रांची के जेवीएम श्यामली के आठवीं कक्षा के छात्र अभिषेक ने एक अनूठा बर्निंग चेंबर मॉडल तैयार किया है, जो कचरे के प्रबंधन की दिशा में एक नया कदम साबित हो सकता है। खास बात यह है कि इस मॉडल को बनाने के लिए उन्होंने महज दो हफ्तों के भीतर चूहे पकड़ने वाली जाली का इस्तेमाल किया है। अपने इस मॉडल को विस्तार से समझाते हुए उन्होंने बताया कि यह तकनीक उद्योगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जहां बड़े पैमाने पर कचरा निकलता है। इस पूरी प्रक्रिया में कचरे को जलाकर उससे निकलने वाली ऊष्मा से ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
कचरे से बिजली और स्ट्रीट लाइट
बर्निंग चेंबर की कार्यप्रणाली के बारे में बताते हुए अभिषेक ने स्पष्ट किया कि इस मॉडल में सबसे पहले कचरे को जलाया जाता है, जिससे तीव्र हीट प्रोड्यूस होती है। इस उत्पन्न होने वाली ऊष्मा का उपयोग बैटरी को चार्ज करने के लिए किया जाता है, जिसकी मदद से सड़कों पर लगाई जाने वाली स्ट्रीट लाइट को रोशन किया जा सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने स्ट्रीट लाइट के ऊपरी हिस्से पर सोलर पैनल की भी व्यवस्था की है ताकि ऊर्जा के स्रोतों का और अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सके।
राख से इंक और एल्गी का निर्माण
कचरे के जलने के बाद बचने वाली सामग्री को भी पूरी तरह उपयोगी बनाया जाता है। कचरा जलने के बाद जो काली राख बच जाती है, उसे बर्बाद होने देने के बजाय एक पाइप के जरिए दूसरे क्षेत्र में भेजा जाता है। वहां कॉटन की सहायता से कार्बन को अलग कर लिया जाता है, जिससे पेन में इस्तेमाल होने वाली इंक तैयार की जा सकती है। इसके अलावा, बचा हुआ कार्बन तालाब के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होता है क्योंकि इसकी मदद से एल्गी का निर्माण किया जाता है। यह एल्गी तालाब में रहने वाले जीवों के लिए जरूरी विटामिन, मिनरल्स और पोषक तत्व प्रदान करती है, जिससे जलीय जीवों को उचित आहार मिल पाता है। इस प्रकार यह मॉडल कचरे के प्रभावी और बहुउद्देशीय उपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।



















