विदेशी मुद्रा बाजार (forex) में इन दिनों पाउंड स्टर्लिंग (Pound Sterling) और जापानी येन (Japanese Yen) के बीच एक दिलचस्प और दिशाहीन मुकाबला देखने को मिल रहा है। गुरुवार के शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान, GBP/JPY का यह अहम क्रॉस 218.15 से 218.20 के दायरे में झूलता रहा। हालांकि इस पेयर को कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल रही है, लेकिन इसके निचले स्तरों पर इसे काफी मजबूत सहारा मिला हुआ है। इसी सहारे के कारण यह अपने साप्ताहिक निचले स्तरों से ऊपर बना हुआ है। बाजार के खिलाड़ियों के बीच एक तरफ यह डर बना हुआ है कि जापान की सरकार अपनी गिरती घरेलू मुद्रा को बचाने के लिए सीधे तौर पर बाजार में हस्तक्षेप (intervention) कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ, बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) की आक्रामक बयानबाजी भी येन को कुछ ताकत दे रही है। इन दोनों कारकों ने मिलकर इस क्रॉस के लिए ऊपरी स्तरों पर एक मजबूत दीवार खड़ी कर दी है, जिससे इसके और ऊपर जाने की संभावनाएं फिलहाल सीमित नजर आ रही हैं। हालांकि, इन सब के बावजूद पाउंड के पक्ष में कई बुनियादी आर्थिक कारण मौजूद हैं जो इसे ज्यादा गिरने नहीं दे रहे हैं।
ब्याज दरों का भारी अंतर और कैरी ट्रेड का खेल
जापान और दुनिया के बाकी देशों, खासकर ब्रिटेन की मौद्रिक नीति (monetary policy) के बीच जो एक बहुत बड़ी खाई बनी हुई है, वह इस क्रॉस को गिरने से रोक रही है। सच्चाई यह है कि अन्य प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में जापान में कर्ज लेने की लागत अभी भी असाधारण रूप से कम बनी हुई है। बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) ने बहुत ही सतर्कता के साथ अपनी नीतियों को सामान्य करना शुरू किया है। इसी कड़ी में उन्होंने जून के महीने में अपनी अल्पकालिक नीतिगत दर को बढ़ाकर 1.00% कर दिया था। आपको बता दें कि यह 1995 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है, लेकिन फिर भी यह वैश्विक मानकों के हिसाब से काफी कम है। इसके बिल्कुल विपरीत, बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) की बेस रेट (base rate) अभी भी 3.75% के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इसका सीधा मतलब यह है कि दोनों देशों की ब्याज दरों के बीच लगभग 275 बेसिस पॉइंट्स (bps) का एक बहुत बड़ा अंतर मौजूद है। यह विशाल अंतर ही विदेशी मुद्रा बाजार के मशहूर 'कैरी ट्रेड' (carry trade) को पूरी तरह से सक्रिय और लाभदायक बनाए हुए है। कैरी ट्रेड में निवेशक बहुत कम ब्याज दर पर जापानी येन उधार लेते हैं और उस पैसे को अधिक ब्याज देने वाले पाउंड स्टर्लिंग के एसेट्स में निवेश कर देते हैं। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से अन्य मुद्राओं की तुलना में येन का प्रदर्शन लगातार निराशाजनक बना हुआ है और पाउंड को बढ़त मिल रही है।
ऊर्जा संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य का तनाव
ब्याज दरों के इस खेल के अलावा, जापानी अर्थव्यवस्था की एक और बड़ी कमजोरी है जो येन पर भारी दबाव डाल रही है। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है, जिसके कारण वह किसी भी वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रति बेहद संवेदनशील है। इस समय अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस तनाव की वजह से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। यह स्थिति जापान के लिए एक बहुत बड़े खतरे की घंटी है। जहाजों की आवाजाही रुकने या तेल परिवहन महंगा होने का सीधा असर जापान की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) पर पड़ता है। यही वजह है कि बाजार में येन को बेचने वालों (bears) का पलड़ा भारी हो जाता है। इस पूरे परिदृश्य को देखते हुए बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि GBP/JPY पेयर में अगर कोई भी गिरावट आती है, तो बड़े निवेशक उसे एक शानदार खरीदारी के मौके के तौर पर देखेंगे। इसी वजह से इस पेयर की किसी भी बड़ी गिरावट की संभावना बहुत ही सीमित मानी जा रही है।
