अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने के अप्रत्याशित फैसले ने वैश्विक विदेशी मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक की सीमा दोगुनी किए जाने के बाद अमेरिकी डॉलर में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते प्रमुख मुद्रा जोड़ों (करंसी पेयर) के समीकरण बदल गए हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से कैरी ट्रेड रणनीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कम अस्थिरता (वोलेटिलिटी) के इस माहौल में अंतरराष्ट्रीय निवेशक जापानी येन के बजाय स्विस फ्रैंक को फंड जुटाने की प्राथमिक मुद्रा (फंडिंग करंसी) के रूप में चुन रहे हैं। इसके साथ ही प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जो वैश्विक पूंजी प्रवाह में हो रहे व्यापक बदलाव को दर्शाती है।
यूएस ट्रेजरी का $4 अरब का लिक्विडिटी सपोर्ट विस्तार
विदेशी मुद्रा बाजार में आए इस हालिया बदलाव की शुरुआत बुधवार को 12:32 GMT पर हुई, जब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने ऋण प्रबंधन संचालन से जुड़ा एक अनपेक्षित नीतिगत अपडेट जारी किया। इस नए निर्देश के तहत, सरकारी अधिकारी दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड प्रतिभूतियों के लिए लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक संचालन को बड़े पैमाने पर बढ़ाएंगे। यह बायबैक मुख्य रूप से दो प्रमुख परिपक्वता (मैच्योरिटी) क्षेत्रों पर केंद्रित होगा: 10-वर्ष से 20-वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड और 20-वर्ष से 30-वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड क्षेत्र।
ट्रेजरी ने अपने परिचालन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए प्रति ऑपरेशन अधिकतम खरीद सीमा को $2 अरब से बढ़ाकर कम से कम $4 अरब कर दिया है। खरीद क्षमता को दोगुना करने वाला यह विस्तारित कार्यक्रम 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक लगातार जारी रहेगा। कई हफ्तों तक चलने वाले इस समय अंतराल में दोगुनी खरीद शक्ति के साथ बाजार में उतरकर ट्रेजरी का मुख्य उद्देश्य बाजार समायोजन के दौरान लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड को एक मजबूत तरलता सुरक्षा प्रदान करना है।
सरकारी अधिकारियों के इस साहसिक कदम की तुलना बाजार सहभागियों द्वारा अप्रैल 2025 की परिस्थितियों से की जा रही है। अप्रैल 2025 में अमेरिकी नीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठने के कारण सभी संपत्ति वर्गों में बिकवाली देखी गई थी और निवेशकों ने सुरक्षा के लिए अमेरिकी डॉलर तथा स्विस फ्रैंक का रुख किया था। हालांकि, आईएनजी के बाजार रणनीतिकार क्रिस्टन टर्नर वर्तमान स्थिति को अलग नजरिए से देखते हैं। टर्नर का मानना है कि ट्रेजरी के इस अग्रसक्रिय समर्थन को जोखिम-सकारात्मक (रिस्क-पॉजिटिव) घटनाक्रम के रूप में देखा जाना चाहिए जो संकट के संकेत के बजाय बाजार में स्थिरता लाता है। यदि ट्रेजरी बाजार को सुरक्षित रखने का यह प्रयास वोलेटिलिटी को कम रखने में सफल रहता है, तो यह उच्च रिटर्न की तलाश करने वाले कैरी ट्रेड निवेशकों के लिए एक आदर्श माहौल तैयार करेगा।
कैरी ट्रेड डायनेमिक्स: येन की जगह स्विस फ्रैंक बना पहली पसंद
कम अस्थिरता वाले दौर में निवेशक अक्सर कैरी ट्रेड रणनीति का सहारा लेते हैं। इस रणनीति के तहत कम ब्याज दर वाली मुद्रा से धन उधार लेकर उसे अधिक यील्ड देने वाली संपत्तियों में निवेश किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से जापानी येन (JPY) ऐसे सौदों के लिए मुख्य फंडिंग मुद्रा रहा है। हालांकि, हालिया बाजार आंकड़ों से संकेत मिलता है कि स्विस फ्रैंक (CHF) अब तेजी से जापानी येन का स्थान ले रहा है।
बुधवार को ट्रेजरी के ऐलान के बाद USD/CHF में आई तेज गिरावट मुख्य रूप से पोजीशन एडजस्टमेंट का परिणाम थी। इस घोषणा से पहले, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के सख्त (हॉकिश) रुख के कारण वित्तीय बाजारों में डॉलर पर बड़ी लॉन्ग पोजीशन बनी हुई थी। ट्रेजरी की ओर से तरलता बढ़ाने की खबर आते ही निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की और डॉलर की अपनी पोजीशन को कम किया। आईएनजी के विश्लेषण के अनुसार, जब तक वोलेटिलिटी निचले स्तर पर बनी रहती है, स्विस फ्रैंक अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगा और यूरोपीय क्रॉस-करंसी पेयर को ऊपर की ओर धकेलेगा।
