यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो पर अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में भारी दबाव देखा जा रहा है, विशेषकर कैनेडियन डॉलर के मुकाबले इसमें उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई है। फ्रांस के भीतर गहराते राजनीतिक गतिरोध और व्यापक स्तर पर भड़के सामाजिक असंतोष ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह हिला दिया है। इस राजनीतिक अनिश्चितता के कारण वित्तीय बाजारों में इस बात की गंभीर आशंका गहराने लगी है कि फ्रांसीसी वित्तीय संकट का असर पूरे यूरोज़ोन में फैल सकता है। दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने कमोडिटी आधारित मुद्राओं, विशेष रूप से कैनेडियन डॉलर को काफी मजबूती दी है, जिससे EUR/CAD क्रॉस पर गिरावट का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
फ्रांस के राजकोषीय संकट और बॉन्ड यील्ड में अभूतपूर्व उछाल
यूरोपीय संप्रभु बॉन्ड बाजार में फ्रांसीसी वित्तीय स्थिति को लेकर फैली चिंताएं अब खुलकर सामने आ रही हैं। एचएसबीसी एसेट मैनेजमेंट के अनुसार, फ्रांस के 10-वर्षीय ओएटी (OAT) और जर्मनी के 10-वर्षीय बुंड (Bund) के बीच का यील्ड स्प्रेड बढ़कर पिछले 15 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। संप्रभु ऋण बाजार में यह बढ़ता अंतर स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वैश्विक निवेशक फ्रांस के राजकोषीय रास्ते और वहां के डांवाडोल राजनीतिक माहौल को लेकर भारी जोखिम महसूस कर रहे हैं। फ्रांस में सरकार बनाने या बजट पास कराने को लेकर बना गतिरोध और जनता के सड़क पर उतरने से पैदा हुआ अविश्वास यूरोज़ोन की साझा मुद्रा को नीचे की ओर धकेल रहा है।
पश्चिम एशिया में तेल ठिकानों पर हमले और कच्चे तेल की मजबूती
ऊर्जा बाजारों में लौटी तेजी के कारण कैनेडियन डॉलर को मजबूत आधार मिल रहा है। रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए सिलसिलेवार हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के संकेत दिखाई दिए हैं। इनमें एक हमला रविवार को हुआ, जो उस पूर्व हमले के बाद सामने आया जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा के इस बढ़ते चक्र ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई में सऊदी अरब का साथ देने पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति के सामने पैदा हुए संकट को सप्ताहांत में हुई एक अन्य घटना ने और बढ़ा दिया, जब रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक बाहर, ओमान के सोहार लंगरगाह के निकट एक तेल टैंकर को ड्रोन द्वारा निशाना बनाया गया। यद्यपि फारस की खाड़ी से हाल के दिनों में कच्चे तेल के निर्यात में वृद्धि के संकेत मिले थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेल शिपिंग मार्गों पर लगातार मंडराते इन भू-राजनीतिक खतरों ने आपूर्ति श्रृंखला की नाजुकता को उजागर कर दिया है। तेल आपूर्ति में संभावित बाधा की यही चिंता वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को लगातार समर्थन दे रही है, जिससे तेल निर्यातक देश कनाडा की मुद्रा को सीधा लाभ मिल रहा है।
कनाडा की स्वतंत्र व्यापार नीति और घरेलू अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
कैनेडियन डॉलर की चाल को समझने के लिए देश के व्यापक व्यापारिक परिदृश्य को भी देखना जरूरी है। राबोबैंक के विश्लेषकों ने इस बात को रेखांकित किया है कि व्यापार निर्णयों में पूर्ण संप्रभुता को प्राथमिकता देने का कनाडा का फैसला अब उसकी वास्तविक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर दिखा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि कनाडा ने अधिक निकट समन्वय के अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। यह एक ऐसा रणनीतिक कदम साबित हुआ है जिसकी भारी कीमत कनाडाई निर्यातकों को चुकानी पड़ी है, जो पारंपरिक रूप से अपने कुल उत्पादों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अमेरिकी बाजार में भेजते रहे हैं। व्यापारिक समीकरणों में आए इस बदलाव के बावजूद मौजूदा दौर में ऊर्जा कीमतों में उछाल ने मुद्रा को तात्कालिक सहारा दिया है।
वित्तीय बाजारों में 'रिस्क-ऑन' बनाम 'रिस्क-ऑफ' का गणित
वैश्विक मुद्रा और परिसंपत्ति बाजारों की दिशा को निर्धारित करने में दो प्रमुख अवधारणाएं काम करती हैं, जिन्हें 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' कहा जाता है। वित्तीय शब्दावली में ये शब्द इस बात को दर्शाते हैं कि किसी विशेष समय में निवेशक कितना वित्तीय जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं। जब बाजार में रिस्क-ऑन का माहौल होता है, तो निवेशक आर्थिक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और अधिक मुनाफा कमाने के लिए जोखिम भरी संपत्तियों में पूंजी लगाने को तत्पर रहते हैं। इसके विपरीत, जब बाजार रिस्क-ऑफ की स्थिति में आता है, तो निवेशक बेहद सतर्क होकर सुरक्षित संपत्तियों की तरफ भागते हैं, ताकि उनका मूलधन सुरक्षित रहे, भले ही उन पर मिलने वाला रिटर्न अपेक्षाकृत सीमित हो।
