अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं की ओर से मौद्रिक सख्ती जारी रखने के कड़े संकेतों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में जोरदार बिकवाली देखने को मिल रही है। हाजिर और वायदा कारोबार में XAG/USD का दबाव लगातार गहरा रहा है, जिससे धातु 64.00 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर की ओर फिसल गई है। ब्याज दरों में लंबे समय तक तेजी बने रहने की आशंकाओं के कारण गैर-उपज वाले कीमती धातुओं के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, जिससे निवेशकों की धारणा काफी सतर्क हो गई है।
चार्ट पैटर्न का टूटना और तकनीकी दायरे में फंसी चांदी
कीमतों के तकनीकी ढांचे पर नजर डालें तो बाजार में पहले बना हेड एंड शोल्डर्स चार्ट पैटर्न अमान्य हो गया था। इस संरचना के निष्प्रभावी होने के बाद अब अल्पावधि में चांदी 63.45 डॉलर से 67.50 डॉलर के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की ओर अग्रसर दिख रही है। दैनिक चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI में लगातार कमजोरी दर्ज की जा रही है, जो अपने न्यूट्रल स्तर से नीचे लगभग सीधी ढलान में गिरते हुए मंदी के स्पष्ट संकेत दे रहा है। ऐसे में बाजार का समग्र रुझान तात्कालिक रूप से नीचे की ओर बना हुआ है।
बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक चांदी 65.00 डॉलर के स्तर पर है, जो पिछले बंद भाव 65.93 डॉलर के मुकाबले 1.41 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का निचला स्तर 43.70 डॉलर और उच्चतम स्तर 121.30 डॉलर रहा है, जबकि आज का ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के मुकाबले 11.87 गुना अधिक दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों पर 14-अवधि का RSI 49 पर है, जबकि MACD 0.19 पर है जो 0.34 की सिग्नल लाइन से नीचे -0.15 के हिस्टोग्राम के साथ बियरिश गति का संकेत देता है। 20-दिवसीय EMA 65.38 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 65.05 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 66.85 डॉलर पर स्थित है, जिसमें 50-दिवसीय EMA के 200-दिवसीय EMA से नीचे जाने से डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। वहीं 50-दिवसीय SMA 63.35 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 72.60 डॉलर पर है, जबकि बॉलिंगर बैंड्स 62.71 डॉलर से 68.88 डॉलर के बीच 65.79 डॉलर के मध्य स्तर के साथ फैले हैं। 15 के ADX से संकेत मिलता है कि रुझान की ताकत फिलहाल सीमित है, जबकि स्टोकेस्टिक पर फास्ट लाइन 39 और सिग्नल लाइन 50 पर है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला 14-दिवसीय ATR 1.71 डॉलर पर बना हुआ है।
सपोर्ट और रेजिस्टेंस के प्रमुख स्तरों की परीक्षा
वर्तमान मूल्य व्यवहार में चांदी के लिए पहला तात्कालिक सहारा 64.00 डॉलर का निशान है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार यदि यह स्तर नीचे की तरफ टूटता है, तो बाजार का ध्यान 50-दिवसीय SMA यानी 63.45 डॉलर पर जाएगा। इसके बाद बिकवाली का दबाव 16 सितंबर के निचले स्तर 62.30 डॉलर का रुख करवा सकता है। मंदी का रुख और गहराने की सूरत में 23 मार्च का निचला स्तर 61.01 डॉलर और मनोवैज्ञानिक 60.00 डॉलर का मील का पत्थर परीक्षण के दायरे में आ जाएंगे। दैनिक पिवट स्तर 65.94 डॉलर पर है, जिसके नीचे पहला प्रमुख सपोर्ट S1 63.82 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 62.64 डॉलर पर आंका गया है।
इसके विपरीत, यदि बाजार अपनी दिशा पलटते हुए ऊपर की ओर रिकवरी शुरू करता है, तो शुरुआती प्रतिरोध 100-दिवसीय SMA यानी 66.20 डॉलर और इसके बाद 67.00 डॉलर पर देखने को मिलेगा। मजबूत तेजी की स्थिति में 22 सितंबर का उच्चतम स्तर 67.55 डॉलर और फिर पिवट रेजिस्टेंस R1 67.12 डॉलर व R2 69.23 डॉलर अहम रुकावट साबित होंगे। यदि भाव 67.55 डॉलर के पार निर्णायक ब्रेकआउट देते हैं, तो रास्ता 70.00 डॉलर और फिर 28 अगस्त के स्विंग हाई 71.12 डॉलर की ओर खुल सकता है।
कीमती धातु के रूप में चांदी की भूमिका और मूल्य निर्धारण
