थाईलैंड की आर्थिक ढाल कागज़ों पर अब भी मजबूत दिखती है, लेकिन जिस बाहरी कवच के दम पर उसकी करेंसी को अब तक सहारा मिलता रहा, वह अब पतला पड़ने लगा है। यूओबी के विश्लेषकों के मुताबिक देश के मैक्रो बफर अब भी भरोसेमंद हैं, फिर भी हालात की दिशा पहले जितनी अनुकूल नहीं रही। यही बदलाव अब करंट अकाउंट, कीमतों और बाट के रोज़मर्रा के प्रदर्शन में साफ नज़र आने लगा है।
महंगाई फिर लौटी सकारात्मक दायरे में
लंबे समय तक नरम या नकारात्मक रहने के बाद कीमतें दोबारा सकारात्मक दायरे में आ गई हैं, और यह वापसी तेज़ी से हुई है। अप्रैल और मई में हेडलाइन उपभोक्ता महंगाई सालाना आधार पर करीब 2.8 से 2.9 प्रतिशत के आसपास रही। इसके साथ ही उत्पादक स्तर पर, यानी थोक और फैक्ट्री गेट कीमतों पर, दबाव अब भी ऊंचा बना हुआ है। इसका मतलब है कि महंगाई का जोखिम अब पूरी तरह टला नहीं है, बल्कि नीचे से ऊपर की ओर बढ़ता दिख रहा है।
घाटे की वजह कमजोर निर्यात नहीं, बढ़ता आयात है
अप्रैल और मई में थाईलैंड को करंट अकाउंट घाटे का सामना करना पड़ा, लेकिन इसकी जड़ में निर्यात का ढहना नहीं है। असल वजह आयात में आया तेज़ उछाल है। खासकर ऊर्जा, कच्चे माल, इंटरमीडिएट गुड्स और कैपिटल गुड्स के आयात में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। यानी देश बाहर से सामान बेच भी खूब रहा है, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा तेज़ी से बाहर से सामान खरीद भी रहा है, और इसी असंतुलन ने खाते को घाटे में धकेल दिया।
भंडार ऊंचा, पर पहले जैसा सुकून नहीं
राहत की बात यह है कि आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार अब भी ऊंचे स्तर पर है और देश की बाहरी स्थिति मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि अप्रैल और मई के करंट अकाउंट घाटे को अभी बैलेंस ऑफ पेमेंट्स का संकट नहीं माना जा रहा। भंडार पर्याप्त है और बाहरी कर्ज़ से जुड़े आंकड़े संभलने लायक हैं। इसके बावजूद एक बात साफ है कि करंट अकाउंट अब वैसा सहारा नहीं दे रहा जैसा उसने इसी साल की शुरुआत में दिया था। बाहरी कुशन पहले जितना उदार नहीं रहा।
मजबूत व्यापार से आम लोगों तक फायदा क्यों नहीं पहुंच रहा
यहीं एक अहम पेच छिपा है। मजबूत निर्यात के साथ साथ ऊर्जा, कच्चे माल, इंटरमीडिएट गुड्स और कैपिटल गुड्स के आयात में भी उतनी ही मजबूती है। इससे निर्यात में आई तेज़ी के साथ जुड़ने वाला घरेलू वैल्यू एडेड मल्टीप्लायर घट जाता है। सीधे शब्दों में, व्यापार के आंकड़े भले चमकदार दिखें, लेकिन उनका पूरा फायदा घरेलू अर्थव्यवस्था में नहीं टिकता। यही कारण है कि हेडलाइन ट्रेड की यह मजबूती न तो पूरी तरह घरेलू आय में बदल रही है, न एसएमई यानी छोटे और मंझोले कारोबारों की कमाई में, और न ही व्यापक मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में।
बाट के लिए आगे का रास्ता
बाज़ार के लिहाज़ से देखें तो थाईलैंड के ढांचागत बाहरी बफर बाट को सहारा देते रहेंगे। लेकिन नज़दीकी अवधि में करेंसी का प्रदर्शन कई बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशील बना रहेगा। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड को लेकर बाज़ार की उम्मीदें और हर महीने आने वाले करंट अकाउंट के आंकड़े सबसे अहम रहेंगे। यानी बुनियादी मजबूती के बावजूद बाट का उतार चढ़ाव फिलहाल इन्हीं संकेतों पर टिका रहेगा।













