कोलंबस डे पर अमेरिकी शेयर बाजार में सामान्य कामकाज, बॉन्ड मार्केट और सेटलमेंट पर पड़ेगा असरऑनलाइन कारोबार की मार से हरिद्वार का ऐतिहासिक कटहरा बाजार खाली, कारोबारियों की बिक्री 90 फीसदी घटीट्रिपलआईटी जबलपुर से निकलीं समृद्धि शर्मा कैसे बनीं गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जानिए उनकी कामयाबी का मंत्रराजस्थान में मांडलगढ़ बना बागवानी का नया केंद्र, टेक्सटाइल नगरी भीलवाड़ा अब कहलाई मिनी नागपुरखैरथल-तिजारा में पूर्व फौजी की संदिग्ध मौत से बवाल, जमीन विवाद में हत्या का आरोप लगाकर सड़क पर उतरे ग्रामीणसब्जी काटने के बाद न फेंकें लौकी के छिलके, आलू संग बनाएं यह लाजवाब और क्रिस्पी भुजियाऋषिकेश में टूटी सड़कों और जाम से स्थानीय लोग परेशान, बुनियादी सुविधाओं की मांग उठीशारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा और 13 अक्टूबर का संपूर्ण पंचांगअमेरिकी डॉलर के सामने 0.7000 पर थमी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त, वैश्विक करेंसी बाजारों में मिला-जुला रुखअक्टूबर के पावन पर्व पर दो दफा आकार लेगा दुर्लभ गजकेसरी योग, चार राशियों को मिलेंगे बड़े वित्तीय व करियर लाभ
फ्रांसीसी कर्ज संकट के बीच यूरो और स्विस फ्रैंक में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में हलचलबाज़ार
12 अक्तू॰ 2026, 5:37 pm (39 मिनट पहले)· 0

फ्रांसीसी कर्ज संकट के बीच यूरो और स्विस फ्रैंक में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में हलचल

यूरो और स्विस फ्रैंक की विनिमय दर में फ्रांसीसी बॉन्ड स्प्रेड के दबाव के बाद ठहराव देखा जा रहा है, जबकि डॉलर, सोना और अन्य परिसंपत्तियों में मिलाजुला रुख बना हुआ है।

यूरोपीय वित्तीय बाजारों में सरकारी बॉन्ड प्रतिफल और ब्याज दरों की भविष्य की दिशा को लेकर अनिश्चितता गहरा गई है। फ्रांस के सरकारी कर्ज को लेकर सामने आई चिंताओं के कारण हाल के दिनों में यूरो के मुकाबले स्विस फ्रैंक में भारी मजबूती दर्ज की गई थी, जिसके बाद अब यूरो और स्विस फ्रैंक (EUR/CHF) विनिमय दर में एक सीमित दायरे में ठहराव देखने को मिल रहा है। इस तेज गिरावट ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा नीतिगत दरों में और सख्ती किए जाने की संभावनाओं पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

यूरो और स्विस फ्रैंक के लिए तकनीकी स्तर तथा बॉन्ड स्प्रेड

वित्तीय विश्लेषक क्रिस टर्नर के अनुसार, लगभग एक सप्ताह पहले आई भारी गिरावट के बाद EUR/CHF मुद्रा जोड़ी फिलहाल संभलने की कोशिश कर रही है। फ्रांसीसी कर्ज से जुड़ी समस्याएं इतनी गंभीर थीं कि उन्होंने यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त नीतिगत फैसलों की उम्मीदों को सीमित कर दिया। हालांकि, जब तक ऊर्जा कीमतों में कोई तेज गिरावट दर्ज नहीं की जाती, तब तक छोटी अवधि के यूरो दरों में यहां से और अधिक गिरावट आना स्पष्ट नहीं दिख रहा है।

ये भी पढ़ें

वर्तमान में ब्याज दर बाजार दिसंबर के लिए 22 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा है, जबकि कुछ अनुमान 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हैं। इसके अलावा अगले वर्ष तक 30 से 40 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त नीतिगत सख्ती की संभावना जताई जा रही है। संस्थागत दृष्टिकोण से 2027 की यूरोपीय सेंट्रल बैंक दरों में वृद्धि की संभावना को पूरी तरह खारिज करना अभी जल्दबाजी होगी।

यदि फ्रांस के सरकारी बॉन्ड और जर्मनी के बॉन्ड (ओएटी-बुंड) के बीच का स्प्रेड निर्णायक रूप से 150 बेसिस पॉइंट के स्तर को पार कर जाता है, तो EUR/CHF में 0.9230 से 0.9250 के दायरे तक का सुधार देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत, यदि बाजार में कुछ समय के लिए शांति और स्थिरता लौटती है, तो यह मुद्रा जोड़ी दोबारा 0.9350 से 0.9400 के स्तर की ओर बढ़ सकती है।

