भारतीय शेयर बाजार के लिए सितंबर महीने की शुरुआत सुस्त रही और पहले कारोबारी सत्र में निवेशकों को निराशा हाथ लगी। शुरुआती घंटों में बाजार ने खुद को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन सत्र के आगे बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों ने स्थिति को पूरी तरह बिगड़ने से बचाने का प्रयास किया, लेकिन चौतरफा दबाव के आगे वे ज्यादा असर नहीं दिखा सके।
सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 12.99 अंक या 0.02 प्रतिशत की हल्की कमजोरी के साथ 76,944.28 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 24.60 अंक यानी 0.10 प्रतिशत फिसलकर 24,055.80 पर बंद हुआ। बाजार के समग्र दायरे पर नजर डालें तो गिरावट का पलड़ा काफी भारी रहा। सत्र के दौरान कुल 2,476 शेयर नुकसान के साथ बंद हुए, जबकि 1,655 शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और 185 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।
बैंकिंग और ऑटो शेयरों में बिकवाली
कारोबार के दौरान दिग्गज शेयरों में बिकवाली का जोर साफ दिखाई दिया। श्रीराम फाइनेंस के शेयर में सबसे बड़ी गिरावट आई और यह 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई के शेयर 2 से 3 प्रतिशत तक नीचे आए। ऑटो सेक्टर में मारुति सुजुकी के शेयर अगस्त के उम्मीद से कम डिस्पैच आंकड़ों के कारण करीब 5 प्रतिशत लुढ़ककर एक महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। इसके अलावा नेस्ले इंडिया और इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में भी 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
आईटीसी और चुनिंदा शेयरों का सहारा
कमजोर माहौल के बीच कुछ शेयरों ने बाजार को थामने का काम किया। आईटीसी के शेयरों में करीब 4.6 प्रतिशत की जोरदार तेजी आई और यह निफ्टी 50 का सबसे बड़ा फायदे वाला शेयर बना। इसके साथ ही एचसीएल टेक्नोलॉजीज, अडानी पोर्ट्स और भारती एयरटेल के शेयरों में भी 3 से 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में भी लगभग 1 प्रतिशत की तेजी आई, जिसे अगस्त के बेहतर बिक्री आंकड़ों से समर्थन मिला।
मिडकैप और बैंक निफ्टी पर भारी दबाव
बड़े शेयरों की तुलना में मिडकैप और छोटे शेयरों का हाल ज्यादा खराब रहा। व्यापक बाजार में बिकवाली का दबाव अधिक होने के कारण मिडकैप इंडेक्स करीब 1.4 प्रतिशत टूट गया। बैंकिंग शेयरों में सुस्ती के चलते बैंक निफ्टी में भी लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसमें एसबीआई और एक्सिस बैंक की बड़ी भूमिका रही।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की चिंता
घरेलू बाजार में इस मंदी के पीछे भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल भी एक अहम वजह रहा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस आशंका के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं। अधिक जानकारी के लिए यहाँ देख सकते हैं।



















