अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर चौतरफा दबाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भारी उछाल, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं के सख्त बयानों ने मिलकर बुलियन बाजार में बिकवाली को हवा दे दी है। 10-वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 15 आधार अंक बढ़कर 5.12% पर पहुंच गई, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेशकों का रुझान तेजी से घटा है। इसके चलते सोने की कीमतें अपने दो दिनों के बढ़त के सिलसिले को तोड़ते हुए 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गईं।
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के सख्त रुख से बढ़ी ब्याज दर की आशंका
फेडरल रिजर्व ने हाल ही में नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। इसके साथ ही बैंक के अनुमानों (डॉट प्लॉट) से यह स्पष्ट संकेत मिला कि बहुसंख्यक अधिकारी चालू वर्ष के अंत तक दरों में कम से कम एक और वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के लगातार आ रहे बयानों ने बाजार में सख्त मौद्रिक नीति बने रहने की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
मिनियापोलिस फेड के नील काशकारी ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के हर पहलू में महंगाई अभी भी काफी अधिक बनी हुई है। सेंट लुइस फेड के अल्बर्टो मुसालेम ने भी स्पष्ट किया कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए दरों में और इजाफा करना जरूरी हो सकता है। वहीं, शिकागो फेड के ऑस्टन गूल्सबी ने चेतावनी दी कि बाजार में मजबूत उपभोक्ता मांग महंगाई को दोबारा भड़का सकती है।
बोस्टन फेड की सुसान कॉलिन्स ने भी महंगाई के बढ़ते जोखिमों पर चिंता जताते हुए दर वृद्धि का समर्थन किया। रिचमंड फेड के थॉमस बार्किन ने रेखांकित किया कि मुद्रास्फीति के झटके शांत होने में अधिक समय लग सकता है। फेड गवर्नर माइकल बर्र ने भी यही दोहराया कि आने वाले समय में दरों में और बढ़ोतरी की आवश्यकता होगी। इन बयानों के बाद आगामी अक्टूबर बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के अनुसार 52% से उछलकर 66% तक पहुंच गई, जबकि बाजार का एक बड़ा हिस्सा इसे 70% तक मान रहा है।
मजबूत पीएमआई आंकड़ों ने डॉलर इंडेक्स को दी ताकत
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आंकड़ों ने भी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति को आधार दिया है। एसएंडपी ग्लोबल की ओर से जारी सितंबर महीने के फ्लैश आंकड़ों के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 57.0 पर दर्ज की गई, जो पिछले महीने के 53.9 और 53.5 के अनुमान से काफी अधिक है। इसके अलावा, सर्विसेज पीएमआई 56.5 से उछलकर 58.7 पर पहुंच गई, जिसने विश्लेषकों के पूर्वानुमानों को पीछे छोड़ दिया। कंपोजिट पीएमआई भी पिछले महीने के 56.0 से बढ़कर 58.4 दर्ज की गई।
इन मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापता है, 0.7% चढ़कर 101.22 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक व्यापार में सोना अमेरिकी डॉलर में आंका जाता है, लिहाजा मजबूत डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए सोने को महंगा बना देता है, जिससे मांग में सुस्ती आती है।
कच्चे तेल पर नीतिगत कदम और भू-राजनीतिक मोर्चे पर हलचल
ऊर्जा बाजार में भी नीतिगत बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ट्रंप प्रशासन ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 90 दिनों के लिए डीजल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। इस खबर के सामने आते ही कच्चे तेल के वायदा भाव में नरमी दर्ज की गई, जिसने डॉलर को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया।
दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार, तेहरान शत्रुता समाप्त करने के संबंध में अपने प्रस्ताव पर वाशिंगटन की प्रतिक्रिया की समीक्षा कर रहा है। भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी की उम्मीद ने भी सोने से सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग को कुछ हद तक कम कर दिया है, हालांकि ट्रंप और शी की आगामी बैठक से पहले बाजार काफी सतर्क नजर आ रहा है।
तकनीकी संकेत: मंदी का दायरा और प्रमुख सपोर्ट स्तर
चार्ट पर तकनीकी संरचना की बात करें तो सोना हाल ही में 'बुलिश वेज' पैटर्न के ऊपरी स्तर को पार करने में विफल रहा। इसके बाद यह 100-दिवसीय और 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) के क्रमशः 4,313 डॉलर और 4,306 डॉलर के स्तरों से नीचे आ गया और नुकसान को बढ़ाते हुए 4,300 डॉलर के नीचे चला गया।
लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड फ्यूचर्स (GC=F) 4,322 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,376 डॉलर के मुकाबले 1.25% की दैनिक गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,750 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। दैनिक तकनीकी संकेतकों पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI-14) 42 के स्तर पर है, जो 50 के न्यूट्रल मार्क से नीचे कमजोर गति और बिकवाली के दबाव को दर्शाता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) -13.57 पर है और सिग्नल लाइन 5.57 पर है, जो हिस्टोग्राम पर -19.14 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है।
सोने के लिए 20-दिवसीय ईएमए 4,411 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,389 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,431 डॉलर पर स्थित है। 50-दिवसीय एसएमए 4,343 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,555 डॉलर पर है, जहां ईएमए50 के ईएमए200 से नीचे आने पर डेथ क्रॉस जैसी स्थिति दिखाई देती है। बोलिंजर बैंड (20, 2) 4,260 डॉलर से 4,625 डॉलर के दायरे में है, जिसका मध्य स्तर 4,443 डॉलर है। औसत ट्रू रेंज (ATR-14) 103.65 डॉलर पर दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है। प्रमुख स्तरों के लिहाज से पिवट स्तर 4,347 डॉलर पर है। नीचे की ओर पहला तात्कालिक सपोर्ट (S1) 4,286 डॉलर और दूसरा सपोर्ट (S2) 4,250 डॉलर पर है, जबकि 20-दिन का अहम सपोर्ट 4,273 डॉलर के आसपास देखा जा रहा है। ऊपर की ओर पहला रेजिस्टेंस (R1) 4,383 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस (R2) 4,443 डॉलर पर स्थित है। यदि रिकवरी बनती है, तो 4,365 से 4,370 डॉलर का वेज ट्रेंडलाइन और 4,400 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण बाधा साबित होगा।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सोने की बुनियादी भूमिका
ऐतिहासिक रूप से सोने ने मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी अहमियत बनाए रखी है। गहनों के निर्माण के अलावा, इसे मुद्रास्फीति और मुद्रा के अवमूल्यन के खिलाफ सबसे भरोसेमंद हेजिंग साधन माना जाता है क्योंकि यह किसी सरकार या जारीकर्ता की देनदारी पर निर्भर नहीं होता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। अशांत आर्थिक माहौल में अपनी मुद्राओं को सहारा देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए वे नियमित रूप से सोना खरीदते हैं। उच्च स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख का आधार माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड इतिहास में केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई सबसे बड़ी वार्षिक खरीदारी थी। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में लगातार वृद्धि कर रहे हैं।
ग्लोबल करेंसी मार्केट में अन्य घटनाक्रम
विदेशी मुद्रा बाजारों में भी अहम हलचल देखी गई। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। यह निर्णय नीति समिति में 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो काफी हद तक बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। इसके बावजूद, अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच यूएसडी/जेपीवाई 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता रहा। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में फ्लैश मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के संकुचन क्षेत्र में जाने और सर्विसेज विस्तार सुस्त रहने के कारण एयूडी/यूएसडी दबाव में आकर एशियाई सत्र के दौरान 0.7100 के स्तर का परीक्षण करता नजर आया।



















