संयुक्त राज्य अमेरिका के खजाना विभाग (यूएस ट्रेजरी) द्वारा उठाए गए एक अप्रत्याशित कदम ने अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा और पूंजी बाजारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। ट्रेजरी द्वारा अपने दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम में अचानक की गई बढ़ोतरी के कारण अमेरिकी डॉलर में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जबकि दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं और डिजिटल परिसंपत्तियों में बढ़त देखी जा रही है। वाशिंगटन द्वारा ऋण पुनर्खरीद का दायरा बढ़ाने के इस फैसले ने सरकारी कर्ज के बढ़ते स्तर और ब्याज दर के दृष्टिकोण को लेकर वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि इस कदम का उद्देश्य बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करना है, लेकिन इसके कारण अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की स्थिति बेहद संवेदनशील और कमजोर हो गई है।
अचानक बॉन्ड बायबैक विस्तार से अमेरिकी डॉलर में बड़ी गिरावट
बाजार में इस बड़े बदलाव की शुरुआत बुधवार को भारतीय समयानुसार शाम 6:02 बजे (12:32 GMT) हुई, जब यूएस ट्रेजरी ने अपने तय कैलेंडर से इतर हटकर बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम को तुरंत बढ़ाने का ऐलान किया। इस नए दिशानिर्देश के तहत 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड की पुनर्खरीद प्रक्रिया का विस्तार किया गया है। इससे पहले प्रत्येक ऑपरेशन के लिए बायबैक की अधिकतम सीमा $2 billion रखी गई थी। नए फैसले के तहत इस परिचालन सीमा को दोगुना करके कम से कम $4 billion प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। यह विस्तारित पुनर्खरीद योजना 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी।
ट्रेजरी के इस ऐलान के तुरंत बाद विदेशी मुद्रा बाजार में जोरदार उथल-पुथल देखने को मिली। अप्रैल, मई और जुलाई के दौरान हुए दो आधिकारिक मुद्रा हस्तक्षेप मामलों को छोड़ दें, तो अमेरिकी मुद्रा में आई यह गिरावट मार्च के बाद से एक ही दिन में दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट है। वित्तीय बाजारों के निवेशकों ने वाशिंगटन द्वारा बायबैक राशि को दोगुना करने के फैसले को इस बात का स्पष्ट संकेत माना कि अमेरिकी अधिकारी बढ़ते कर्ज की लागत और बॉन्ड यील्ड में जारी अस्थिरता को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं।
राजकोषीय घाटे पर विश्लेषकों का आकलन और परिसंपत्तियों की मांग
एमयूएफजी के वरिष्ठ वित्तीय रणनीतिकार डेरेक हैलपेनी और अब्दुल-अहद लॉकहार्ट ने अमेरिकी ट्रेजरी के इस फैसले के व्यापक आर्थिक प्रभावों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि हालांकि स्कॉट बेसेंट जैसे दिग्गजों द्वारा दिए गए बयानों में बॉन्ड बाजार को स्थिर करने की बात कही जाती है, लेकिन बॉन्ड यील्ड को दीर्घकालिक रूप से नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी सरकार को बढ़ते राजकोषीय घाटे को कम करना होगा और बजटीय अनुशासन लागू करना होगा। हालांकि, विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि निकट भविष्य में सरकारी खर्चों में किसी बड़ी कटौती या राजकोषीय समेकन की संभावना बेहद कम है। ऐसे में केवल बायबैक जैसे अस्थायी उपायों के सहारे यील्ड को थामने की कोशिशें उलटी पड़ सकती हैं।
एमयूएफजी के विश्लेषकों का तर्क है कि ट्रेजरी का यह नया ऐलान और जापान द्वारा किए गए हस्तक्षेप के संदर्भ में एफआईएमए (FIMA) रिपोर्ट में दी गई टिप्पणियां बाजार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। यह कदम निवेशकों को आश्वस्त करने के बजाय उनके भरोसे को कमजोर कर सकता है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड खरीदने की वैश्विक इच्छा घट सकती है या अमेरिकी डॉलर परिसंपत्तियों में निवेश करने की मांग में कमी आ सकती है। डेरेक हैलपेनी और अब्दुल-अहद लॉकहार्ट ने आगाह किया है कि भले ही ट्रेजरी का बायबैक प्लान बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने में सफल हो जाए, लेकिन यील्ड का निचला स्तर अमेरिकी डॉलर के आकर्षण को कम कर देगा, जिससे मुद्रा में आगे और गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
