वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इन दिनों वित्तीय आंकड़ों और वास्तविक कीमतों की चाल के बीच एक अनोखा अंतर देखने को मिल रहा है। डेरिवेटिव्स बाजार में सट्टेबाज जापानी येन पर तेजी का बड़ा दांव लगा रहे हैं, लेकिन हाजिर बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती लगातार बरकरार है। आम तौर पर जब किसी मुद्रा के पक्ष में बड़े स्तर पर अनुबंध बनते हैं, तो उसकी विनिमय दर में सुधार दर्ज होता है। इसके विपरीत, डॉलर और येन की जोड़ी में तेजी देखी जा रही है, जिससे विश्लेषक इसे एक असामान्य विरोधाभास के रूप में देख रहे हैं। यदि विनिमय दरों में गिरावट आती है तो सट्टेबाजों की रणनीति सही साबित होगी, जबकि 156.00 के स्तर से ऊपर की मजबूत चाल इस धारणा को पूरी तरह कमजोर कर देगी।
जापानी येन और कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन के ताजा आंकड़े
कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन के हालिया स्थिति विवरण के मुताबिक, जापानी येन में गैर-व्यावसायिक शुद्ध लंबी पोजिशन यानी नेट लॉन्ग का आंकड़ा सुधरकर लगभग 120.4 हजार अनुबंधों तक पहुंच गया है। अगस्त की शुरुआत के बाद से यह किसी एक सप्ताह में देखा गया सबसे बड़ा साप्ताहिक उछाल है। इस तेज उछाल के साथ सट्टेबाजों का शुद्ध जोखिम 88वें प्रतिशतक तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद, हाजिर कारोबार में USD/JPY ने जोरदार बढ़त दर्ज की है, जो इस सट्टा प्रवाह से पूरी तरह उलट दिशा में जा रही है।
शुक्रवार को यूरोपीय सत्र के दौरान USD/JPY की जोड़ी ने अपनी बढ़त को नए सिरे से आगे बढ़ाया और दो सप्ताह के उच्चतम स्तर को छूते हुए 158.00 के करीब जा पहुंची। यह स्थिति इसलिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है, जिसे लंबे समय से बाजार में अपेक्षित माना जा रहा था। हालांकि, नीति निर्धारण समिति में 7-2 के बहुमत से यह निर्णय लिया गया। गवर्नर काजुओ उएदा के तीखे बयानों और नीतिगत चरण में बदलाव की पुष्टि के बावजूद दर वृद्धि के खिलाफ पड़े दो अप्रत्याशित विरोध मतों ने जापानी येन पर दबाव बना दिया है।
कनाडाई डॉलर और स्विस फ्रैंक में भी कीमतों और प्रवाह का टकराव
बाजार में कीमतों और सट्टेबाजी के बीच यह बेमेल स्थिति केवल जापानी मुद्रा तक ही सीमित नहीं है। सबसे स्पष्ट असंतुलन येन, कनाडाई डॉलर और स्विस फ्रैंक में दर्ज किए गए हैं। वास्तव में, हाजिर कीमतें और सट्टेबाजों का वित्तीय प्रवाह ठीक विपरीत दिशाओं में इशारा कर रहे हैं। इस वजह से तकनीकी विश्लेषक इसे किसी स्पष्ट रुझान की शुरुआत मानने से बच रहे हैं। मुद्रा कारोबारियों के लिए किसी एक समय का स्थिर आंकड़ा देखने के बजाय आने वाला अगला मूल्य बदलाव अधिक मायने रखता है। यदि कीमतों का मौजूदा रुख बना रहता है तो यह सट्टा प्रवाह की सीमा को उजागर करेगा, जबकि कीमतों में बदलाव आने पर ही इन अनुबंधों की सार्थकता सिद्ध हो पाएगी।
सोने में भारी खरीदारी और यूरो में पुनर्गठन की गुंजाइश
कीमती धातुओं के खंड में सोने यानी XAU में जोखिम का स्तर सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला बना हुआ है, जहां इसका स्थान 97वें प्रतिशतक पर दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, मुद्रा वर्ग में जापानी येन 93वें प्रतिशतक के साथ सबसे मजबूत शुद्ध स्थिति दर्ज कर रहा है। इसके बिल्कुल विपरीत छोर पर यूरो खड़ा है, जो लगभग 12वें शुद्ध प्रतिशतक के नजदीक टिका हुआ है। यह समग्र मानचित्र साफ दर्शाता है कि जहां सोने में अत्यधिक भीड़भाड़ वाली लंबी पोजिशन बनी हुई हैं, वहीं यूरो के पास नए सिरे से अनुबंध बनाने और सुधार करने का सबसे बड़ा अवसर मौजूद है।
सप्ताह के उत्तरार्ध में सोने के बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। शुक्रवार को यह पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से ठीक नीचे ठोस बढ़त के साथ कारोबार करती नजर आई। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट और अमेरिकी डॉलर पर बने नए बिकवाली दबाव ने सोने की इस तेजी को सहारा दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल की स्थिति
अन्य प्रमुख मुद्राओं में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी AUD/USD ने लगातार दूसरे दिन सकारात्मक रुख के साथ कारोबार किया। शुक्रवार के एशियाई सत्र में यह जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी आने से डॉलर के खरीदारों को झटका लगा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को गति मिली। इसके अतिरिक्त, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों ने देश में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी है, जिससे घरेलू मुद्रा मजबूत हुई है।
हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख और वैश्विक स्तर पर चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने अमेरिकी डॉलर के नुकसान को एक दायरे में समेट रखा है। इस मिले-जुले माहौल की वजह से AUD/USD की तेजी बहुत आगे नहीं निकल पा रही है और मुद्रा जोड़ी एक सीमित दायरे में ही बंधी हुई है। आने वाले सत्रों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और केंद्रीय बैंकों के कदम यह तय करेंगे कि मुद्रा बाजारों का यह विरोधाभास किस दिशा में सुलझता है।


















