विदेशी मुद्रा बाजार में जबरदस्त हलचल के बीच ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बीते कई महीनों के उच्चतम स्तर के करीब अपनी स्थिति मजबूत करता नजर आ रहा है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD करेंसी जोड़ा 1.36 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था, जो कि पिछले कारोबारी सत्र के बंद स्तर 1.35 से 0.51% की बढ़त दर्शाता है। हालांकि, बीते दिन 11 मई के बाद के सबसे ऊंचे स्तर को छूने के बाद पाउंड में थोड़ी हल्की नरमी देखने को मिली और यह अस्थायी रूप से 1.3600 के आंकड़े से नीचे आया। इसके बावजूद बाजार के बुनियादी कारक खरीदारों के पक्ष में झुके हुए हैं। अमरीकी ट्रेजरी विभाग द्वारा बॉन्ड बाजार को राहत देने के लिए लिक्विडिटी सहायता, यूनाइटेड किंगडम में महंगाई दर के आंकड़े और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों ने वैश्विक करेंसी और कमोडिटी बाजार को नई दिशा दी है।
अमेरिकी ट्रेजरी का बॉन्ड बायबैक और डॉलर पर दबाव
करेंसी बाजार की इस नई चाल के पीछे वॉशिंगटन में अमरीकी ट्रेजरी विभाग का एक बड़ा फैसला मुख्य वजह रहा है। अमरीकी ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की है कि वह लंबे समय की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड (नॉमिनल कूपन सिक्योरिटीज) की लिक्विडिटी सहायता बायबैक खरीदारी को सितंबर महीने से कम से कम दोगुना कर देगा। सरकार के इस कदम का मकसद बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ाना और लंबी अवधि के कर्ज में निवेशकों को राहत देना है। ट्रेजरी द्वारा बड़े पैमाने पर बॉन्ड की खरीदारी से बॉन्ड की कीमतें बढ़ीं और यील्ड में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते अमरीकी डॉलर इंडेक्स गिरकर तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण अमरीकी डॉलर पर भारी बिकवाली का दबाव बना, लेकिन गुरुवार को एशियाई सत्र में डॉलर ने खुद को थोड़ा संभाला। डॉलर को मुख्य रूप से दो मोर्चों से सहारा मिला। पहला, फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के मिनट्स में सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के संकेत मिले, जहां अधिकारियों ने महंगाई के जोखिमों को लेकर सतर्कता जताई। दूसरा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर आकर्षित किया। FOMC मिनट्स की सख्ती और पश्चिम एशिया के तनाव ने डॉलर की गिरावट पर अंकुश लगाया, जिससे GBP/USD की बढ़त पर अल्पकालिक रोक लगी।
ब्रिटेन में महंगाई के आंकड़े और बैंक ऑफ इंग्लैंड का रुख
दूसरी ओर, ब्रिटेन के आर्थिक आंकड़ों ने पाउंड को मजबूत सहारा दिया है। लंदन में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में यूनाइटेड किंगडम की वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 2.9% हो गई, जो बाजार के अनुमानों के बिल्कुल अनुकूल रही। इसके अलावा, खाद्य और ऊर्जा जैसी उतार-चढ़ाव वाली वस्तुओं को छोड़कर मापी जाने वाली कोर CPI महंगाई दर जुलाई में सालाना आधार पर 2.6% दर्ज की गई, जो 2.5% के अनुमानित आंकड़े से अधिक है।
कोर महंगाई में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद वित्तीय बाजारों में यह संभावना बेहद मजबूत हो गई है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) अपनी सख्त नीति जारी रखेगा। विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2026 में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा कम से कम एक बार ब्याज दर में बढ़ोतरी की लगभग पूरी संभावना है। ब्रिटेन में ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों के कारण वैश्विक निवेशकों के लिए ब्रिटिश पाउंड का आकर्षण बढ़ा है, जो GBP/USD जोड़े के लिए एक स्थायी सहारा साबित हो रहा है और किसी भी हल्की गिरावट पर निवेशकों को खरीदारी का मौका दे रहा है।
GBP/USD का टेक्निकल आउटलुक और अहम सपोर्ट स्तर
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो GBP/USD का चार्ट ढांचा लंबी अवधि के खरीदारों के लिए काफी सकारात्मक बना हुआ है। यह करेंसी जोड़ा अपने 100-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 1.3427 के काफी ऊपर बना हुआ है। बाजार विश्लेषक 100-दिन के SMA को प्राथमिक संरचनात्मक सपोर्ट मान रहे हैं, जो किसी भी बड़े पुलबैक या गिरावट की स्थिति में पाउंड को मजबूती देगा। जब तक कीमतें इस स्तर के ऊपर टिकी रहती हैं, तब तक पाउंड की तेजी का रुझान कायम रहने की संभावना है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD वर्तमान में अपनी 52-सप्ताह की रेंज 1.30 से 1.38 के बीच कारोबार कर रहा है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 66 पर है, जो बिना अत्यधिक ओवरबॉट्स के मजबूत बुलिश मोमेंटम को दर्शाता है। वहीं, 29 का एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) यह पुष्टि करता है कि बाजार में स्पष्ट ट्रेंड बना हुआ है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के आंकड़े भी तेजी का समर्थन करते हैं, जहां EMA20 1.35 पर, EMA50 1.34 पर और EMA200 1.34 पर स्थित है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के बीच गोल्डन क्रॉस का बनना लंबी अवधि की तेजी की पुष्टि करता है।
इसके अलावा, 0.01 का एवरेज ट्रु रेंज (ATR) व्यापारियों को 1.33 के 20-दिवसीय सपोर्ट के आसपास स्टॉप-लॉस सेट करने के लिए एक स्वाभाविक वोलैटिलिटी बफर प्रदान करता है। स्टोकेस्टिक इंडिकेटर में फास्ट लाइन 88 और सिग्नल लाइन 79 पर है, जबकि कीमतें 1.33 से 1.36 के बोलिंगर बैंड के भीतर बनी हुई हैं। पाउंड के लिए अगला प्रमुख रेजिस्टेंस लक्ष्य मई का उच्चतम स्तर 1.3655 है, जबकि 1.36 के स्तर पर नजदीकी रुकावट देखी जा रही है।
यूरो और सोने के बाजार पर असर
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का असर केवल पाउंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने पर भी इसका स्पष्ट प्रभाव पड़ा। EUR/USD करेंसी जोड़े में भी जोरदार तेजी देखी गई और यह बुधवार को 1.1650 के ऊपर निकलकर जून की शुरुआत के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। यूरोपीय साझा मुद्रा को अमरीकी ट्रेजरी के बायबैक फैसले और डॉलर में आई गिरावट का सीधा फायदा मिला।
कमोडिटी बाजार की बात करें तो सोने में भी मजबूती देखी गई। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया, जो जून के शुरुआती दिनों के बाद का सर्वोच्च स्तर है। हालांकि, FOMC के सख्त मिनट्स और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण सोने की ऊपरी बढ़त थोड़ी सीमित रही, लेकिन अमरीकी बॉन्ड Yield में गिरावट ने बिना ब्याज देने वाली इस पीली धातु को नीचे गिरने से बचाया। इस बीच, करेंसी परफॉर्मेंस हीट मैप के अनुसार, इस हफ्ते अमरीकी डॉलर ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है।



















