अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं पर बिकवाली का दबाव गहराता जा रहा है। चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है और हाजिर भाव गिरकर 54.08 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है, जो पिछले सत्र के 57.42 डॉलर के मुकाबले 5.82 प्रतिशत की भारी कमजोरी दर्शाता है। वित्तीय बाजारों में सुरक्षित निवेश की मांग होने के बावजूद ऊर्जा बाजार में आई तेजी और तकनीकी स्तरों के टूटने से निवेशकों ने चांदी में अपनी पोजिशन तेजी से घटाई है। पिछले कुछ सत्रों से जारी गिरावट ने चांदी को इसके 2026 के निचले स्तर 54.77 डॉलर के भी नीचे धकेल दिया है, जिससे मंदड़ियों का रुख बाजार पर पूरी तरह हावी दिख रहा है।
तकनीकी संकेतकों में लगातार गहराती कमजोरी
चांदी के तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो XAG/USD एक स्पष्ट डाउनवर्ड चैनल के भीतर कारोबार कर रहा है। हालिया मूल्य कार्रवाई में 20 दिवसीय औसत की तुलना में ट्रेडिंग वॉल्यूम 12.95 गुना अधिक दर्ज किया गया, जो संस्थागत बिकवाली की पुष्टि करता है। 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI वर्तमान में 31 के स्तर पर स्थित है। यह स्तर बाजार में अत्यधिक दबाव का संकेत तो देता है, लेकिन अभी यह पूरी तरह ओवरसोल्ड सीमा में नहीं पहुंचा है, जिसका अर्थ है कि गिरावट का दायरा अभी और बढ़ सकता है।
मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD संकेतक नकारात्मक क्षेत्र में -2.01 पर बना हुआ है, जबकि इसकी सिग्नल लाइन -1.72 पर है। इसका हिस्टोग्राम -0.29 पर नकारात्मक बना हुआ है, जिससे स्पष्ट है कि किसी भी प्रकार की रिकवरी की कोशिश बेहद कमजोर साबित हो रही है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 59.03 डॉलर, 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 61.52 डॉलर और 200 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 67.23 डॉलर पर स्थित हैं। इसके अतिरिक्त 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज ने 200 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज को नीचे की ओर काट दिया है, जिसे तकनीकी विश्लेषक डेथ क्रॉस कहते हैं। यह संरचना दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति को पुष्ट करती है।
बोलिंजर बैंड्स के अध्ययन से पता चलता है कि मौजूदा भाव इसके निचले बैंड 54.57 डॉलर से भी नीचे फिसल चुका है, जबकि इसका मध्य बैंड 59.17 डॉलर और ऊपरी बैंड 63.78 डॉलर पर है। 14 दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स यानी ADX 31 के स्तर पर है, जो मौजूदा मंदी के ट्रेंड की मजबूती को दर्शाता है। स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर की फास्ट लाइन 0 और सिग्नल लाइन 23 पर दर्ज की गई है। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला 14 दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज 1.38 डॉलर पर है, जिसका उपयोग कारोबारी स्टॉप-लॉस निर्धारित करने के लिए बफर के रूप में कर रहे हैं।
अहम समर्थन और प्रतिरोध स्तर
कारोबारियों के लिए तात्कालिक धुरी बिंदु यानी पिवट स्तर 54.31 डॉलर पर स्थित है। यदि चांदी में और गिरावट आती है, तो पहला प्रमुख समर्थन स्तर S1 53.83 डॉलर पर है और इसके बाद दूसरा समर्थन स्तर S2 53.58 डॉलर पर मौजूद है। अगस्त के उच्च स्तरों से बने मंदी चैनल का निचला दायरा 53.65 डॉलर के आसपास देखा जा रहा है। पिछले सप्ताह का निचला स्तर 55.10 डॉलर और वर्ष का निचला स्तर 54.77 डॉलर टूटने के बाद ये नए स्तर अब परीक्षण के दायरे में हैं। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी का न्यूनतम स्तर 45.85 डॉलर और उच्चतम स्तर 121.30 डॉलर रहा है।
दूसरी ओर, यदि कीमतों में किसी तकनीकी उछाल की स्थिति बनती है, तो पहला प्रतिरोध स्तर R1 54.56 डॉलर पर और दूसरा प्रतिरोध स्तर R2 55.04 डॉलर पर देखने को मिलेगा। ऊपरी दायरे में हालिया रेंज का शीर्ष 58.501 डॉलर पर तात्कालिक रुकावट का काम करेगा। इसके ऊपर उतरते चैनल की ऊपरी सीमा 60.35 डॉलर के करीब है, जो अक्टूबर की शुरुआत के 62.00 डॉलर के उच्च स्तर से पहले एक मजबूत अवरोध बनी हुई है। 20 दिनों का व्यापक प्रतिरोध स्तर 64.25 डॉलर और 20 दिनों का आधार समर्थन स्तर 54.06 डॉलर के आसपास आंका गया है।
सऊदी तेल संयंत्र पर हमले से ऊर्जा बाजार में उबाल
बहुमूल्य धातुओं में आई इस उथल-पुथल की मुख्य वजहों में ऊर्जा बाजार का घटनाक्रम शामिल है। सऊदी अरब में अरामको के शैबाह तेल क्षेत्र पर ईरान समर्थित हूथियों द्वारा किए गए ड्रोन हमले के बाद भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। इस हमले में दो लोगों की जान चली गई और सऊदी तेल आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाएं फिर से जीवित हो गईं। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड की कीमतों में दो दिनों के भीतर 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई और यह 108.00 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जो मई के मध्य में देखे गए पांच महीने के उच्च स्तर 109.37 डॉलर के बेहद करीब है।
