अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के कारोबार में आज मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग द्वारा बॉन्ड बायबैक योजना में विस्तार के ऐलान के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार दर्ज किया गया है। इसके चलते सोने की हाजिर कीमतों (XAU/USD) पर दबाव बढ़ा है और भाव 4,500 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रहे हैं। बाजार में हाल ही में 4,490.45 डॉलर का निचला स्तर देखने को मिला था, हालांकि लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार सोना 4,542 डॉलर के स्तर पर मजबूती से बना हुआ है, जो पिछले बंद भाव 4,489 डॉलर से 1.16 प्रतिशत अधिक है। बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में 0.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 4.67 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई, जबकि 30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 0.5 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.21 प्रतिशत पर कारोबार कर रही है। ब्याज देने वाली संपत्तियों पर रिटर्न बढ़ने से बिना ब्याज वाली कीमती धातु सोने का आकर्षण अस्थायी रूप से थोड़ा कम होता दिखता है, लेकिन कुल मिलाकर तेजी का रुख बना हुआ है।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा कदम और बॉन्ड मार्केट में हलचल
अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी विभाग) ने बॉन्ड बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) को सहारा देने के लिए अपने नियमित शेड्यूल से हटकर एक बड़ा निर्णय लिया है। विभाग ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि वह 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की अवधि वाले दीर्घकालिक सरकारी प्रतिभूतियों के लिए अपनी तरलता-सहायता बायबैक नीलामी के आकार को दोगुना से अधिक करेगा। इस योजना के तहत प्रत्येक ऑपरेशन की अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन किया जा रहा है। यह नया ढांचा 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक जारी रहेगा।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकार की उधारी लागत में होने वाली तेज बढ़ोतरी को रोकना और बांड बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। हालांकि, वित्तीय बाजारों के विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण मुद्रास्फीति के दबाव फिर से बढ़ने की आशंका और अमेरिकी सरकार पर बढ़ते सार्वजनिक कर्ज के बोझ की वजह से बॉन्ड यील्ड में यह तेजी का पुनरुद्धार देखने को मिला है। निवेशकों को डर है कि महंगाई की दर लंबी अवधि तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है, जिसके कारण अमेरिकी बॉन्ड बाजार में यील्ड को सहारा मिला है।
तकनीकी संकेतक और सोने के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल्स
दैनिक ट्रेडिंग चार्ट का गहन विश्लेषण करने पर पता चलता है कि XAU/USD का मुख्य ट्रेंड मजबूती से ऊपर की ओर बना हुआ है। सोना अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 4,299.17 डॉलर (तथा लाइव डेटा में 4,304 डॉलर) से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है, जो अल्पावधि में एक स्पष्ट बुलिश रुझान को दर्शाता है। कीमत और मूविंग एवरेज के बीच का यह अंतर तकनीकी दृष्टिकोण से खरीदारों के प्रभुत्व को साबित करता है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 64.64 के स्तर पर है (और लाइव संकेतकों में 70 के करीब पहुंच रहा है), जो यह दर्शाता है कि बाजार में खरीदारी का वेग (मोमेंटम) बहुत मजबूत है, लेकिन यह अभी अत्यधिक ओवरबॉट स्थिति में नहीं पहुंचा है।
नीचे की तरफ, सोने के लिए पहला तत्काल तकनीकी सहारा 4,490 डॉलर के हालिया क्लोजिंग जोन के आसपास देखा जा रहा है। यदि कीमतों में और गिरावट आती है, तो 20-दिवसीय EMA के पास 4,299 डॉलर का स्तर एक मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में काम करेगा, जहां तेजी की उम्मीद करने वाले निवेशक (बुल) किसी भी सुधारात्मक गिरावट पर अपनी खरीदारी बढ़ा सकते हैं। वर्तमान डेटा सेट में निकट भविष्य के लिए कोई बड़ा तकनीकी प्रतिरोध नजर नहीं आ रहा है, जिससे सोने के लिए आगे का रास्ता ऊपर की ओर ही सुगम दिखता है। जब तक कीमतें 4,299 डॉलर के क्षेत्र से नीचे नहीं आतीं, तब तक सोने का सकारात्मक और बुलिश नजरिया कमजोर होने की कोई संभावना नहीं है। लाइव तकनीकी संकेतकों के अनुसार, सोने का पिवट प्वाइंट 4,553 डॉलर पर है, जबकि पहला रेजिस्टेंस (R1) 4,572 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस (R2) 4,602 डॉलर पर स्थित है। वहीं, पहला सपोर्ट (S1) 4,523 डॉलर और दूसरा सपोर्ट (S2) 4,504 डॉलर पर बना हुआ है।
