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बिश्केक में भारत की कूटनीतिक जीत, एससीओ घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ प्रस्तावों पर लगी मुहरदुनिया
1 सित॰ 2026, 5:24 pm (48 मिनट पहले)· 3

बिश्केक में भारत की कूटनीतिक जीत, एससीओ घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ प्रस्तावों पर लगी मुहर

बिश्केक में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के कई प्रस्तावों को साझा घोषणा-पत्र में जगह मिली। सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के कड़े रुख को सदस्य देशों ने समर्थन दिया।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के हालिया शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और रणनीतिक सोच को बड़ी सफलता मिली है। बैठक के बाद जारी किए गए साझा घोषणा-पत्र में भारत द्वारा रखे गए हर अहम प्रस्ताव और सुझाव को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिससे वैश्विक मंच पर देश का प्रभाव साफ तौर पर झलकता है।

शिखर सम्मेलन के दौरान आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सभी सदस्य देशों ने एकजुट होकर मुकाबला करने का संकल्प दोहराया। घोषणा-पत्र में इस बात पर कड़ी सहमति बनी कि किसी भी देश या गुट द्वारा आतंकवादी, अलगाववादी और चरमपंथी संगठनों का इस्तेमाल अपने रणनीतिक फायदों के लिए करने की कोशिशों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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आतंकवाद पर कड़ा संदेश

इस महत्वपूर्ण मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना किसी का नाम लिए पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधा और करारा जवाब दिया। राष्ट्राध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि आतंकवाद को अब किसी भी सरकार द्वारा अपनी नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान इसलिए भी अत्यधिक सामयिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान आने वाले एक साल के भीतर शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता संभालने की तैयारी कर रहा है।

दोहरे मापदंडों के खिलाफ वैश्विक रुख

भारत के दृष्टिकोण से सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड अपनाने को सिरे से खारिज कर दिया गया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की गई कि वह आतंकवाद के हर संभव रूप के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे, जिसके दायरे में सीमा पार से होने वाला आतंकवाद भी पूरी तरह शामिल है।

इसके अलावा, घोषणा-पत्र में भारत की विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जुड़ी पहलों को भी विशेष रूप से स्थान मिला है। सदस्य देशों ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और एससीओ यंग साइंटिस्ट्स फोरम के नियमित आयोजनों को जारी रखने पर बल दिया है, जो मूल रूप से भारत की ही एक अनूठी पहल है।

सांस्कृतिक संवाद और भाषा में बदलाव

बैठक में साल 2026 के दौरान भारत में आयोजित होने वाले एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम का सभी नेताओं ने खुलकर स्वागत किया। युवाओं के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी सहमति बनी, जिसमें भारत द्वारा शुरू की गई एससीओ यंग ऑथर्स कॉन्फ्रेंस के योगदान की भी सराहना की गई।

घोषणा-पत्र में एक और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। एससीओ चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है, जिसके तहत अंग्रेजी को संगठन की आधिकारिक और कार्यकारी भाषा के रूप में अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिश्केक के इस घोषणा-पत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत का सख्त तेवर, तकनीकी व युवा केंद्रित पहल तथा कूटनीतिक प्राथमिकताएं वैश्विक स्तर पर स्वीकार की जा रही हैं।

सवाल-जवाब

शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन कहां आयोजित किया गया था?
यह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया गया था।
साझा घोषणा-पत्र में आतंकवाद को लेकर क्या मुख्य सहमति बनी?
सदस्य देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ मिलकर मुकाबला करने तथा आतंकवाद को सरकारी नीति का हथियार न बनाने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में क्या चेतावनी दी?
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को नीतिगत हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एससीओ चार्टर में भाषा को लेकर क्या बदलाव किया जा रहा है?
चार्टर में संशोधन कर अंग्रेजी को संगठन की आधिकारिक और कार्यकारी भाषा बनाने की दिशा में प्रगति हुई है।
वर्ष 2026 में एससीओ का कौन सा कार्यक्रम भारत में होना है?
वर्ष 2026 में भारत में एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम आयोजित किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·37 मिनट पहले

बिश्केक सम्मेलन में एससीओ चार्टर के तहत अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा बनाना और आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों को खारिज कराना भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह रणनीतिक बदलाव तब अहम है जब पाकिस्तान आगामी अध्यक्षता संभालने जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव स्पष्ट रूप से मजबूत हुआ है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·36 मिनट पहले

कार्लोस मेंडोज़ा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना आवश्यक है कि एससीओ घोषणा-पत्र में सीमा पार आतंकवाद और दोहरे मापदंडों की स्पष्ट अस्वीकृति से नई दिल्ली को क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला में अपनी प्राथमिकताओं को स्थापित करने का एक मजबूत मंच मिला है। विशेष रूप से, चार्टर में अंग्रेजी को कार्यकारी भाषा के रूप में शामिल करने और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसी पहलों को मिली वैश्विक स्वीकृति इस बात का संकेत है कि भारत इस भू-राजनीतिक मंच पर केवल सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, विज्ञान और सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से अपने दीर्घकालिक प्रभाव को लगातार विस्तारित कर रहा है।

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