अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में न्यूजीलैंड डॉलर के खिलाफ निवेशकों के मंदी वाले दांव अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। इसके बावजूद वित्तीय संस्था एमयूएफजी का आकलन है कि कीवी डॉलर में यहां से आगे किसी बड़ी गिरावट का रास्ता आसान नहीं रहने वाला है। एक्सचेंज आंकड़ों और वैश्विक व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए विशेषज्ञ यह संकेत दे रहे हैं कि बाजार में पहले से मौजूद भारी शॉर्ट पोजीशन की वजह से बिकवाली का दबाव सीमित हो सकता है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची न्यूजीलैंड डॉलर में शॉर्ट पोजीशन
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज के साप्ताहिक आईएमएम पोजीशनिंग डेटा से पता चलता है कि 11 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह तक लीवरेज्ड फंड्स की कुल शॉर्ट पोजीशन 2006 में दर्ज आंकड़ों की शुरुआत के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि डेरिवेटिव और वायदा बाजार में न्यूजीलैंड डॉलर के खिलाफ जिस बड़े पैमाने पर पोजीशन तैयार की गई है, वह बाजार की धारणा के एक सिरे पर पहुंचने का संकेत देती है।
एमयूएफजी के विश्लेषक डेरेक हैलपेनी के अनुसार, जब किसी मुद्रा के खिलाफ बाजार में इतनी आक्रामक बिकवाली का दबाव पहले से ही कायम हो जाता है, तो किसी नए नकारात्मक उत्प्रेरक के बिना भाव में और अधिक बड़ी गिरावट लाना काफी कठिन हो जाता है। अत्यधिक शॉर्ट पोजीशन कई बार बाजार में अचानक आने वाले शार्ट-कवरिंग बाउंस के लिए भी दरवाजा खोल देती है।
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की ब्याज दरों पर संदेह
बाजार में दिख रहा यह मंदी का रुख काफी हद तक उन संदेहों से उपजा है जो रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा अगले एक साल के भीतर ब्याज दरों में 100 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करने की संभावना पर व्यक्त किए जा रहे हैं। ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप बाजार वर्तमान में रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की ओर से कठोर मौद्रिक नीति की उम्मीदें संजोए हुए है, लेकिन अर्थव्यवस्था के धरातल पर स्थितियां इसके विपरीत संकेत दे रही हैं।
न्यूजीलैंड के श्रम बाजार के नए आंकड़े दिखाते हैं कि देश में बेरोजगारी दर 5.4% से बढ़कर 5.6% पर पहुंच गई है। हालांकि इस दौरान रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन श्रम आपूर्ति बढ़ने के कारण अर्थव्यवस्था में सुस्ती का दायरा विस्तृत हुआ है। श्रम बाजार में आई इस ढील ने केंद्रीय बैंक के आक्रामक रूप से दरें बढ़ाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले कीवी डॉलर का गणित
मुद्रा विनिमय बाजार में क्रॉस-करेंसी ट्रेडर्स का ध्यान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और न्यूजीलैंड डॉलर के अनुपात यानी AUD/NZD जोड़ी पर केंद्रित है। एमयूएफजी के अनुसार, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से ब्याज दरों में संभावित वृद्धि के ज्यादा स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जिससे ऑस्ट्रेलियाई संपत्तियों पर मिलने वाली प्रतिफल दर अधिक आकर्षक बनी हुई है।
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के लिए ओआईएस कर्व में अगले 12 महीनों के दौरान एक दर वृद्धि से कम की संभावना आंकी गई है, जिसे विश्लेषक कमतर आंका गया मान रहे हैं। इसके साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक जोखिमों का सीधा फायदा न्यूजीलैंड के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया को ज्यादा मिलता दिखता है। इन वजहों से निवेशक न्यूजीलैंड डॉलर के स्थान पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को तरजीह दे रहे हैं।
एल नीनो और व्यापार शर्तों में संभावित बदलाव
हालांकि न्यूजीलैंड डॉलर के लिए सभी संकेत केवल नकारात्मक ही नहीं हैं। मौसम प्रणाली एल नीनो के कारण आगामी छह महीनों में वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। न्यूजीलैंड कृषि और डेयरी उत्पादों का बड़ा निर्यातक है, इसलिए खाद्य कीमतों में उछाल देश के टर्म्स ऑफ ट्रेड यानी व्यापार शर्तों को मजबूती दे सकता है।
यदि कृषि वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं, तो न्यूजीलैंड की निर्यात आय में सुधार होगा, जो कीवी डॉलर को निचले स्तरों पर मजबूत सहारा प्रदान कर सकती है। यह कारक आगे चलकर भारी मंदी के दांव लगाने वाले निवेशकों के लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।
वैश्विक बाजार: पाउंड, यूरो और सोने की चाल
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटेन के पाउंड स्टर्लिंग ने शुक्रवार के यूरोपीय सत्र में बढ़त बनाए रखी और GBP/USD जोड़ी 1.3650 के आसपास कारोबार करती दिखी। हालांकि ब्रिटेन के रिटेल सेल्स आंकड़े निराशाजनक रहे थे, लेकिन सकारात्मक पीएमआई डेटा ने पाउंड को सहारा दिया। दूसरी ओर, जर्मन और यूरोज़ोन पीएमआई के मिले-जुले आंकड़ों के बीच EUR/USD जोड़ी 1.1700 के स्तर पर समेकित होती नजर आई।
जिंस बाजार में सोना जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बना रहा और यूरोपीय सत्र में $4,550 प्रति औंस से ऊपर कारोबार करता दिखा। अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों में नरमी के संकेतों के बाद निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा तत्काल ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों को कम कर दिया है। इसके अलावा 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के ऊपर तकनीकी ब्रेकआउट ने भी सोने को मजबूती दी है।
बॉन्ड यील्ड में उछाल और अमेरिकी वित्त विभाग का बड़ा कदम
वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय सबसे बड़ा बदलाव सरकारी बॉन्ड बाजार में देखा जा रहा है। अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन और जापान में दीर्घकालिक बॉन्ड यील्ड में जबरदस्त उछाल आया है और कई बेंचमार्क यील्ड एक दशक से भी अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
इस स्थिति से निपटने के लिए अमेरिकी वित्त विभाग ने बुधवार को 12:32 GMT पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की। वित्त विभाग ने 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष वाले दीर्घकालिक बॉन्ड क्षेत्रों में तरलता सहायता बायबैक परिचालन का आकार दोगुना करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अधिकतम सीमा को $2 बिलियन प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन किया जाएगा। यह योजना 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक लागू रहेगी।
NZD/USD का लाइव मार्केट तकनीकी ढांचा
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, NZD/USD जोड़ी फिलहाल 0.5977 के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव 0.5954 की तुलना में +0.39% की बढ़त दर्शाती है। बीते 52 हफ्तों के दौरान इस करेंसी जोड़ी का दायरा 0.5584 से 0.6093 के बीच रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के बराबर दर्ज किया गया है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 68 पर बना हुआ है, जो मजबूत अपट्रेंड का संकेत देता है। 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA20 0.5882 पर है, जबकि EMA50 0.5844 और EMA200 0.5827 पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए के ऊपर होना दीर्घकालिक तेजी यानी गोल्डन क्रॉस का समर्थन करता है। वर्तमान में धुरी बिंदु (Pivot Point) 0.5970 पर है, जिसके लिए पहला प्रतिरोध स्तर 0.5997 और दूसरा प्रतिरोध 0.6016 पर मौजूद है, जबकि पहला समर्थन स्तर 0.5951 और दूसरा समर्थन 0.5924 पर स्थापित है।



