पाउंड स्टर्लिंग: दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा का रसूख
अगर हम पाउंड स्टर्लिंग (Pound Sterling) के इतिहास और बाजार में इसके दबदबे की बात करें, तो यह कोई आम मुद्रा नहीं है। यह दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा है, जिसकी शुरुआत 886 ईस्वी में हुई थी, और आज यह यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) की आधिकारिक मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इसके रुतबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह दुनिया की चौथी सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली मुद्रा है। 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के कुल विदेशी मुद्रा लेनदेन का 12% हिस्सा अकेले पाउंड में ही होता है। इसका मतलब है कि हर रोज औसतन 630 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम कारोबार पाउंड में होता है। पाउंड के सबसे प्रमुख ट्रेडिंग पेयर में सबसे ऊपर GBP/USD है, जिसे बाजार की भाषा में 'केबल' (Cable) कहा जाता है। यह पूरे एफएक्स (FX) बाजार के 11% हिस्से पर कब्जा किए हुए है। इसके बाद GBP/JPY का नंबर आता है, जिसे ट्रेडर्स 'ड्रैगन' (Dragon) के नाम से बुलाते हैं। इसकी बाजार में हिस्सेदारी 3% है। तीसरे स्थान पर EUR/GBP की हिस्सेदारी 2% है। पाउंड को जारी करने और उसे नियंत्रित करने की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) के कंधों पर होती है।
महंगाई, ब्याज दरें और बैंक ऑफ इंग्लैंड की रणनीति
पाउंड स्टर्लिंग की कीमत (value) को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण और इकलौता कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति ही है। केंद्रीय बैंक अपने सभी बड़े फैसले इस बात को ध्यान में रखकर लेता है कि क्या उसने मूल्य स्थिरता (price stability) के अपने प्राथमिक लक्ष्य को हासिल कर लिया है या नहीं। उनका मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था में महंगाई दर (inflation) को 2% के स्थिर स्तर के आसपास बनाए रखना होता है। इस लक्ष्य को पाने के लिए बैंक के पास सबसे बड़ा हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना होता है। जब भी अर्थव्यवस्था में महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड इसे काबू में करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है। ब्याज दरें बढ़ने से आम लोगों और व्यवसायों के लिए कर्ज (credit) लेना काफी महंगा हो जाता है, जिससे बाजार में पैसे का बहाव कम होता है। हालांकि, यह कदम पाउंड के लिए बहुत ही सकारात्मक (positive) माना जाता है। ऊंची ब्याज दरों के कारण ब्रिटेन दुनिया भर के विदेशी निवेशकों के लिए अपना पैसा लगाने का एक बहुत ही आकर्षक केंद्र बन जाता है, जिससे पाउंड की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसके ठीक उलट, जब महंगाई बहुत ज्यादा गिर जाती है, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत होता है कि देश के आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे नाजुक हालात में, बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों को कम करने पर विचार करता है ताकि कर्ज सस्ता हो सके। सस्ता कर्ज मिलने से कंपनियां विकास से जुड़ी नई परियोजनाओं में निवेश करने के लिए ज्यादा पैसा उधार लेने को प्रोत्साहित होती हैं।
आर्थिक संकेतक जो पाउंड की दिशा तय करते हैं
