किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के हालिया शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और रणनीतिक सोच को बड़ी सफलता मिली है। बैठक के बाद जारी किए गए साझा घोषणा-पत्र में भारत द्वारा रखे गए हर अहम प्रस्ताव और सुझाव को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिससे वैश्विक मंच पर देश का प्रभाव साफ तौर पर झलकता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सभी सदस्य देशों ने एकजुट होकर मुकाबला करने का संकल्प दोहराया। घोषणा-पत्र में इस बात पर कड़ी सहमति बनी कि किसी भी देश या गुट द्वारा आतंकवादी, अलगाववादी और चरमपंथी संगठनों का इस्तेमाल अपने रणनीतिक फायदों के लिए करने की कोशिशों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आतंकवाद पर कड़ा संदेश
इस महत्वपूर्ण मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना किसी का नाम लिए पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधा और करारा जवाब दिया। राष्ट्राध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि आतंकवाद को अब किसी भी सरकार द्वारा अपनी नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान इसलिए भी अत्यधिक सामयिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान आने वाले एक साल के भीतर शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता संभालने की तैयारी कर रहा है।
दोहरे मापदंडों के खिलाफ वैश्विक रुख
भारत के दृष्टिकोण से सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड अपनाने को सिरे से खारिज कर दिया गया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की गई कि वह आतंकवाद के हर संभव रूप के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे, जिसके दायरे में सीमा पार से होने वाला आतंकवाद भी पूरी तरह शामिल है।
इसके अलावा, घोषणा-पत्र में भारत की विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जुड़ी पहलों को भी विशेष रूप से स्थान मिला है। सदस्य देशों ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और एससीओ यंग साइंटिस्ट्स फोरम के नियमित आयोजनों को जारी रखने पर बल दिया है, जो मूल रूप से भारत की ही एक अनूठी पहल है।
सांस्कृतिक संवाद और भाषा में बदलाव
बैठक में साल 2026 के दौरान भारत में आयोजित होने वाले एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम का सभी नेताओं ने खुलकर स्वागत किया। युवाओं के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी सहमति बनी, जिसमें भारत द्वारा शुरू की गई एससीओ यंग ऑथर्स कॉन्फ्रेंस के योगदान की भी सराहना की गई।
घोषणा-पत्र में एक और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। एससीओ चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है, जिसके तहत अंग्रेजी को संगठन की आधिकारिक और कार्यकारी भाषा के रूप में अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिश्केक के इस घोषणा-पत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत का सख्त तेवर, तकनीकी व युवा केंद्रित पहल तथा कूटनीतिक प्राथमिकताएं वैश्विक स्तर पर स्वीकार की जा रही हैं।





