विशेष रूप से, विश्लेषकों का अनुमान है कि EUR/CHF दोबारा 0.9400 के स्तर की ओर बढ़ेगा। बुधवार के नीतिगत ऐलान के बाद से इस करंसी पेयर ने 0.9350 के स्तर से ऊपर मजबूत वापसी की है, जो बाजार में इसके लिए मजबूत निचले समर्थन को दर्शाती है। यह तकनीकी सुधार इस बात की पुष्टि करता है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम वाली परिसंपत्तियों को फाइनेंस करने के लिए निवेशक स्विस मुद्रा का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
वैश्विक बॉन्ड यील्ड दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंची
एक तरफ जहां विदेशी मुद्रा बाजार नई दरों के हिसाब से खुद को ढाल रहा है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक फिक्स्ड-इनकम (बॉन्ड) बाजारों में भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन और जापान सहित प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड यील्ड में एक साथ तेज उछाल दर्ज किया गया है। कई देशों में बेंचमार्क यील्ड पिछले एक दशक से भी अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिसने वैश्विक संस्थागत निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
दुनियाभर में सरकारी कर्ज पर मिलने वाले प्रतिफल में इस बढ़ोतरी के पीछे केंद्रीय बैंकों की बैलेंस शीट और व्यापक आर्थिक परिदृश्य में आ रहे बदलाव जिम्मेदार हैं। दीर्घकालिक उधार लागत में वृद्धि कॉरपोरेट क्षेत्र और सरकारों दोनों के लिए चुनौतियां पेश करती है। हालांकि, तात्कालिक रूप से ट्रेजरी का बायबैक ढांचा लंबी अवधि की परिपक्वता वाले बॉन्ड में पैदा होने वाले तनाव को सोखने का काम करेगा, जिससे अमेरिकी उधार लागत में अचानक होने वाले अनियंत्रित उछाल को रोका जा सके और डॉलर की विनिमय दर को अन्य मुद्राओं के मुकाबले संतुलित रखा जा सके।
यूरोपीय सत्र के दौरान प्रमुख करंसी पेयर का हाल
अमेरिकी डॉलर में जारी कमजोरी ने शुक्रवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को मजबूत सहारा दिया। GBP/USD ने अपनी बढ़त बनाए रखी और 1.3650 के स्तर के करीब मजबूती से टिका रहा। ब्रिटिश पाउंड ने यूके के कमजोर खुदरा बिक्री (रिटेल सेल्स) आंकड़ों के बावजूद अपनी बढ़त नहीं गंवाई। हालांकि यूके के रिटेल सेल्स आंकड़े अनुमान से कमजोर रहे थे, लेकिन डॉलर में लगातार बनी चौतरफा बिकवाली ने पाउंड को गिरने से बचा लिया।
इसी तरह, EUR/USD ने 1.1700 के स्तर के आसपास अपनी साप्ताहिक बढ़त को समेकित (कंसोलिडेट) किया। यूरोपीय मुद्रा बाजार ने जर्मनी के मिश्रित परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों के असर को आसानी से पचा लिया। जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अब निवेशक यूरोजोन और अमेरिका के लिए आगामी अगस्त के प्रारंभिक PMI सर्वेक्षण आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन तब तक अमेरिकी डॉलर की कमजोरी यूरो को मजबूती प्रदान कर रही है।
सोने में तेजी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर उम्मीदें
डॉलर के नरम पड़ने से कीमती धातुओं के बाजार को भी नई ऊर्जा मिली है। सोने की कीमतें शुक्रवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत में $4,550 प्रति औंस के स्तर से ऊपर कारोबार करती दिखीं, जो जून की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। तकनीकी रूप से सोने ने अपने 200-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट हासिल किया है और यह बढ़त को बनाए हुए है।
सोने में आई इस तेजी का सीधा संबंध फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों से है। पिछले सप्ताह जारी अमेरिकी मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) आंकड़ों में महंगाई की दर में नरमी के संकेत मिले थे, जिसके बाद वित्तीय बाजारों ने फेड द्वारा जल्द ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया। घटती मुद्रास्फीति की चिंताएं, ट्रेजरी का तरलता समर्थन और कमजोर डॉलर—इन तीनों कारकों ने मिलकर सोने की कीमतों को ऊपरी स्तरों पर बनाए रखा है।



