रिस्क-ऑन के दौर में आमतौर पर शेयर बाजारों में तेजी आती है और सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटी संपत्तियों के भाव बढ़ते हैं क्योंकि आर्थिक विकास की मजबूत संभावनाएं कच्चे माल की मांग को बढ़ाती हैं। भारी मात्रा में कमोडिटी निर्यात करने वाले देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं और क्रिप्टोकरेंसी परिसंपत्तियों में भी तेजी देखी जाती है। दूसरी ओर, रिस्क-ऑफ के दौर में निवेशक प्रमुख सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाते हैं, जिससे बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं। ऐसे समय में सोना चमकता है और सुरक्षित पनाहगाह मानी जाने वाली पारंपरिक मुद्राएं जैसे जापानी येन, स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर मजबूत होते हैं।
विभिन्न वैश्विक मुद्राओं पर बाजार धारणा का असर
विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं की प्रकृति के कारण उनकी मुद्राओं का व्यवहार जोखिम धारणा के अनुरूप अलग-अलग होता है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी मुद्राएं रिस्क-ऑन बाजार में ऊपर चढ़ती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक विस्तार और विकास के लिए कमोडिटी निर्यात पर अत्यधिक निर्भर हैं। आर्थिक गतिविधियों के तेज होने की उम्मीद में जब भविष्य में कच्चे माल की मांग बढ़ती है, तो ये मुद्राएं स्वाभाविक रूप से मजबूत होती हैं।
इसके विपरीत, जब बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल होता है, यानी रिस्क-ऑफ की स्थिति बनती है, तो तीन प्रमुख मुद्राएं सबसे ज्यादा लाभ कमाती हैं: अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF)। अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा है, और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते अमेरिका के डिफॉल्ट करने की संभावना न के बराबर मानी जाती है। जापानी येन को इसलिए सहारा मिलता है क्योंकि जापानी सरकारी बॉन्ड का एक बहुत बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास है, जो किसी वैश्विक संकट के समय भी उन्हें बाजार में नहीं फेंकते। वहीं स्विस फ्रैंक की मजबूती का कारण स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून हैं, जो निवेशकों को अपनी पूंजी की सुरक्षा का मजबूत भरोसा देते हैं।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों की ताजा बाजार स्थिति
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों के अन्य क्षेत्रों में भी इस समय सतर्कता भरा रुख देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी ने सोमवार को एक मामूली मंदी भरे अंतर को पाटने का प्रयास किया, लेकिन एशियाई कारोबारी सत्र में छुट्टी के कारण कम लिक्विडिटी के बीच यह 0.7000 के स्तर से नीचे ही बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई वर्षों के उच्चतम स्तर से फिसलने के बावजूद डॉलर ने वापसी की कोशिश की, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रही। इसके अतिरिक्त, नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की घटती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बनाए रखा है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) सीमित दायरे में कारोबार करते हुए नए कारोबारी हफ्ते में 158.00 के स्तर से ऊपर बना रहा। बाजार में इस बात की तेज अटकलें हैं कि जापानी अधिकारी गिरते येन को सहारा देने के लिए बाजार में दखल दे सकते हैं, जिससे खरीदार सतर्क बने हुए हैं। अमेरिकी यील्ड में नरमी ने डॉलर की बढ़त पर अंकुश लगाया है, हालांकि जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार में लिक्विडिटी काफी कम रही।
कमोडिटी बाजार में सोने ने यूरोपीय सत्र की शुरुआत में अपनी एक हफ्ते की ऊंचाई से फिसलते हुए लगभग 4,170 डॉलर प्रति औंस का नया दैनिक निचला स्तर छुआ। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के कारण डॉलर को मिले नए खरीदारों ने बिना ब्याज देने वाली इस पीली धातु पर दबाव बनाया। डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र में पाई नेटवर्क (Pi Network) सोमवार को बिकवाली के दबाव में रहा और 0.0800 डॉलर के स्तर के ठीक ऊपर कारोबार करता दिखा। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चाओं के बावजूद ओपन इंटरेस्ट घटकर 9 मिलियन डॉलर से नीचे आ गया, जो निवेशकों में घबराहट का संकेत देता है। वहीं घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए नए कदमों के बाद भारतीय रुपया (INR) सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज बढ़त के साथ खुला और 95.80 के करीब अपनी रिकवरी को बरकरार रखने में सफल रहा।
















