अमरीकी शेयर बाजार के वायदा कारोबार में शुक्रवार को यूरोपीय कारोबारी समय के दौरान हल्का सुधार देखने को मिला। पिछले कारोबारी सत्र में वॉल स्ट्रीट में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने राहत की सांस ली है। इस समय निवेशक सरकारी बांड बाजार में अमरीकी वित्त मंत्रालय के अभूतपूर्व नीतिगत हस्तक्षेप और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा होने वाले मुद्रास्फीति के दबाव का सावधानीपूर्वक आकलन कर रहे हैं। शुक्रवार सुबह प्रमुख वायदा सूचकांकों में मजबूती दर्ज की गई, जिसमें डाउ जोंस वायदा 0.13 प्रतिशत बढ़कर 52,900 के पार पहुंच गया। इसी तरह S&P 500 वायदा 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 7,680 के करीब कारोबार कर रहा है, जबकि तकनीकी शेयरों वाले Nasdaq 100 वायदा में 0.38 प्रतिशत का उछाल आया और यह 29,400 के स्तर को पार कर गया।
वायदा बाजार में यह सुधार गुरुवार को वॉल स्ट्रीट पर हुई भारी बिकवाली के बाद देखने को मिला है। गुरुवार के नियमित कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए थे। नियमित सत्र के दौरान डाउ जोंस 1.32 प्रतिशत टूट गया, S&P 500 में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और Nasdaq कंपोजिट 1.00 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। बाजार में बिकवाली का दायरा काफी व्यापक था, जिसके तहत S&P के 11 में से 9 प्रमुख सेक्टर गिरावट के साथ बंद हुए। कंज्यूमर स्टैपल्स, हेल्थ केयर और कंज्यूमर डिस्क्रेप्शनरी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान देखा गया, क्योंकि निवेशक ट्रेजरी यील्ड में उछाल और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंतित थे।
ट्रेजरी का बड़ा फैसला: बांड बायबैक में बढ़ोतरी
इस सप्ताह वैश्विक वित्तीय बाजारों का मुख्य ध्यान सरकारी बांड बाजारों पर केंद्रित रहा है, जहां अमरीका, यूरोप, ब्रिटेन और जापान में दीर्घकालिक बांड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बांड यील्ड में हो रही इस बढ़ोतरी को रोकने और उधारी लागत को नियंत्रित करने के लिए अमरीकी वित्त मंत्रालय ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया। अमरीकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट की ओर से बुधवार को 12:32 GMT पर घोषणा की गई कि सरकार लंबी अवधि के ऋण बायबैक कार्यक्रम का विस्तार करेगी। इसके तहत प्रति इश्यू 4 अरब डॉलर से अधिक के बांड खरीदे जाएंगे, जो कि पहले की 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन की सीमा से दोगुना है।
यह विस्तारित बायबैक योजना मुख्य रूप से 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की परिपक्वता वाली बांड श्रेणियों पर लागू होगी। यह योजना 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक चलेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बाजार में सरकारी बांडों की अतिरिक्त आपूर्ति को सोखना और बांड बाजार की तरलता को बनाए रखना है। इस घोषणा के बाद अमरीका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.7 प्रतिशत के आसपास स्थिर हो गई। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उधारी लागत घटाने की यह सरकारी योजना केवल अस्थायी राहत प्रदान कर सकती है।
आर्थिक बुनियादी ढांचे और मुद्रास्फीति की चुनौतियां
रैबोबैंक के बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमरीकी ट्रेजरी यील्ड में आई यह गिरावट बहुत कम समय के लिए ठहर सकती है। उनका मानना है कि जब तक बुनियादी आर्थिक कारक जैसे उच्च मुद्रास्फीति, बढ़ता बजटीय घाटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारी निवेश की मांग कायम रहेगी, तब तक बांड यील्ड को बढ़ने से रोकना बेहद कठिन होगा। ये दीर्घकालिक कारक बांड बाजार पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का तर्क है कि राजकोषीय खर्च में बड़े बदलाव के बिना यह बांड बायबैक कार्यक्रम ब्याज दरों की मुख्य दिशा को पूरी तरह नहीं बदल सकता।
दूसरी तरफ, ऊर्जा बाजार से मिलने वाले संकेत भी केंद्रीय बैंकों और निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, कच्चा तेल (CL=F) 86.64 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो अपने पिछले बंद स्तर 87.83 डॉलर से 1.35 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। कच्चे तेल की 52-सप्ताह की सीमा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रही है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, कच्चा तेल दीर्घकालिक तेजी के रुझान में है, जहां 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 82.69 डॉलर अपने 200-दिवसीय EMA 75.74 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। अन्य तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 58 पर है, MACD हिस्टोग्राम 0.64 है और ATR 3.60 डॉलर दर्ज किया गया है। इसके लिए प्रमुख पिवट स्तर 86.65 डॉलर, सपोर्ट S1 85.79 डॉलर, S2 84.94 डॉलर और रेजिस्टेंस R1 87.50 डॉलर तथा R2 88.36 डॉलर हैं।
