अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में पारंपरिक धारणा रही है कि युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में सोना निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना बन जाता है। मौजूदा दौर में मध्य पूर्व का संकट लगातार गहरा रहा है, लेकिन सोने के भाव में वह ऐतिहासिक उछाल देखने को नहीं मिल रहा है जिसकी सामान्य तौर पर उम्मीद की जाती है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और आने वाले समय में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी है। जब तक नीति निर्माताओं की ओर से दरों में इजाफे के संकेत मिलते रहेंगे, तब तक सैन्य तनाव बढ़ने की स्थिति में भी सोने की कीमतों में तेजी आने के बजाय गिरावट की संभावना ज्यादा बनी रहेगी।
कच्चे तेल में तेजी और ट्रेजरी यील्ड का दबाव
बाजार के हालिया आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि जब भी कच्चे तेल के भाव में बड़ा उछाल आया, सोने पर उसका विपरीत असर देखने को मिला। सैन्य संघर्ष के उन 12 कारोबारी दिनों में जब तेल के दामों में सबसे तेज बढ़त दर्ज की गई, उनमें से 10 दिनों में सोना नीचे फिसला। इन गिरावट वाले दिनों में सोने में औसतन करीब 1.5% की कमी देखी गई। 10 जुलाई को लड़ाई दोबारा शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 30% तक चढ़ चुकी हैं, जबकि इसी समयावधि में सोने में 1% से भी कम की बढ़त दर्ज हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि जब बाजार के प्रतिभागी भू-राजनीतिक जोखिम के मुकाबले ब्याज दरों के गणित को ज्यादा तवज्जो देते हैं, तो सुरक्षित माने जाने वाले निवेश का व्यवहार कैसा होता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर महंगाई को हवा देती हैं, जिससे केंद्रीय बैंक पर दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ जाता है। 10 सितंबर को जब सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले हुए, तब कच्चे तेल के भाव 6.7% चढ़ गए थे। उसी दिन दो वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 0.13 अंक की बढ़त हुई, जबकि सोने के भाव 1.2% टूट गए। सुरक्षा की तलाश में खरीदारी करने वालों के मुकाबले उन निवेशकों की बिकवाली कहीं अधिक हावी रही, जो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गणना कर रहे थे।
तेल के प्रभाव के बिना भी दरों का सीधा असर
यह रुख केवल तेल के झटकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्वतंत्र बयानों से भी इसकी पुष्टि होती है। 23 सितंबर को जब फेड गवर्नर बार ने कहा कि महंगाई को दोबारा 2% के लक्ष्य पर लाने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत हो सकती है, तो बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उस दिन कच्चे तेल में 2.6% की गिरावट दर्ज हुई थी, फिर भी दो वर्षीय यील्ड 0.14 अंक बढ़ गई और सोने की कीमतों में 1.3% की गिरावट दर्ज की गई। यह स्पष्ट करता है कि बॉन्ड यील्ड की दिशा सीधे तौर पर कीमती धातु की चाल तय कर रही है।
फेडरल रिजर्व का रुख और हालिया बैठक के संकेत
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने 16 सितंबर को ब्याज दरों में 0.25% की वृद्धि की थी, जिसके बाद नीतिगत दर बढ़कर 3.75%-4.00% के दायरे में पहुंच गई। इस फैसले पर सभी सदस्यों की सर्वसम्मति थी। फैसले के अगले दिन ट्रेजरी यील्ड 2024 के बाद के अपने उच्चतम स्तर से नरम पड़ी, जिससे सोने में सुधार दिखा। सोना 18 सितंबर को नीतिगत निर्णय के बाद के अपने उच्चतम स्तर तक पहुंचा था, लेकिन मौजूदा समय में यह उस स्तर से करीब 6% नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि इस दौरान ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
बुधवार को जारी बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) से यह बात सामने आई कि अधिकांश अधिकारी 2026 के अंत से पहले दरों में एक और 0.25% की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। मिनट्स में एक और बढ़ोतरी का वादा तो किया गया है, लेकिन इसके लिए कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है। इस अनिर्णय के कारण दिसंबर की बैठक से पहले आने वाले फेडरल रिजर्व के प्रत्येक भाषण में संभावित तारीख को लेकर अटकलें लगना तय है।
ट्रेडर्स का अनुमान और आगामी महत्वपूर्ण घटनाक्रम
बाजार के कारोबारी पहले से ही अगली बढ़ोतरी की तारीख को लेकर दांव लगा रहे हैं। प्रेडिक्शन मार्केट्स के अनुसार, 28 अक्टूबर की बैठक में दर बढ़ने की संभावना करीब 17% आंकी जा रही है, जबकि 9 दिसंबर की बैठक के लिए यह संभावना लगभग 75% तक पहुंच गई है। अधिकारियों के पास 9 दिसंबर तक अपना पक्ष रखने का समय है, जिसका अर्थ यह है कि तब तक सोने पर दरों का यह दबाव बना रह सकता है।
सोने के दृष्टिकोण से आने वाले समय में दो बड़े घटनाक्रम बेहद अहम हैं, जिनके बीच पांच सप्ताह का अंतर है। पहला, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर हमले फिर शुरू हो सकते हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों से भी कहा है कि वे मतदान के बाद दोबारा कार्रवाई की उम्मीद करते हैं। इसके ठीक बाद 9 दिसंबर को फेडरल रिजर्व अपनी नीतिगत बैठक में ब्याज दरों पर फैसला करेगा और उसी दिन अधिकारियों के 2027 के नए ब्याज दर अनुमान भी जारी किए जाएंगे।
करेंसी बाजार और कीमती धातुओं की ताजा स्थिति
एशियाई कारोबारी सत्र में गुरुवार को अन्य मुद्राओं और संपत्तियों में भी हलचल देखी गई। AUD/USD जोड़ी 0.6950 के ठीक ऊपर स्थिर बनी रही। इस दौरान पेंटागन द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के लिए सैन्य तैयारी के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई। भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम, फेड मिनट्स के कड़े रुख और मजबूत अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के चलते अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है, जिसका असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ा है।
USD/JPY जोड़ी गुरुवार के एशियाई सत्र में 158.00 के नीचे लाल निशान में आ गई। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप की अटकलों के बीच डॉलर में मुनाफावसूली देखने को मिली। डॉलर अपने 18 महीने के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे फिसला, जिससे इस जोड़ी में सुस्ती आई। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर की मजबूती की रफ्तार धीमी पड़ने और ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट के बाद सोने ने कुछ स्थिरता हासिल की और गुरुवार को अच्छी बढ़त के साथ प्रति ट्रॉय औंस $4,150 के स्तर के करीब पहुंच गया।

