करेंसी और क्रिप्टो मार्केट पर व्यापक असर
अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा तरलता बढ़ाने के इस कदम का असर केवल सोने पर ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) और क्रिप्टोकरेंसी बाजारों पर भी व्यापक रूप से देखा जा रहा है। यूरो और डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान तीन महीने के उच्चतम स्तर 1.1700 के पार पहुंच गई है, क्योंकि अमेरिकी डॉलर में फिर से गिरावट का रुख देखने को मिला है। इसी तरह, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) भी 1.3650 के स्तर के करीब कारोबार करते हुए अपने मई के उच्च स्तर के करीब पहुंच रहा है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट के कारण इन प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को मजबूती मिली है।
दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार ने अमेरिकी ट्रेजरी के कर्ज बायबैक दोगुना करने के फैसले का शानदार स्वागत किया है। बिटकॉइन (BTC) की कीमतों में लगातार बढ़त देखी जा रही है और यह 72,000 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ रहा है। बाजार में तरलता की स्थिति में सुधार होने और निवेशकों के भरोसे में वृद्धि के कारण क्रिप्टो बाजार में शॉर्ट स्क्वीज की स्थिति बनी, जिसने बिटकॉइन सहित अन्य डिजिटल संपत्तियों की कीमतों को एक नया उत्प्रेरक प्रदान किया है।
सुरक्षित निवेश और केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी
मानव इतिहास में सोने की भूमिका हमेशा से मूल्य के संचय (स्टोर ऑफ वैल्यू) और विनिमय के माध्यम के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वर्तमान समय में, आभूषणों के निर्माण और इसकी प्राकृतिक चमक के अलावा, सोने को मुख्य रूप से एक वैश्विक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता है। आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के समय में निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। इसके अतिरिक्त, सोना मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) और गिरती हुई कागजी मुद्राओं के खिलाफ एक बेहतरीन हेज का काम करता है, क्योंकि इसका मूल्य किसी एक विशिष्ट देश, सरकार या केंद्रीय बैंक के फैसले पर निर्भर नहीं करता।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। संकट के समय में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की विनिमय दर को स्थिरता देने और अर्थव्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड तोड़ 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह इतिहास में दर्ज आंकड़ों में किसी भी एक वर्ष की सबसे बड़ी खरीदारी थी। चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपनी आर्थिक संप्रभुता को मजबूत करने के लिए अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से बढ़ोतरी कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों और सोने का अंतर-संबंध
वित्तीय बाजारों में सोने का अमेरिकी डॉलर (USD) और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ एक विपरीत (इन्वर्स) संबंध होता है। जब अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर कमजोर होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में अंकित सोने की कीमतें ऊपर उठती हैं। इससे वैश्विक निवेशकों और केंद्रीय बैंकों को डॉलर के अलावा अन्य संपत्तियों में निवेश फैलाने का मौका मिलता है। इसी तरह, सोने का जोखिम भरी संपत्तियों जैसे शेयर बाजार (स्टॉक्स) के साथ भी उलटा रिश्ता है। जब शेयर बाजारों में तेजी की लहर होती है, तो सोने की मांग घटती है, जबकि इक्विटी बाजारों में बिकवाली होने पर निवेशक सुरक्षा के लिए सोने की ओर रुख करते हैं।
सोने की कीमत को प्रभावित करने वाले कारकों में भू-राजनीतिक अस्थिरता, मंदी की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियां प्रमुख हैं। चूंकि सोना कोई नियमित ब्याज या लाभांश नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो सोने की मांग बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब उधारी की लागत यानी ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सोने पर दबाव बनता है। बाजार के विश्लेषक सागर दुआ का भी मानना है कि चार्ट एनालिसिस और डॉलर की चाल पर पैनी नजर रखकर ही सोने के भविष्य के रुझान का सही अनुमान लगाया जा सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व के तनाव पर निवेशकों की बारीक नजर रहेगी।



