चांदी वैश्विक निवेशकों के बीच सक्रिय रूप से कारोबार की जाने वाली प्रमुख कीमती धातु है। ऐतिहासिक रूप से इसे मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यद्यपि यह सोने की तुलना में कम लोकप्रिय मानी जाती है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य का लाभ उठाने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव यानी हेज के तौर पर चांदी का रुख करते हैं। बाजार सहभागियों के लिए भौतिक चांदी को सिक्कों या सिल्लियों के रूप में खरीदने का विकल्प रहता है, अथवा वे अंतरराष्ट्रीय मूल्य प्रवृत्तियों पर आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF जैसे वित्तीय माध्यमों से इसमें निवेश करते हैं।
चांदी की कीमतों की दिशा कई वैश्विक घटकों पर निर्भर करती है। भू-राजनीतिक तनाव या गंभीर आर्थिक मंदी की आशंकाएं इस धातु में सेफ-हेवन खरीदारी को बढ़ा सकती हैं, हालांकि सोने की तुलना में यह प्रभाव कुछ संयमित रहता है। चूंकि चांदी से कोई ब्याज या उपज प्राप्त नहीं होती, इसलिए ब्याज दरों में कटौती होने पर इसके दाम आमतौर पर चढ़ते हैं। इसके अलावा डॉलर के साथ इसका प्रत्यक्ष जुड़ाव है, क्योंकि वैश्विक बाजार में इसका मूल्य निर्धारण अमेरिकी डॉलर में होता है। डॉलर में मजबूती आने पर चांदी की कीमतों पर अंकुश लगता है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों को रफ्तार देता है। खनन आपूर्ति, रीसाइक्लिंग दरें और निवेश मांग भी मूल्य संतुलन को सीधे प्रभावित करते हैं, क्योंकि सोने के मुकाबले चांदी की प्राकृतिक उपलब्धता काफी अधिक है।
औद्योगिक उपयोगिता और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं का असर
चांदी की सबसे बड़ी खासियत इसकी दोहरी प्रकृति है, जहां यह निवेश के साथ-साथ एक अपरिहार्य औद्योगिक धातु भी है। कॉपर और गोल्ड से भी अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सोलर ऊर्जा क्षेत्र में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। सौर पैनलों और उच्च तकनीक वाले उपकरणों में खपत बढ़ने से इसकी औद्योगिक मांग सीधे कीमतों को ऊपर खींचती है, जबकि कारखानों की गतिविधि सुस्त पड़ने पर मांग घटने से भाव गिरते हैं।
इस धातु के वैश्विक प्रवाह में अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाओं की परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी का उपभोग करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत में आभूषणों और पारंपरिक उपयोग के लिए उपभोक्ताओं की मजबूत खुदरा मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य संरचना को मजबूत सहारा प्रदान करती है।
सोने के साथ तालमेल और गोल्ड/सिल्वर रेशियो
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी की चाल काफी हद तक सोने की गति का अनुसरण करती है। दोनों के सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति होने के कारण जब सोने में तेजी आती है, तो चांदी भी प्रायः उसी रास्ते पर आगे बढ़ती है। इन दोनों धातुओं के सापेक्षिक मूल्यांकन को समझने के लिए बाजार विश्लेषक गोल्ड/सिल्वर रेशियो का सहारा लेते हैं। यह अनुपात यह दर्शाता है कि सोने के एक औंस का मूल्य प्राप्त करने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। जब यह अनुपात ऐतिहासिक रूप से बहुत ऊंचा हो जाता है, तो निवेशक इसे संकेत मानते हैं कि चांदी का अवमूल्यन हुआ है या सोना अत्यधिक महंगा है। इसके विपरीत, अनुपात के बहुत नीचे आने पर चांदी की तुलना में सोने के आकर्षक होने का संकेत मिलता है।
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों का व्यापक परिदृश्य
चांदी में आई इस गिरावट के साथ-साथ अन्य वित्तीय बाजारों में भी डॉलर की मजबूती का सीधा असर देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर AUD/USD दबाव में आकर 0.7100 के स्तर का परीक्षण करता दिखा, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के फ्लैश PMI आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र संकुचन में चला गया और सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से बढ़ा। उधर डॉलर के मुकाबले जापानी येन USD/JPY 157.50 के आसपास मंडराता रहा। बैंक ऑफ जापान ने नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप था, फिर भी फेड की सख्ती के आगे येन पर दबाव बना रहा। वहीं दूसरी ओर, सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट आई और पीली धातु लगातार दो दिनों की बढ़त को गंवाते हुए 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे साप्ताहिक निचले स्तर पर फिसल गई। वैश्विक निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष वार्ताओं के समाप्त होने के बाद अब आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर टकटकी लगाए हुए हैं।



