ब्याज दरों के अलावा, देश के विभिन्न आर्थिक आंकड़े (data releases) भी अर्थव्यवस्था की सेहत का पैमाना होते हैं और वे पाउंड स्टर्लिंग की कीमत पर गहरा असर डालते हैं। ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई (PMI), और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण सूचक पाउंड की दिशा तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। एक मजबूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हमेशा स्टर्लिंग के लिए शुभ समाचार लेकर आती है। यह न केवल भारी मात्रा में विदेशी निवेश को देश के भीतर आकर्षित करती है, बल्कि यह बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी सीधे तौर पर प्रोत्साहित करती है। यह प्रक्रिया अंततः पाउंड को ताकतवर बनाती है। इसके विपरीत, अगर आने वाले आर्थिक आंकड़े कमजोर होते हैं, तो पाउंड स्टर्लिंग में स्वाभाविक रूप से गिरावट देखने को मिलती है। पाउंड के लिए एक और बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा व्यापार संतुलन (Trade Balance) का होता है। यह सूचक एक निश्चित अवधि के दौरान किसी देश द्वारा निर्यात (exports) से की गई कमाई और आयात (imports) पर खर्च किए गए पैसे के बीच के अंतर को मापता है। अगर कोई देश ऐसे उत्पादों का निर्यात करता है जिनकी दुनिया भर में बहुत ज्यादा मांग है, तो उसकी मुद्रा को स्वाभाविक रूप से फायदा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विदेशी खरीदारों को उन सामानों को खरीदने के लिए स्थानीय मुद्रा की बहुत जरूरत पड़ती है, जिससे उस मुद्रा की भारी मांग पैदा होती है। इसलिए, एक सकारात्मक (positive) व्यापार संतुलन मुद्रा को बहुत मजबूत बनाता है, जबकि नकारात्मक (negative) संतुलन उसे तेजी से कमजोर कर देता है।
GBP/USD का तकनीकी विश्लेषण और बाजार के ताजा रुझान
अगर हम बाजार के अन्य अहम हिस्सों पर नजर डालें, तो गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD पेयर 1.3385 के स्तर के करीब वापसी करता हुआ दिखाई दिया। हालांकि, ब्रिटेन के हालिया महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा ठंडे रहे हैं और दूसरी तरफ मध्य पूर्व (Middle East) में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इन दोनों कारणों से इस प्रमुख पेयर के बहुत ज्यादा ऊपर जाने की संभावनाएं काफी सीमित नजर आ रही हैं। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, वर्तमान में GBP/USD ठीक 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव से 0.05% की मामूली गिरावट को दर्शाता है। यह पेयर फिलहाल अपने 52-सप्ताह के विस्तृत दायरे 1.30 से 1.38 के बीच फंसा हुआ है। तकनीकी संकेतकों (technical indicators) की बात करें, तो इस समय बाजार का रुझान स्पष्ट रूप से नकारात्मक (downtrend) बना हुआ है। चार्ट पर एक खतरनाक डेथ क्रॉस (death cross) बन गया है, जहां 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA50) 200-दिन के मूविंग एवरेज (EMA200) के नीचे फिसल गया है। यह लंबी अवधि की कमजोरी का एक बहुत बड़ा संकेत है। वहीं, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) 49 के तटस्थ स्तर पर है, जो बाजार में किसी स्पष्ट दिशा की कमी को दिखाता है। एडीएक्स (ADX) केवल 15 के स्तर पर है, जो बाजार में किसी मजबूत ट्रेंड के न होने की ओर इशारा करता है। कीमतों की बात करें तो 20-दिन का सपोर्ट (support) लगभग 1.32 पर और रेजिस्टेंस (resistance) 1.35 पर मजबूती से बना हुआ है, जबकि दैनिक पिवट (pivot) 1.34 पर टिका है। फिलहाल सभी ट्रेडर्स की नजर शुक्रवार को आने वाली ब्रिटेन की रिटेल सेल्स (Retail Sales) रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे बाजार को एक नई दिशा मिल सकती है। दूसरी तरफ, EUR/USD पेयर में लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली और यह एशियाई घंटों के दौरान 1.1410 के आसपास कारोबार करता रहा। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (European Central Bank) के आगामी ब्याज दर के फैसले से ठीक पहले यूरो (Euro) को बाजार में एक बहुत ही ठोस समर्थन मिल रहा है।
