29 जून को कीमती धातुओं के बाजार में एक बार फिर बिकवाली का जोर रहा। MCX पर सोना 615 रुपये टूटकर 143547 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी 1203 रुपये की गिरावट के साथ 220201 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दोनों धातुओं पर यह दबाव लगातार दूसरे सप्ताह भी जारी रहा।
पिछले सत्र से कितना बड़ा अंतर
22 जून को सोना 144162 रुपये पर बंद हुआ था और चांदी का बंद भाव 221404 रुपये रहा था। आज की तेज गिरावट ने दोनों धातुओं को इन स्तरों से काफी नीचे धकेल दिया। खास बात यह है कि बिकवाली का यह सिलसिला सिर्फ एक दिन की बात नहीं, बल्कि पिछले कई कारोबारी सत्रों से लगातार बना हुआ है।
गिरावट की वजह क्या है
आज की गिरावट के लिए मुख्य रूप से दो बड़े कारण जिम्मेदार हैं। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसका असर सोने और चांदी पर नकारात्मक रूप से पड़ा। दूसरा और सीधा कारण है अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें आगे भी ऊंची बनाए रखने के संकेत। चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए जब दरें ऊंची होती हैं तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर चले जाते हैं, जिससे सोने की मांग कमजोर पड़ जाती है।
विशेषज्ञ की राय
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने बताया कि पिछले हफ्ते पूरे सप्ताह सोने पर बिकवाली का दबाव बना रहा और हफ्ते के अंत तक इसमें करीब 2% की गिरावट दर्ज हुई। उनके मुताबिक, मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते सोने समेत तमाम कीमती धातुओं पर दबाव लगातार बना रहा, जिसकी वजह से कीमतें लगातार दूसरे सप्ताह भी नीचे आईं।
लोग पुराना सोना तेजी से क्यों बेच रहे हैं
देशभर में एक नया और दिलचस्प रुझान सामने आ रहा है। बड़ी संख्या में लोग अपने पुराने सोने के गहने बाजार में बेचने लगे हैं। इसके पीछे मुख्य सोच यह है कि बहुत से निवेशक और आम परिवार यह मान रहे हैं कि सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं और अब आने वाले दिनों में इनमें गिरावट आ सकती है। ऐसे में लोग अभी के ऊंचे दाम का फायदा उठाते हुए पुराने गहने बेचने का मौका नहीं गंवाना चाहते।
IBJA के आंकड़े दे रहे हैं गवाही
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़े इस रुझान की पुष्टि करते हैं। अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान देशभर में करीब 50 टन पुराना सोना बिका। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 43% ज्यादा है। यानी सोना बेचने वालों की संख्या में इस साल जबरदस्त उछाल आया है, जो बताता है कि लोगों में कीमतें गिरने का डर साफ दिख रहा है।
गोल्ड लोन धारकों पर भी पड़ रहा है बोझ
पिछले पांच महीनों में सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर अब गोल्ड लोन लेने वालों पर भी दिखने लगा है। खासकर जिन लोगों ने बुलेट रीपेमेंट गोल्ड लोन लिया है, यानी जिन्हें पूरी रकम और ब्याज एकमुश्त चुकानी होती है, उन्हें मार्जिन कॉल की परेशानी झेलनी पड़ रही है। दूसरी तरफ, जिन लोगों के गोल्ड लोन में हर महीने नियमित EMI या किस्तें जमा होती हैं, उन पर फिलहाल इसका असर अपेक्षाकृत कम देखा गया है।
जनवरी के रिकॉर्ड से 22% तक की गिरावट
घरेलू बाजार में सोने की कीमतें जनवरी के आखिरी हफ्ते में बने अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से अब तक करीब 22% नीचे आ चुकी हैं। इससे पहले मार्च में पश्चिम एशिया में भड़के तनाव के दौरान भी सोना करीब 15% तक गिर गया था। उसके बाद कुछ समय के लिए कीमतें एक सीमित दायरे में टिकी रहीं, लेकिन जैसे ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने के संकेत सामने आए, बाजार में एक बार फिर सोने पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।













