ऑस्ट्रेलियन अर्थव्यवस्था से आए निराशाजनक श्रम बाजार आंकड़ों के बाद अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर बिकवाली का दबाव काफी गहरा गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसने बाजार विश्लेषकों के 4.4 प्रतिशत के पूर्व अनुमान को पीछे छोड़ दिया। मुद्रा की कमजोरी का सबसे मुख्य कारण देश में रोजगार के अवसरों में आई भारी गिरावट रही। जहां जून महीने के दौरान 80.2 हजार नई नौकरियां जुड़ी थीं, वहीं जुलाई में 15.8 हजार नौकरियों का शुद्ध नुकसान हुआ। यह आंकड़ा बाजार विशेषज्ञों द्वारा लगाए गए 15.0 हजार नौकरियों के सकारात्मक वृद्धि अनुमान से काफी कमजोर साबित हुआ है, जिसके कारण AUD/USD विनिमय दर में दबाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
ऑस्ट्रेलियन श्रम बाजार में गिरावट और राबोबैंक का विस्तृत विश्लेषण
ऑस्ट्रेलियाई श्रम बाजार में आई इस अप्रत्याशित सुस्ती ने केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों को काफी हद तक सीमित कर दिया है। राबोबैंक के रणनीतिकारों ने अपने बाजार आकलन में स्पष्ट किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की गुंजाइश फिलहाल काफी कम दिखती है। वर्तमान बाजार वायदा दरों के आधार पर अगले 3 महीनों के नजरिए से नीतिगत दरों में महज 12 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की ही संभावना दर्ज की जा रही है।
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलियन डॉलर के सामने कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। मुख्य रूप से चीनी बाजार में ऑस्ट्रेलियन जिंसों और कच्चे माल की कमजोर मांग और ऑस्ट्रेलिया की घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती का माहौल मुद्रा की मजबूती को लगातार बाधित कर रहा है। यद्यपि ऑस्ट्रेलिया में मुद्रास्फीति के मानक अब भी केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्षित दायरे से ऊपर बने हुए हैं, लेकिन हालिया मासिक आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कीमतों का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। महंगाई में यह नरमी RBA को निकट भविष्य में दरों में आक्रामक बढ़ोतरी का कदम उठाने से रोक रही है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और CME FedWatch के आंकड़े
दूसरी तरफ, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की हालिया नीतिगत बैठक के मिनट्स से यह संकेत मिलता है कि नीति निर्माताओं ने बेंचमार्क ब्याज दर को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखने का निर्णय लिया था। हालांकि बैठक में यह भी कहा गया था कि यदि मुद्रास्फीति का दबाव लगातार बना रहता है तो दरों में पुनः बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है। इसके बावजूद, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में महंगाई के शांत होने के शुरुआती लक्षणों ने बाजार को यह सोचने पर मजबूर किया है कि तत्काल कोई दर वृद्धि नहीं होने वाली है।
सीएमई ग्रुप के CME FedWatch टूल के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय बाजार अब आगामी मौद्रिक नीति बैठक में फेड द्वारा दरें बढ़ाने की केवल 32.7 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं। यह आंकड़ा एक महीने पहले दर्ज की गई 47 प्रतिशत की संभावना के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से कम है। अमेरिकी ब्याज दरों के दृष्टिकोण में आए इस बदलाव और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने वैश्विक मुद्रा विनिमय दरों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है।
AUD/USD के लाइव तकनीकी स्तर और चार्ट संकेतक
तकनीकी चार्ट के नजरिए से देखा जाए तो AUD/USD जोड़ी के लिए पहला मुख्य मनोवैज्ञानिक प्रतिरोध 0.7200 के स्तर पर स्थित है। यदि विनिमय दर में गिरावट का रुझान आगे बढ़ता है तो तात्कालिक सपोर्ट 9-पीरियड EMA के पास 0.7087 के आसपास दिखाई देता है। इसके नीचे एक अधिक मजबूत सपोर्ट फ्लोर 50-पीरियड EMA के पास 0.7034 पर मौजूद है, जहां तकनीकी खरीदार दोबारा खरीदारी के लिए सक्रिय हो सकते हैं।
लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, AUD/USD जोड़ी फिलहाल 0.7122 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव 0.7082 की तुलना में 0.57 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाती है। बीते 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 64 के स्तर पर स्थिर है, जबकि MACD हिस्टोग्राम 0.00 और सिग्नल लाइन 0.00 के साथ बुलिश रुख बनाए हुए है। मूविंग एवरेज संकेतकों के तहत 20-दिवसीय EMA 0.7051, 50-दिवसीय EMA 0.7031 और 200-दिवसीय EMA 0.6899 पर हैं, जहां EMA50 का EMA200 से ऊपर होना एक मजबूत लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड (गोल्डन क्रॉस) की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स का ऊपरी दायरा 0.7130 और निचला दायरा 0.6949 है, जबकि ADX(14) 14 के स्तर पर सीमित दायरे वाले ट्रेंड का संकेत दे रहा है। पिवट प्वाइंट 0.7121 पर है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस R1 0.7132 व R2 0.7142 और नीचे सपोर्ट S1 0.7111 व S2 0.7099 बने हुए हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजार, सोना और क्रिप्टो संपत्तियों का प्रदर्शन
ऑस्ट्रेलियन डॉलर में आई सुस्ती के विपरीत वैश्विक मुद्रा बाजार के अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की गई है। GBP/USD जोड़ी 1.3600 का स्तर पार करते हुए मई के मध्य के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। पाउंड को यह मजबूती अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा लंबी अवधि के बॉन्ड के लिए अपनी तरलता सहायता बायबैक प्रक्रिया के आकार को दोगुना करने के फैसले से मिली, जिसने अमेरिकी डॉलर पर भारी बिकवाली का दबाव बनाया। इसके अलावा ब्रिटेन से आए आंकड़ों में जुलाई की वार्षिक CPI मुद्रास्फीति 2.9 प्रतिशत रही, जो अनुमानों के अनुकूल थी, जबकि कोर CPI 2.6 प्रतिशत पर दर्ज की गई।
इसी प्रकार EUR/USD जोड़ी में भी तेजी का रुख बना रहा और यह 1.1650 के पार पहुंचकर जून के शुरुआती स्तर के उच्चतम बिंदु तक जा पहुंची। अमेरिकी डॉलर में व्यापक नरमी ने यूरो को समर्थन दिया। वहीं कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतें एशियाई सत्र के दौरान 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास संघर्ष करती दिखाई दीं। अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव और फेड मिनट्स के सख्त संकेतों से अमेरिकी डॉलर को मिले हल्के सहारे ने सोने की तेजी को कुछ हद तक सीमित किया, हालांकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट से सोने की मांग बनी रही।
डिजिटल एसेट श्रेणी में, हाइपरलिक्विड (Hyperliquid) प्लेटफॉर्म के टोकन में 20 प्रतिशत से अधिक की भारी बढ़त देखने को मिली। यह तेजी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस वक्तव्य के बाद दर्ज की गई जिसमें उन्होंने कहा था कि कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) इस डिसेंट्रलाइज्ड परपेचुअल फ्यूचर्स प्लेटफॉर्म को अमेरिकी बाजार में एकीकृत करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।



