मुद्रास्फीति में नरमी और ब्याज दर की उम्मीदों पर प्रभाव
ट्रेजरी के बायबैक ऑपरेशन्स के अलावा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी मुद्रास्फीति की स्थिति भी बॉन्ड यील्ड की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि मुद्रास्फीति में कमी आने का सिलसिला इसी तरह जारी रहता है, तो इससे बॉन्ड यील्ड को स्वाभाविक रूप से निचले स्तर पर बनाए रखने में मदद मिलेगी। मुद्रास्फीति की यह नरमी ट्रेजरी के बायबैक फैसले से जुड़ी साख संबंधी चिंताओं को कुछ हद तक कम कर सकती है।
हालांकि, मुद्रास्फीति में गिरावट अमेरिकी डॉलर के लिए एक अलग तरह की चुनौती भी पेश करती है। यदि महंगाई दर उम्मीद से अधिक तेजी से घटती है, तो वित्तीय बाजार भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी या कड़े मौद्रिक रुख की संभावनाओं को खारिज कर देंगे। कड़े मौद्रिक रुख की उम्मीद समाप्त होने से अमेरिकी डॉलर को मिलने वाला मुख्य सहारा छिन जाएगा। एमयूएफजी का निष्कर्ष है कि इन तमाम व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिकी डॉलर में मजबूती के बजाय आगे कमजोरी आने के ही अधिक रास्ते खुल रहे हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं में उथल-पुथल
गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में यील्ड के नए समीकरणों का सीधा असर दिखाई दिया। ब्रिटिश पाउंड में डॉलर के मुकाबले जोरदार मजबूती दर्ज की गई और GBP/USD बढ़कर 1.3650 के करीब पहुंच गया, जो मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। बाजार प्रतिभागी इस बात का मूल्यांकन कर रहे हैं कि ट्रेजरी का यह कदम केवल एक अल्पकालिक लिक्विडिटी उपाय है या अमेरिकी ऋण प्रबंधन रणनीति में कोई बड़ा बदलाव है।
इसी तरह यूरोपीय एकल मुद्रा यूरो में भी डॉलर के मुकाबले शानदार बढ़त दर्ज की गई। EUR/USD यूरोपीय सत्र में 1.1700 के आंकड़े को पार कर गया, जो पिछले तीन महीनों का इसका सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक प्लान के कारण डॉलर में आई बिकवाली से यूरो को मजबूत सहारा मिला। दूसरी ओर, डॉलर की कमजोरी के बावजूद कीमती धातुओं के भाव में हल्की गिरावट देखी गई। गुरुवार को यूरोपीय कारोबार के दौरान सोना $4,500 प्रति औंस के स्तर से नीचे कारोबार करता रहा। निवेशक मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजारों के अन्य घटनाक्रमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेजी और शॉर्ट स्क्वीज की स्थिति
डिजिटल परिसंपत्ति बाजारों ने अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लिक्विडिटी बढ़ाने के फैसले का जबरदस्त उत्साह के साथ स्वागत किया। गुरुवार को बिटकॉइन में तेजी का सिलसिला जारी रहा और यह $72,000 के स्तर की ओर बढ़ता हुआ देखा गया। वित्तीय प्रणाली में तरलता बढ़ने की संभावना ने क्रिप्टो निवेशकों के मनोबल को काफी हद तक ऊंचा किया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक की सीमा को दोगुना करने के फैसले ने समग्र बाजार लिक्विडिटी में सुधार किया है, जिससे क्रिप्टो मार्केट को एक बड़ा पॉजिटिव उत्प्रेरक मिला है। इस अचानक आई तरलता और सकारात्मक माहौल ने बाजार में शॉर्ट स्क्वीज की स्थिति पैदा कर दी, जिसके कारण शॉर्ट पोजीशन लेने वाले कारोबारियों को अपनी पोजीशन तेजी से काटनी पड़ी और डिजिटल परिसंपत्तियों की कीमतों में उछाल आ गया।
आगामी आर्थिक आंकड़े और भू-राजनीतिक घटनाक्रम
आगे की दिशा के लिए बाजार प्रतिभागी अब आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक खबरों पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका के नए साप्ताहिक बेरोजगारी दावों (जॉबलेस क्लेम्स) के आंकड़े जल्द जारी होने वाले हैं, जिससे श्रम बाजार की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के भावी फैसलों का संकेत मिलेगा। इसके साथ ही मध्य पूर्व के ताजा हालात और विशेष रूप से ईरान से जुड़ी खबरों पर भी निवेशकों की कड़ी निगाह बनी हुई है, जो कच्चे तेल, सुरक्षित निवेश की मांग और वैश्विक बाजार की भावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं।



