अमेरिकी डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर छुट्टी का असर

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी उठापटक जारी है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) ने अपने मामूली मंदी वाले अंतर को पाट दिया, लेकिन यह मुद्रा जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही बनी रही। बाजार में सार्वजनिक अवकाश के कारण नकदी और तरलता काफी सीमित रही, जिससे सौदों की संख्या कम दर्ज की गई।

अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से थोड़ा पीछे हटी है, इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर ने निचले स्तरों से उबरने का प्रयास किया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित हो गई। इसके साथ ही, नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में एक और वृद्धि किए जाने की घटती संभावनाओं ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बनाए रखा है।

जापानी येन और संभावित सरकारी दखल की अटकलें

अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) का कारोबार नए कारोबारी सप्ताह में भी एक सीमित दायरे में बना हुआ है और यह 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर टिका हुआ है। जापानी मुद्रा के समर्थन में सरकारी अधिकारियों और केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की अटकलों के कारण बाजार के प्रतिभागी बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं।

अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई नरमी ने डॉलर खरीदारों को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है, जिससे इस जोड़ी में ऊपरी स्तरों पर रुकावट देखी जा रही है। हालांकि, जापान और अमेरिका दोनों जगह छुट्टियों के कारण तरलता कम रही। इसके बावजूद वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की गिरावट सीमित रहने की संभावना है।

सोने की कीमतों में गिरावट और तकनीकी दबाव

कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में एक सप्ताह के उच्चतम स्तर से दिन के दौरान बिकवाली देखी गई। यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में सोने का भाव फिसलकर लगभग $4,170 प्रति औंस के नए दैनिक निचले स्तर तक पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में मामूली गिरावट के बाद एक बार फिर नए खरीदारों का प्रवेश देखा गया, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत रुख है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के संकेतों ने बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम किया है, जिसका सीधा असर सोने की मांग पर पड़ा है। डॉलर में आई मजबूती और केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख ने सर्राफा बाजार में मुनाफावसूली को गति दी है।

क्रिप्टो बाजार में पाई नेटवर्क पर दबाव

डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र में पाई नेटवर्क (PI) सोमवार को लाल निशान में कारोबार करता दिखा और बिकवाली के भारी दबाव के बीच यह $0.0800 के स्तर के आसपास मंडरा रहा है। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चाओं के बावजूद इस टोकन की सट्टा मांग में लगातार कमी देखी जा रही है।

खुले सौदों की कुल संख्या यानी ओपन इंटरेस्ट $9 मिलियन से नीचे बना हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि निवेशकों के बीच चर्चा घबराहट और अनिश्चितता से प्रेरित है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार पीआई टोकन के लिए मंदी का रुख बना हुआ है और इसके $0.0800 के प्रमुख समर्थन स्तर से नीचे टूटने का स्पष्ट जोखिम नजर आ रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को मिली राहत

घरेलू बाजार में भारतीय रुपया (INR) सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय तेजी के साथ खुला और इसने अपनी बढ़त को 95.80 के करीब बनाए रखा। भारतीय मुद्रा को मजबूती प्रदान करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अमेरिकी डॉलर की मांग को रोकने के उद्देश्य से नए कदम उठाए हैं।

केंद्रीय बैंक के इन ताजा उपायों ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की अत्यधिक खरीदारी पर लगाम लगाई है, जिससे रुपये को आवश्यक राहत मिली है और यह हालिया दबाव से उबरने में सफल रहा है। आयातकों की ओर से डॉलर की मांग कम होने और केंद्रीय बैंक की सक्रियता से रुपये को स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

फ्रांस के कर्ज संकट का यूरो और स्विस फ्रैंक पर क्या असर पड़ा है?
फ्रांस के सरकारी कर्ज संकट की वजह से यूरो पर दबाव बना और EUR/CHF मुद्रा जोड़ी में तेज गिरावट आई, जिसके बाद अब यह 0.9230 से 0.9400 के संभावित दायरे में संभलने की कोशिश कर रही है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक से ब्याज दरों पर बाजार को क्या उम्मीदें हैं?
बाजार वर्तमान में दिसंबर के लिए 22 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, जबकि अगले साल तक 30 से 40 बेसिस पॉइंट की और वृद्धि का अनुमान है।
सोने की कीमतों में हालिया गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के कारण डॉलर में लौटी मजबूती ने बिना ब्याज देने वाले सोने के भाव को $4,170 के दैनिक निचले स्तर तक धकेल दिया।
भारतीय रुपये को डॉलर के मुकाबले कैसे सहारा मिला?
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए नए कदमों की बदौलत रुपया मजबूत हुआ और 95.80 के स्तर के पास टिक गया।
पाई नेटवर्क क्रिप्टोकरेंसी में क्या रुझान देखने को मिल रहा है?
पाई नेटवर्क का ओपन इंटरेस्ट $9 मिलियन से नीचे गिर गया है और भारी बिकवाली के बीच यह टोकन $0.0800 के समर्थन स्तर के पास मंदी के रुख में कारोबार कर रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp