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अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मध्य पूर्व में तनाव के बीच सोने की कीमतों पर दबाव, 4150 डॉलर के करीब फिसली धातुबाज़ार
17 अक्तू॰ 2026, 10:03 am (1 घंटे पहले)· 1

अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मध्य पूर्व में तनाव के बीच सोने की कीमतों पर दबाव, 4150 डॉलर के करीब फिसली धातु

ऊर्जा लागत से उपजी महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर रुख के बीच सोने की रफ्तार थमी है, जिससे वैश्विक सराफा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल एक बार फिर सुस्त पड़ती दिखाई दे रही है। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन की शुरुआत में कीमती धातु ने पिछले सत्र की बढ़त को गंवा दिया और यह 4,150 डॉलर प्रति औंस के स्तर के करीब फिसल गई। अमेरिकी डॉलर में आई ताजा मजबूती और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता ने सराफा खरीदारों के उत्साह को सीमित कर दिया है। निवेशक इस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के नीतिगत बयानों और ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई में आई तेजी ने इस आशंका को बल दिया है कि केंद्रीय बैंक इस साल उधार लेने की लागत में एक और बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे गैर-उपज वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ रहा है।

भू-राजनीतिक संकट और सुरक्षित निवेश का आकर्षण

मध्य पूर्व में गहराते सैन्य टकराव ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में जोखिम को बहुत बढ़ा दिया है। यमन के दक्षिणी शहर अदन में सऊदी अरब समर्थित और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के ठिकाने प्रेसिडेंशियल पैलेस पर ईरान समर्थित हूती समूह ने जानलेवा मिसाइल हमला किया है। इस घातक हमले ने क्षेत्रीय स्थिरता को बड़ा झटका दिया है। इसके तुरंत बाद फ्रांस के विदेश मंत्री पास्कल कॉन्फाव्रो ने इस बात की औपचारिक पुष्टि की कि फ्रांस ने सऊदी अरब में अपनी सैन्य संपत्तियों और साजो-सामान की तैनाती शुरू कर दी है। पश्चिमी शक्तियों की इस सीधी भागीदारी ने इलाके में संघर्ष के व्यापक होने की आशंकाओं को गहरा कर दिया है।

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दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने ईरानी ऊर्जा बुनियादी ढांचे और संवेदनशील परमाणु ठिकानों के खिलाफ बड़े हमलों की सैन्य योजनाएं तैयार कर ली हैं। इन योजनाओं में अत्यंत शक्तिशाली मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स का उपयोग भी शामिल बताया गया है। आमतौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय सोने को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन वर्तमान हालात में अमेरिकी डॉलर भी एक मजबूत सुरक्षित विकल्प के रूप में उभरा है। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की तरफ बढ़ता आकर्षण सोने की चमक को सीमित कर रहा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर अधिकांश निवेशक इस अनिश्चितता के दौर में नकदी और डॉलर आधारित संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और ब्याज दरों का तंत्र

संयुक्त राज्य अमेरिका में मौद्रिक नीति का पूरा ढांचा फेडरल रिजर्व की नीतियों पर निर्भर करता है। फेडरल रिजर्व के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और रोजगार के अधिकतम अवसर सुनिश्चित करना शामिल है। इन दोहरे लक्ष्यों को साधने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों का समायोजन है। जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के दाम अत्यधिक तेजी से बढ़ते हैं और मुद्रास्फीति फेड के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तब बैंक नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करता है। उधार लेने की लागत बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार नियंत्रित होती है और मुद्रास्फीति नीचे आती है।

ब्याज दरों में यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा को अत्यधिक आकर्षक बनाती है। दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय निवेशक अधिक प्रतिफल हासिल करने के लिए अपनी पूंजी अमेरिकी परिसंपत्तियों में लगाते हैं, जिससे डॉलर का मूल्यांकन बढ़ता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति दो प्रतिशत से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाती है, तब फेडरल रिजर्व आर्थिक चक्र को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करता है। कर्ज सस्ता होने से उपभोग और व्यापारिक निवेश को प्रोत्साहन मिलता है, लेकिन इसका नकारात्मक असर अमेरिकी डॉलर के मूल्य पर पड़ता है। वर्तमान में ऊर्जा जनित महंगाई ने केंद्रीय बैंक के नीति नियंताओं को सख्त रुख अपनाने पर विवश किया है।

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की कार्यप्रणाली

अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत दिशा का निर्धारण फेडरल ओपन मार्केट कमेटी द्वारा किया जाता है। यह समिति साल भर में कुल आठ नियमित मौद्रिक बैठकों का आयोजन करती है, जहां अमेरिकी आर्थिक विकास, श्रम बाजार, वित्तीय तरलता और मूल्य स्थिरता की गहन समीक्षा की जाती है। इस महत्वपूर्ण समिति में कुल बारह मतदान अधिकारी शामिल होते हैं। इनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात स्थायी सदस्य और फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष हमेशा शामिल रहते हैं।

बाकी बचे ग्यारह क्षेत्रीय फेडरल रिजर्व बैंकों के अध्यक्षों में से चार अधिकारियों को एक-एक साल के चक्रीय आधार पर मतदान का अधिकार दिया जाता है। यह समिति समग्र आर्थिक आंकड़ों के आधार पर तय करती है कि वित्तीय तंत्र में पैसे की आपूर्ति को कड़ा किया जाए या फिर ढील दी जाए। इस समय फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉर्श की टिप्पणियों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। वॉर्श ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि वह भविष्य के ब्याज दर मार्ग पर कोई सीधा संकेत दिए बिना मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उनके इस गैर-प्रतिबद्ध बयान ने मुद्रा बाजारों और बॉन्ड यील्ड को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है।

क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का प्रभाव

अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकटों के समय फेडरल रिजर्व लीक से हटकर अपरंपरागत मौद्रिक नीतियां अपनाता है, जिन्हें क्वांटिटेटिव ईजिंग कहा जाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक संकटग्रस्त वित्तीय प्रणाली में नकदी और ऋण के प्रवाह को तेजी से बढ़ाता है। जब पारंपरिक ब्याज दर कटौतियां अप्रभावी हो जाती हैं या मुद्रास्फीति असामान्य रूप से कम हो जाती है, तब इसका सहारा लिया जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान इस आर्थिक हथियार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक नई मुद्रा जारी करता है और वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षित बॉन्ड खरीदता है, जिससे आमतौर पर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है।

इसके बिल्कुल उलट प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग कहा जाता है। इसमें केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है और अपनी बैलेंस शीट में परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का पुनर्निवेश नए बॉन्ड में नहीं करता। इस नीति के तहत बाजार से अतिरिक्त तरलता को धीरे-धीरे वापस खींचा जाता है। वित्तीय तंत्र में नकदी की उपलब्धता घटने से यह कदम अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मजबूती प्रदान करता है। वर्तमान में फेड की सख्त मौद्रिक संरचना और बॉन्ड यील्ड की स्थिरता सोने जैसी गैर-उपज वाली परिसंपत्ति के लिए बाधा बनी हुई है।

मुद्रा बाजार और डिजिटल संपत्तियों की स्थिति

डॉलर के उतार-चढ़ाव का सीधा असर अन्य वैश्विक मुद्राओं और डिजिटल टोकनों पर भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में शुक्रवार के एशियाई कारोबार के दौरान सुधार दर्ज किया गया और यह 0.6950 के स्तर की ओर चढ़ गई। फेड चेयरमैन की अनिर्णायक टिप्पणियों के कारण डॉलर पर आए क्षणिक बिकवाली के दबाव ने इस मुद्रा जोड़ी को सहारा दिया। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन की जोड़ी नए बिकवाली दबाव में आ गई और यह 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गई। ब्याज दरों के भविष्य को लेकर नीतिगत अनिश्चितता ने डॉलर की तेज बढ़त को रोका है।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला है। बिटकॉइन और एथेरियम ने शुक्रवार को अपने प्रमुख तकनीकी समर्थन स्तरों को किसी तरह बरकरार रखा है, जबकि रिपल का टोकन एक्सआरपी अपने महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर से नीचे संघर्ष करता नजर आया। लगातार ऊंची बनी हुई मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता को कमजोर किया है। तीनों प्रमुख डिजिटल मुद्राओं के गति संकेतक कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यदि प्रमुख समर्थन स्तर टूटे तो इन टोकनों में और गहरी गिरावट आ सकती है। व्यापक वित्तीय बाजार फिलहाल फेड की अगली चाल और भू-राजनीतिक घटनाओं के मोड़ का इंतजार कर रहा है।

सवाल-जवाब

सोने की कीमतों पर वर्तमान में दबाव क्यों देखा जा रहा है?
ऊर्जा लागत से उपजी महंगाई के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
एशियाई सत्र में सोना किस स्तर के करीब कारोबार कर रहा था?
सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन एशियाई सत्र के दौरान सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के स्तर के करीब फिसल गया।
मध्य पूर्व में कौन सी हालिया घटनाएं सामने आई हैं?
यमन के अदन में हूती मिसाइल हमला हुआ है, फ्रांस ने सऊदी अरब में सैन्य संपत्तियां तैनात की हैं और अमेरिका ने ईरानी ठिकानों के खिलाफ सैन्य हमले की योजनाएं बनाई हैं।
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने नीतिगत दरों पर क्या कहा?
केविन वॉर्श ने कहा कि वह मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य की ब्याज दरों के रास्ते पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन और एथेरियम का क्या रुख रहा?
बिटकॉइन और एथेरियम अपने प्रमुख समर्थन स्तरों के ऊपर बने रहे, जबकि रिपल का टोकन एक्सआरपी अपने प्रतिरोध स्तर से नीचे संघर्ष करता दिखा।
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