध्यान बना हुआ है। एक ओर चिप शेयरों की बिकवाली और एक ही क्षेत्र पर निर्भरता का जोखिम, तो दूसरी ओर धीरे-धीरे सिर उठाती महंगाई, यही दो कारक फिलहाल दक्षिण कोरिया की आर्थिक दिशा को तय करने वाले सबसे अहम बिंदु बने हुए हैं।