ऊर्जा कीमतों में आई इस अप्रत्याशित तेजी ने वैश्विक मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन लागत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सामान्यतः ऊर्जा संकट के समय निवेशक नकदी और डॉलर आधारित संपत्तियों की ओर झुकते हैं, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे चांदी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। क्रूड ऑयल में लगी आग ने जिंस बाजार के भीतर पूंजी के प्रवाह को भी बदल दिया है, जिससे कीमती धातुओं के निवेशक रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर हुए हैं।
मुद्रा बाजार और सोने की चाल का प्रभाव
विदेशी मुद्रा और बहुमूल्य धातुओं के अन्य वर्गों में भी मिली-जुली हलचल देखने को मिल रही है। सोना अपने मासिक निचले स्तर से संभलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह गुरुवार के यूरोपीय सत्र में 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे बना रहा। अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव देखा गया, क्योंकि फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि 27 और 28 अक्टूबर की आगामी बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कोई तात्कालिक हड़बड़ी नहीं है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से आई गिरावट ने डॉलर के खरीदारों को बैकफुट पर रखा, जिसने सोने को आंशिक सहारा प्रदान किया।
मुद्रा बाजार में AUD/USD एशियाई सत्र के दौरान 0.7000 के स्तर पर फिसल गया। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से जोखिम वाली संपत्तियों पर असर पड़ा, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों के सख्त बयानों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ समर्थन दिया। दूसरी ओर, USD/JPY गिरकर एक सप्ताह के निचले स्तर 157.00 के मध्य क्षेत्र में आ गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के साथ-साथ बैंक ऑफ जापान की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों के संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को मजबूती दी है।
औद्योगिक मांग और बुनियादी आर्थिक कारक
चांदी केवल एक निवेश धातु नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा आधुनिक उद्योगों में उपयोग होता है। चांदी की विद्युत चालकता सभी धातुओं में सबसे अधिक होती है, जो तांबे और सोने से भी श्रेष्ठ है। इसी कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। जब वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य में अनिश्चितता होती है या विनिर्माण क्षेत्र सुस्त पड़ता है, तो चांदी की औद्योगिक मांग पर सीधा असर पड़ता है। अमेरिका और चीन जैसे विशाल औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादन गतिविधियां चांदी की कीमतों को गहराई से प्रभावित करती हैं, जबकि भारत में आभूषण और घरेलू निवेश की मांग मूल्य निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सोने और चांदी का ऐतिहासिक अनुपात भी निवेशकों द्वारा बारीकी से देखा जाता है। यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने के बराबर मूल्य पाने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। निवेशक इसे दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन का पैमाना मानते हैं। चूंकि चांदी का खनन उत्पादन सोने की तुलना में कहीं अधिक होता है और रिसाइकिलिंग की दर भी इसे प्रभावित करती है, इसलिए औद्योगिक सुस्ती के दौर में यह सोने की तुलना में तेजी से नीचे गिरती है।
इक्विटी और डिजिटल संपत्तियों की स्थिति
जिंस बाजार की मंदी के विपरीत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी का माहौल रहा। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग 52,800 के स्तर पर बंद हुआ, जो सितंबर की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। इस सूचकांक की बढ़त में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्साह के अलावा गोल्डमैन सैक्स और कैटरपिलर के शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। स्पेसएक्स द्वारा 161 प्रतिशत राजस्व वृद्धि की सूचना के बाद नैस्डैक कंपोजिट में भी 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन 0.081 डॉलर के नीचे दबाव में बना रहा। सेंटिमेंट के आंकड़ों से टोकन के संचय के संकेत मिले और डॉगकॉइन लैब्स तथा डॉगकॉइन फाउंडेशन के बीच हुई साझेदारी की घोषणा ने हल्का सकारात्मक माहौल बनाया, लेकिन कमजोर मोमेंटम संकेतकों के कारण इसमें कोई बड़ा सुधार नहीं हो सका। कुल मिलाकर, वैश्विक बाजारों में वित्तीय संपत्तियों का प्रदर्शन काफी असमान बना हुआ है, जहां ऊर्जा और चुनिंदा शेयर मजबूत हैं, लेकिन चांदी तकनीकी रूप से गंभीर संकट का सामना कर रही है।



















