सोमवार, 27 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार के सतर्क रुख के साथ कारोबार की शुरुआत करने की संभावना है। निवेशक इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और पहली तिमाही यानी Q1 FY27 के जारी होने वाले वित्तीय परिणामों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और रुपये में कमजोरी का दौर निकट भविष्य में बाजार के सेंटिमेंट पर असर डालता रहेगा। पिछले हफ्ते के आखिरी सत्र में भारी गिरावट दर्ज करने के बाद, सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही सूचकांक वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू कंपनियों के नतीजों के बीच उतार-चढ़ाव के दायरे में रह सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों का प्रभाव
बाजार के जानकारों के मुताबिक, भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता ब्रेंट क्रूड ऑयल के दामों में आई तेज उछाल है। इस बढ़ोतरी से देश में महंगाई बढ़ने की आशंका और आयात बिल में इजाफा होने का खतरा गहरा गया है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं, जिससे रुपये और निवेशकों के भरोसे पर दबाव पड़ रहा है। ईरान द्वारा अमेरिकी समर्थन वाले अस्थायी संघर्षविराम प्रस्ताव को ठुकराए जाने से होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में लंबे समय तक आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे ऊर्जा बाजार असहज स्थिति में है।
दूसरी ओर, बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च पवित्रो मुखर्जी का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति साफ नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रवाह अनिश्चित बना रह सकता है। निवेशकों का विश्वास बहाल करने और इक्विटी बाजारों के दृष्टिकोण में सुधार लाने के लिए यह स्थिरता बेहद जरूरी है। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे भी बाजार का ध्यान आकर्षित करते रहेंगे। इन कॉर्पोरेट परिणामों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के चुनिंदा शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।
निफ्टी 50 के तकनीकी आंकड़े और समर्थन स्तर
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि पिछले सप्ताह एक अहम समर्थन स्तर के नीचे फिसलने के बाद निफ्टी 50 पर बिकवाली का दबाव बरकरार है। पिछले हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में 2.33 प्रतिशत की गिरावट आई थी और यह महत्वपूर्ण 23,800 के स्तर से नीचे बंद हुआ था, जो पिछले लगभग छह सप्ताह से एक मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ था। इस स्तर के टूटने से शॉर्ट-टर्म तकनीकी ढांचा कमजोर हुआ है और यदि बिकवाली का रुख जारी रहता है, तो इसमें और गिरावट आने की आशंका बढ़ गई है।
मास्टर कैपिटल Services लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह के अनुसार, सूचकांक के लिए तात्कालिक समर्थन अब 23,600 के स्तर पर है और यदि यह इस सीमा से नीचे फिसलता है, तो बिकवाली तेज होकर 23,300 तक जा सकती है। ऊपरी स्तर पर 24,000 का आंकड़ा एक बड़ी बाधा बना हुआ है, जो 21 दिन और 55 दिन के ईएमए के साथ मेल खाता है। जब तक सूचकांक इस दायरे को वापस नहीं हासिल कर लेता, तब तक हर तेजी पर बिकवाली की रणनीति अपनाना ही बेहतर विकल्प माना जा रहा है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आज के सत्र के लिए 23,600 का स्तर सबसे अहम सपोर्ट रहेगा, जबकि 24,000 का स्तर तुरंत रेजिस्टेंस के रूप में काम करेगा।
बैंक निफ्टी का हाल और महत्वपूर्ण स्तर
बैंक निफ्टी ने भी पिछले सप्ताह भारी दबाव का सामना किया और कई प्रमुख निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वित्तीय परिणाम आने के बाद इसमें 3.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग सूचकांक अब 21-दिन और 55-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज दोनों से नीचे लुढ़क चुका है, जो इसके कमजोर होते अल्पकालिक रुझान को दर्शाता है। साथ ही, यह पिछले लगभग सात हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ है।
मास्टर कैपिटल Services लिमिटेड के एक्सपर्ट सिंह का कहना है कि तात्कालिक समर्थन 56,000 से 56,100 के दायरे में है, जो 21 हफ्ते के ईएमए के करीब है। यदि सूचकांक इस सपोर्ट से नीचे निर्णायक रूप से टूटता है, तो इसमें 55,500 तक की लंबी गिरावट आ सकती है। दूसरी तरफ, 57,300 का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है और जब तक इंडेक्स इसके ऊपर नहीं निकलता, तब तक हर उछाल पर बिकवाली करने की ही सलाह दी जा रही है।
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