थाईलैंड में ब्याज दरें फिलहाल लंबे समय तक जस की तस बनी रह सकती हैं। डीबीएस ग्रुप रिसर्च के अर्थशास्त्री चुआ हान टेंग का अनुमान है कि बैंक ऑफ थाईलैंड (BoT) अपनी पॉलिसी दर को 2026 तक 1.00 फीसदी पर ही टिकाए रखेगा। यह अनुमान केंद्रीय बैंक के लगातार दूसरी बार दरों में कोई बदलाव न करने के फैसले के बाद आया है।
कमजोर रिकवरी को सहारा देने की कोशिश
दरें न बदलने के पीछे सोच साफ है। बैंक ऑफ थाईलैंड चाहता है कि अर्थव्यवस्था की लड़खड़ाती रिकवरी को सहारा मिलता रहे, और वह उस महंगाई को नजरअंदाज करने को तैयार है जिसे वह अस्थायी और सप्लाई से जुड़ी मानता है, न कि असली मांग से पैदा हुई। ग्रोथ के अनुमानों में मामूली बदलाव किया गया है, जबकि उम्मीद है कि आगे चलकर महंगाई दोबारा केंद्रीय बैंक के तय दायरे की ओर लौट आएगी।
चुआ के मुताबिक केंद्रीय बैंक इस समय दो दबावों के बीच फंसा है। उनका कहना है, "एक तरफ बैंक ऑफ थाईलैंड का आकलन है कि नरम मौद्रिक नीति आर्थिक रिकवरी को सहारा दे रही है, जिससे बढ़ती महंगाई के बीच ब्याज दरें और घटाने की कोई खास वजह नहीं दिखती। दूसरी तरफ नीति-निर्माता सप्लाई से जुड़े इस अस्थायी महंगाई के दबाव को नजरअंदाज करेंगे और ब्याज दरें बढ़ाने से बचेंगे।"
थाई बाहत में गिरावट की असल वजह
केंद्रीय बैंक का मानना है कि हाल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थाई बाहत में आई कमजोरी की असल वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में आया बदलाव है, न कि थाईलैंड या उसके पड़ोसी देशों की मुद्राओं से जुड़ा कोई अलग कारण। चुआ ने आगे कहा, "यह कमजोरी काफी मजबूत स्तरों से आई है और बाहरी मोर्चे की स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है, जो पर्यटन को सहारा दे सकती है और छोटे निर्यातकों के लिए वित्तीय हालात आसान बना सकती है।"
आगे क्या
कुल मिलाकर तस्वीर यही बनती है कि बैंक ऑफ थाईलैंड न तो दरें घटाने की जल्दी में है और न ही बढ़ाने की। उसका पूरा जोर अधूरी और असमान रिकवरी को थामे रखने पर है, और जब तक महंगाई का मौजूदा दबाव अस्थायी दिखता रहेगा, दरें इसी स्तर पर ठहरी रहने के आसार हैं।