रैबोबैंक के विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल में तेजी के कारण अमरीकी बाजार में मुद्रास्फीति का प्रीमियम जुड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार अमरीका में 5y5y इन्फ्लेशन स्वैप फॉरवर्ड दर अपने मई के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई है, भले ही इस अवधि के दौरान हेडलाइन मुद्रास्फीति दर में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट आई हो। यह स्थिति दर्शाती है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में सुधार के बावजूद बाजार आधारित दीर्घकालिक मुद्रास्फीति की आशंकाएं बनी हुई हैं।
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजार का हाल
शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में अमरीकी डॉलर की कमजोरी का असर देखा गया, जिससे प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को समर्थन मिला। यूरोपीय सत्र में GBP/USD मजबूती के साथ 1.3650 के करीब कारोबार करता नजर आया। ब्रिटेन में खुदरा बिक्री के कमजोर आंकड़े आने के बावजूद यह जोड़ी डॉलर की नरमी के दम पर अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही।
इसी तरह EUR/USD भी 1.1700 के स्तर के आसपास समेकित होता दिखा। जर्मनी से आए मिले-जुले PMI आंकड़ों के बाद निवेशक अब यूरोजोन और अमरीका के अगस्त PMI सर्वेक्षणों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में भी तेजी का रुख कायम रहा। सोना 4,550 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता देखा गया, जो जून की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। सोना अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से ऊपर निकल चुका है, जिसे डॉलर की कमजोरी और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी न करने की संभावनाओं से बल मिला है।
डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज का ढांचा और इतिहास
डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शेयर बाजार सूचकांकों में से एक है। इसकी स्थापना चार्ल्स डाउ द्वारा की गई थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी नींव रखी थी। यह सूचकांक अमरीका की 30 प्रमुख दिग्गजों कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को मापता है। S&P 500 जैसे बाजार पूंजीकरण पर आधारित सूचकांकों के विपरीत, डाउ जोंस एक प्राइस-वेटेड सूचकांक है। इसकी गणना 30 कंपनियों के शेयर मूल्यों का योग करके उसे एक विशेष भाजक (डिविजर) से भाग देकर की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 है।
चूंकि यह सूचकांक केवल 30 बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए आलोचक अक्सर इसे पूरे अमरीकी बाजार का व्यापक पैमाना नहीं मानते। हालांकि, यह सूचकांक अमरीकी अर्थव्यवस्था की सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक बना हुआ है। कंपनियों के तिमाही नतीजे, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और रोजगार के आंकड़े इसके उतार-चढ़ाव को तय करते हैं। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियां और मुद्रास्फीति के आंकड़े भी डाउ जोंस की दिशा तय करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
डाउ थ्योरी के सिद्धांत और ट्रेडिंग के विकल्प
शेयर बाजार के तकनीकी विश्लेषण में डाउ थ्योरी का महत्वपूर्ण स्थान है, जिसे चार्ल्स डाउ ने विकसित किया था। इस सिद्धांत का मुख्य नियम यह है कि बाजार के प्राथमिक रुझान की पुष्टि तभी मानी जाती है जब डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ जोंस ट्रांसपोर्टेशन एवरेज दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ें। इसके साथ ही ट्रेडिंग वॉल्यूम को भी रुझान की पुष्टि के लिए आवश्यक माना जाता है।
डाउ थ्योरी बाजार के रुझान को तीन मुख्य चरणों में बांटती है। पहला चरण एक्यूमुलेशन का होता है, जहां समझदार संस्थागत निवेशक शेयर खरीदना या बेचना शुरू करते हैं। दूसरा चरण पब्लिक पार्टिसिपेशन का होता है, जब आम निवेशक बाजार के रुझान को देखकर इसमें शामिल होते हैं। तीसरा और अंतिम चरण डिस्ट्रीब्यूशन का होता है, जहां शुरुआती निवेशक अपना मुनाफा वसूल कर बाजार से बाहर निकलने लगते हैं।
निवेशक डाउ जोंस सूचकांक में विभिन्न वित्तीय साधनों के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) के जरिए निवेशक पूरे सूचकांक को एक शेयर की तरह खरीद सकते हैं, जिसमें SPDR Dow Jones Industrial Average ETF (DIA) प्रमुख है। इसके अलावा वायदा (Futures) अनुबंध, ऑप्शन (Options) और म्यूचुअल फंड के जरिए भी डाउ जोंस की 30 कंपनियों के पोर्टफोलियो में निवेश और सट्टेबाजी की जा सकती है।



