सोना और कच्चे तेल में भारी उबाल
विदेशी मुद्रा बाजार से अलग हटकर अगर कमोडिटी बाजार (commodity market) की बात करें, तो वहां भी भारी हलचल मची हुई है। एशियाई सत्र के दौरान सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना (Gold) $4,100 के ऐतिहासिक और मनोवैज्ञानिक आंकड़े के ऊपर खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा लगता है कि पिछले दिन छुए गए अपने दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के बाद आई मामूली गिरावट अब रुक गई है और यह कीमती धातु फिर से उड़ान भरने की तैयारी में है। उधर कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों में भी भयंकर आग लगी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 11 जून के बाद के अपने बिल्कुल नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ऊर्जा की कीमतों में इस तरह का भारी उछाल पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है। इससे एक बार फिर वैश्विक स्तर पर महंगाई (inflation) बढ़ने का डर पैदा हो गया है। अगर महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) पर ब्याज दरों को और ज्यादा बढ़ाने का दबाव भी तेजी से बढ़ने लगेगा, जिसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ेगा।
क्रिप्टो बाजार: क्या अगला बुल रन शुरू होने वाला है?
डिजिटल संपत्तियों (digital assets) के मोर्चे पर भी कई बड़े और चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बिटवाइज़ (Bitwise) के सीआईओ मैट होगन (Matt Hougan) का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अगला बड़ा उछाल यानी बुल रन (bull market) अब पारंपरिक वित्त (traditional finance) और ब्लॉकचेन आधारित वित्तीय ढांचे के एक साथ मिलने से आएगा। मंगलवार देर रात प्रकाशित हुई अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में, होगन ने इस बात पर जोर दिया कि क्रिप्टो बाजार अब अपने सबसे निचले स्तर (market bottom) से बाहर निकलने के शुरुआती संकेत दे रहा है। उन्होंने इस बात को साबित करने के लिए आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 1 जुलाई के बाद से जहां एक तरफ अमेरिका का प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक नैस्डैक 100 (NASDAQ 100) 6% गिर चुका है, वहीं इसके बिल्कुल उलट सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 9% की बड़ी छलांग लगाई है।
रिपल और स्टेलर में सतर्कता का माहौल
हालांकि बिटकॉइन भले ही अपनी मजबूती दिखा रहा हो, लेकिन अन्य प्रमुख ऑल्टकॉइन्स (altcoins) जैसे रिपल (Ripple) और स्टेलर (Stellar) में अभी भी काफी सतर्कता के साथ कारोबार हो रहा है। ये दोनों ही टोकन इस समय अपने बहुत ही महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के आसपास मंडरा रहे हैं और दिशा तलाश रहे हैं। रिपल का कॉइन XRP अपने 50-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज (EMA) पर मौजूद कड़े रेजिस्टेंस (resistance) को तोड़ने की लगातार कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल रही है। वहीं दूसरी तरफ, स्टेलर (XLM) अपने $0.187 के बेहद अहम सपोर्ट जोन (support zone) के आसपास खुद को मजबूत (consolidate) करने में लगा हुआ है। डेरिवेटिव्स बाजार (derivatives market) के विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो वे काफी मिले-जुले नजर आते हैं, लेकिन उनमें मंदी (bearish) का एक हल्का सा झुकाव जरूर दिखाई दे रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेडर्स अभी भी बहुत सावधानी बरत रहे हैं और कोई बड़ा दांव खेलने से बच रहे हैं। इसी कारण से क्रिप्टो बाजार का अगला बड़ा मूव अभी भी पूरी तरह से अनिश्चितता के घेरे में बना हुआ है।



















